सुपरटेक के अटके प्रोजेक्ट्स पर NCLAT ने जताई चिंता, IRP नियुक्ति में देरी पर लगाई फटकार; एनबीसीसी की है जिम्मेदारी
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने NBCC द्वारा सुपरटेक के अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य शुरू करने में ...और पढ़ें

NCLAT ने IRP की नियुक्ति में देरी पर चिंता जताई
HighLights
NCLAT ने NBCC की सुपरटेक प्रोजेक्ट्स में देरी पर चिंता व्यक्त की
IRP की नियुक्ति में हो रही देरी पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई
NCLT और IBBI को एक सप्ताह में IRP नाम सुझाने का निर्देश
एजेंसी, नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने पब्लिक सेक्टर की निर्माण क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी द्वारा सुपरटेक लिमिटेड की अटकी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने में देरी को लेकर चिंता जताई है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने रियल एस्टेट कंपनी के लिए अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
सुपरटेक फिलहाल कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में है। एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) को आईआरपी की नियुक्ति के लिए नाम सुझाने की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
एनसीएलटी द्वारा कार्रवाई हो चुकी
न्यायाधिकरण ने शुक्रवार को पारित अपने पांच पृष्ठ के अंतरिम आदेश में कहा कि आईआरपी की नियुक्ति के लिए आवेदन पर एनसीएलटी द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है और आईबीबीआई को नाम सुझाने हैं। आदेश में कहा गया कि यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
नियुक्त होने वाला समाधान पेशेवर अटकी हुई सुपरटेक परियोजनाओं की निगरानी कर रही उच्चतम न्यायालय की समिति का प्रमुख होने के साथ-साथ परियोजना-वार न्यायालय की समिति की अध्यक्षता भी करेगा। न्यायाधिकरण ने एनबीसीसी द्वारा पूर्व में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किए जाने का भी संज्ञान लिया।
विभिन्न शर्तें और समयसीमाएं तय
एनसीएलएटी ने छह मई, 2026 के अपने आदेश में सुपरटेक की परियोजनाओं में निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने के लिए विभिन्न शर्तों और समयसीमाओं का निर्धारण किया था। न्यायाधिकरण के अनुसार, कुछ शर्तें 31 जुलाई, 2026 तक पूरी की जानी थीं।
इनमें परियोजनाओं की उचित जांच, संबंधित वैधानिक निकायों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करना, निर्माण कार्य का ठेका देना, परियोजनाओं का कब्जा एनबीसीसी को सौंपना और आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराना शामिल था।
एक महीने में पूरा करना था कॉन्ट्रैक्ट
एनबीसीसी को निर्माण कार्य के ठेके की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक महीने के भीतर अनुबंध पूरा करना था और एक अक्टूबर, 2026 से निर्माण कार्य शुरू किया जाना था। हालांकि, 10 सितंबर को उच्चतम न्यायालय की समिति द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट में एनबीसीसी को इन शर्तों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट में लंबित शर्तों के लिए नई संभावित समयसीमा नहीं बताई गई थी। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की समिति की ओर से पेश वकील ने बताया कि 20 सितंबर को एनबीसीसी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें लंबित शर्तों को पूरा करने और निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निश्चित समयसीमा तय किए जाने की उम्मीद है।
कुछ दस्तावेज अभी उपलब्ध नहीं
न्यायाधिकरण ने यह भी संज्ञान लिया कि एनबीसीसी द्वारा सुपरटेक के निलंबित पूर्व प्रबंधन से मांगे गए कुछ दस्तावेज अभी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। एनसीएलएटी ने इन दस्तावेजों की सूची पेश करने और उसे निलंबित प्रबंधन के वकील के साथ साझा करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर, 2026 को होगी। गौरतलब है कि 12 दिसंबर, 2024 को एनसीएलएटी ने उच्चतम न्यायालय की समिति का गठन किया था और एनबीसीसी को सुपरटेक की 16 अटकी आवासीय परियोजनाओं को अपने हाथ में लेकर पूरा करने का निर्देश दिया था।
परियोजनाओं की निगरानी के लिए परियोजना-वार समितियों के गठन और अलग-अलग खातों के रखरखाव का भी निर्देश दिया गया था। सुपरटेक के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया 20 मार्च, 2021 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने उसके प्रमुख ऋणदाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू की थी।
