Stock Market Outlook: 21 से 25 सितंबर तक किधर जाएगा शेयर बाजार? कच्चा तेल और मिडिल ईस्ट तनाव पर रहेगी नजर
भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बाजार के रुख से तय ...और पढ़ें

अगला हफ्ता शेयर बाजार के लिए कैसा रहेगा?
HighLights
कच्चे तेल, भू-राजनीति और वैश्विक रुख तय करेंगे बाजार की दिशा
अमेरिकी प्रतिबंधों से रूस-ईरान व्यापार पर नई अनिश्चितता पैदा हुई
विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से ₹20,974 करोड़ निकाले
एजेंसी, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बाजार के रुख से तय होगी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से संबंधित नए कानून पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारतीय बाजार के लिए व्यापार मोर्चे पर एक नई अनिश्चितता पैदा हुई है।
ये होंगे अहम फैक्टर्स
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कच्चे तेल के दाम, बॉण्ड प्रतिफल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। उन्होंने कहा कि रूस से भारत की महत्वपूर्ण मात्रा में कच्चे तेल की खरीद को देखते हुए अमेरिका की नई व्यापार एवं प्रतिबंध नीति का असर बाजार पर पड़ सकता है।
100% टैरिफ की टेंशन
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून रूस और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को विस्तार देता है तथा रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देता है।
हालांकि, कानून के तहत किन देशों पर वास्तव में कितनी दर से शुल्क लगाया जाएगा, इस बारे में अमेरिकी प्रशासन के पास व्यापक अधिकार हैं। इसलिए भारत पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।
FPI ने निकाले हजारों करोड़
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयरों से करीब 20,974 करोड़ रुपये की निकासी की है। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों, बॉण्ड बाजार और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।
पिछला हफ्ता कैसा रहा?
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में भारत, अमेरिका और यूरो क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिका के आगामी श्रम बाजार आंकड़ों पर निवेशकों की नजर रहेगी। घरेलू बाजार में 24 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सूचीबद्धता भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 22,569 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को दूसरे दिन ही पूर्ण अभिदान मिल गया है। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 486.8 अंक यानी 0.65 प्रतिशत टूटा, जबकि एनएसई निफ्टी में 51.7 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
ये भी पढ़ें - याद है मोहन घी? पाकिस्तान से हुई शुरुआत, फिर हेडमास्टर लालाजी ने दिल्ली आकर पहुंचाया घर-घर; आजाद भारत का पहला बिलोना घी
"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"
(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
