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गोल्ड इंपोर्ट पर सरकार की बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक'! 100KG लिमिट, हर 15 दिन में होगी जांच

Published: Thu, 14 May 2026 08:27 PM (GMT+05:30)

Gold Import Duty in India: देश में बढ़ते सोने के आयात पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नियम ...और पढ़ें

गोल्ड इंपोर्ट पर सरकार की बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक'

गोल्ड इंपोर्ट पर सरकार की बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक'

HighLights

  1. सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की अधिकतम सीमा तय।

  2. पहली बार आवेदन करने वालों के लिए फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य।

  3. पिछली एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरी होने पर ही अगली अनुमति।

नई दिल्ली| देश में बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट (Gold Import) पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने सोने के आयात को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी पब्लिक नोटिस में एडवांस ऑथोराइजेशन स्कीम (Advance Authorisation Scheme) के तहत सोने के आयात पर नई शर्तें लागू की गई हैं। सरकार का फोकस अब गोल्ड इंपोर्ट की कड़ी निगरानी और एक्सपोर्ट के नाम पर होने वाले संभावित दुरुपयोग को रोकने पर है।

सोना आयात करने की अधिकतम सीमा 100KG

DGFT के नए आदेश के मुताबिक, अब एडवांस ऑथोराइजेशन के तहत सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम तय कर दी गई है। यानी कोई भी कंपनी या यूनिट इस स्कीम के तहत 100 किलोग्राम से ज्यादा सोना इंपोर्ट नहीं कर सकेगी।

मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य

सरकार ने पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों के लिए भी नियम सख्त कर दिए हैं। अब पहली बार एडवांस ऑथोराइजेशन लेने वाले आवेदक की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य होगा। संबंधित रीजनल अथॉरिटी फैक्ट्री में जाकर यह जांच करेगी कि यूनिट वास्तव में मौजूद है या नहीं, उसकी उत्पादन क्षमता कितनी है और वह ऑपरेशनल है या नहीं।

पहले एक्सपोर्ट दिखाओ, फिर अगली इंपोर्ट परमिशन पाओ

इतना ही नहीं, अब दूसरी बार गोल्ड इंपोर्ट की मंजूरी तभी मिलेगी, जब कंपनी पिछली मंजूरी के तहत तय एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन का कम से कम 50 प्रतिशत पूरा कर चुकी होगी। यानी पहले एक्सपोर्ट दिखाओ, फिर अगली इंपोर्ट परमिशन पाओ। सरकार का मकसद गोल्ड इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट के बीच पारदर्शिता और ट्रैकिंग मजबूत करना है।

DGFT ने मॉनिटरिंग सिस्टम भी काफी कड़ा कर दिया है। अब एडवांस ऑथोराइजेशन होल्डर को हर 15 दिन में अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करनी होगी। यह रिपोर्ट स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित करानी होगी, जिसमें गोल्ड इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट का पूरा ब्यौरा देना होगा।

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DGFT मुख्यालय को भेजनी होगी कंसोलिडेटेड रिपोर्ट

इसके अलावा संबंधित रीजनल अथॉरिटी को हर महीने DGFT मुख्यालय को कंसोलिडेटेड रिपोर्ट भेजनी होगी। इसमें यह बताया जाएगा कि कितने एडवांस ऑथोराइजेशन जारी हुए और उनके तहत कितना सोना आयात और निर्यात हुआ।

सरकार के इस फैसले को गोल्ड इंपोर्ट पर निगरानी बढ़ाने और ट्रेड सिस्टम में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब देश का गोल्ड इंपोर्ट बिल लगातार चिंता बढ़ा रहा है।