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दुनिया के बाजारों में हाहाकार, पर FII का भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ा भरोसा! निवेशकों ने एक दिन में कमाए ₹1 लाख करोड़

Published: Sat, 07 Nov 2026 09:19 AM (GMT+05:30)

दुनिया भर के बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में अप्रत्याशित तेजी देखी गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति ...और पढ़ें

FII का भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ा भरोसा! (AI फोटो)

FII का भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ा भरोसा! (AI फोटो)

HighLights

  1. भारतीय बाजार में निवेशकों ने एक दिन में ₹1 लाख करोड़ कमाए

  2. विदेशी निवेशकों ने छह साल की सबसे बड़ी खरीदारी की

  3. अमेरिकी AI चिंताओं, कच्चे तेल गिरावट से भारतीय बाजार मजबूत

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया भर के शेयर बाजारों में मचे हाहाकार के बीच भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी छलांग लगाई, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो। अमेरिकी बाजार में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजार भी बिकवाली के दबाव में रहे और इधर भारतीय बाजार ने भी शुक्रवार को गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
घरेलू और विदेशी निवेशकों ने जमकर खरीदारी शुरू कर दी। सेंसेक्स 81,028 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 25,000 का अहम स्तर छू लिया। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। सवाल यह है कि जब दुनिया के बड़े बाजारों में बिकवाली हो रही थी, तब भारतीय बाजार में इतनी बड़ी तेजी कैसे आ गई?

अमेरिकी बाजार में AI की चिंता

भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजारों के प्रदर्शन में इस बार सबसे बड़ा अंतर AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश का रहा। अमेरिका में पिछले कुछ समय से AI कारोबार और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश हो रहा है। चिप बनाने वाली कंपनियों से लेकर सर्वर, डेटा सेंटर और बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनियों तक में निवेशकों ने बड़ी रकम लगाई है। लेकिन अब इस तेजी को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों के बाद बाजार में जो उत्साह दिखाई दिया था, वह जल्द ही कमजोर पड़ गया। निवेशकों को आशंका है कि डेमोक्रेट्स AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और बिजली की खपत को लेकर सख्त नियमों की मांग कर सकते हैं। इससे AI कंपनियों के विस्तार और निवेश की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा है। इसी चिंता ने अमेरिकी टेक शेयरों में भारी बिकवाली कराई।

नैस्डैक में 19 महीने की सबसे बड़ी गिरावट

AI से जुड़ी चिंताओं का असर अमेरिकी बाजारों में दिखा। नैस्डैक में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई। इस बिकवाली के कारण नैस्डैक 100 की कुल मार्केट वैल्यू से करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर साफ हो गए। दरअसल, AI कारोबार में कंपनियां भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।
लेकिन अगर नियमन सख्त होता है या इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो इस पूरी निवेश श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। भारत के लिए राहत की बात यह रही कि घरेलू शेयर बाजार की सीधी निर्भरता अमेरिकी AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर उतनी अधिक नहीं है।

6 साल में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी खरीदारी

भारतीय बाजार में आई तेजी के पीछे सबसे अहम वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की वापसी मानी जा रही है। पिछले कई महीनों से भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली करने वाले विदेशी निवेशकों ने अब खरीदारी का रुख अपना लिया है।
एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 15,000 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यह लगभग छह साल में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी एकदिनी नेट खरीदारी रही। नवंबर में अब तक वे 45000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर चुके हैं।
विदेशी निवेशकों का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक भारतीय बाजार से पैसा निकालने के बाद अब वे फिर से घरेलू शेयरों में निवेश कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर AI से जुड़े निवेश को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बीच कुछ विदेशी पूंजी भारतीय बाजार की तरफ आती दिखाई दे रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा से एक बड़ा फैक्टर रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ता है। इससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
यही वजह है कि इस साल महंगे कच्चे तेल को लेकर निवेशक चिंतित थे। लेकिन हाल ही में क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट सुधरा। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म करने की दिशा में राजनीतिक घटनाक्रम आगे बढ़ सकते हैं।

क्या बाजार की तेजी में सभी शेयर शामिल हैं?

सेंसेक्स और निफ्टी में आई जबरदस्त तेजी को देखकर ऐसा लग सकता है कि पूरे बाजार में खरीदारी हो रही है, लेकिन वास्तविक तस्वीर थोड़ी अलग है। बाजार में तेजी का फायदा मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों के शेयरों को मिलता दिखाई दिया। शुक्रवार को जहां सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती से ऊपर चढ़ रहे थे, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 250 और निफ्टी मिडकैप 100 जैसे सूचकांक गिरावट में कारोबार कर रहे थे।
इसका मतलब है कि निवेशक फिलहाल हर तरह के शेयरों में पैसा लगाने के बजाय बड़ी और स्थापित कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार की इस चाल से यह संकेत भी मिलता है कि निवेशकों में अभी पूरी तरह जोखिम लेने का भरोसा नहीं लौटा है।

बाजार की तेजी के पीछे रहे ये पांच बड़े फैक्टर:

  • विदेशी निवेशकों की करीब 15,000 करोड़ रुपये की एकदिनी खरीदारी।
  • अमेरिकी AI कंपनियों में निवेश को लेकर बढ़ती अनिश्चितता।
  • भारत की AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में अपेक्षाकृत कम सीधी हिस्सेदारी।
  • कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट।
  • भारतीय कंपनियों की बेहतर होती कमाई और विदेशी पूंजी की वापसी की उम्मीद।

एशियाई बाजारों का बुरा हाल

बीते हफ्ते (खासकर शुक्रवार को) एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट और कोहराम देखने को मिला। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वॉल स्ट्रीट पर AI और टेक शेयरों में आई भारी बिकवाली के चलते पूरे एशिया के प्रमुख बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 6% तक टूट गया। जापान का निक्केई इंडेक्स 6.2% तक क्रैश होकर बियर मार्केट के दायरे में आ गया।
सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण के वैश्विक केंद्र ताइवान का इंडेक्स भी 4.5% से अधिक गिरा, जबकि एक समय इंट्राडे में यह 8% तक नीचे चला गया था। दुनिया की सबसे बड़ी चिप मेकर कंपनी टीएसएमसी (TSMC) का शेयर 8.5% नीचे बंद हुआ।

भारतीय कंपनियों की कमाई में सुधार से बढ़ा भरोसा

बाजार की तेजी को केवल विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। इसके पीछे भारतीय कंपनियों के कारोबार और कमाई में सुधार की उम्मीद भी एक अहम कारण है। जब कंपनियों के नतीजे बेहतर होते हैं, तो निवेशकों को उनके शेयरों में भविष्य की संभावनाएं दिखाई देती हैं।
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत की अपेक्षाकृत सीमित AI एक्सपोजर, घरेलू मांग और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इसके अलावा भारतीय बाजार पिछले कुछ समय से कई उभरते बाजारों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहा था।

क्या है जानकारों की राय?

मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बालिगा के मुताबिक, 'सबसे बड़ी अनिश्चितता पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक स्तर के साथ-साथ भारत पर इसके पड़ने वाले असर को लेकर रही, जिसके नतीजे में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और रुपये की कीमत में गिरावट देखने को मिली। अब, इस मुद्दे के जल्द सुलझने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, इसलिए ध्यान आगे चलकर अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर है। हम कई दशकों की ऐसी विकास दर की बात कर रहे हैं जो अन्य देशों के मुकाबले कहीं बेहतर है। दूसरी बात, मुश्किल हालात के बावजूद लगातार तीसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई काफी हद तक सकारात्मक रही है। तीसरी बात, रुपये की कीमत में आखिरकार सुधार आना शुरू हो गया है। और अंत में, जिन बाजारों ने FIIs को AI-फोकस्ड बाजारों की ओर आकर्षित किया था, वहां अब 'वैल्यूएशन बबल' फूटने के बाद स्थिति शांत हो रही है। ऐसे में भारत एक ऐसा व्यापक बाजार पेश करता है जिसमें काफी गहराई (मजबूती) है।'

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"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)

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