IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने का सरकार का नया प्लान, LIC भी घटाएगी होल्डिंग; शेयर पर रहेगी नजर
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और LIC की हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया फिर से शुरू की है। ...और पढ़ें
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IDBI Bank में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश जारी
HighLights
IDBI बैंक में रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया फिर से शुरू
पिछली बोलियां रिजर्व प्राइस से कम होने पर खारिज
सरकार और LIC की हिस्सेदारी का नया मूल्यांकन जारी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और LIC की हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री (स्ट्रैटेजिक सेल) की प्रोसेस को फिर से शुरू कर दिया है। एक महीने पहले ही सरकार ने दो बोलियों को खारिज कर दिया था क्योंकि वे रिजर्व प्राइस से बहुत कम थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैंक का नए सिरे से वैल्यूएशन किया जा रहा है। दरअसल, बैंक का 'फ्री फ्लोट' काफी कम है, जिसके चलते बाजार के जरिए इसके शेयरों की सही कीमत (प्राइस डिस्कवरी) तय करना मुश्किल हो रहा है।
इसके साथ ही, अधिकारी इस बात पर भी विचार करेंगे कि बिक्री की प्रक्रिया को केवल मौजूदा बोलीदाताओं तक ही सीमित रखा जाए या फिर इसे नए सिरे से शुरू किया जाए। हालांकि, सरकार का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया में तेजी लाना है ताकि वैश्विक निवेशकों का भरोसा कायम रहे और निवेश व अन्य योजनाओं के लिए जरूरी फंड भी जुटाया जा सके।
नई प्रोसेस के लिए होगी शॉर्ट डेडलाइन
माना जा रहा है कि अगर प्रोसेस केवल पुरानी बोली लगाने वालों तक ही सीमित रखी जाती है, तो कानूनी विवाद (लिटिगेशन) की संभावना पैदा हो सकती है। वहीं, सरकार इस बात को भी मान रही है कि जो बिक्री प्रक्रिया रद्द की गई, वह बहुत लंबी खिंच गई थी - इसमें पांच साल लग गए। इसलिए, अब इस प्रक्रिया को जिस भी रूप में दोबारा शुरू किया जाएगा, उसके लिए एक छोटी समय-सीमा तय करना बहुत जरूरी है।
इसके अलावा, बोलीदाताओं का फीडबैक भी काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कोटक महिंद्रा जैसे कुछ इच्छुक खरीदार बैंक पर ज्यादा पेंशन बोझ होने की वजह से इस रेस से बाहर हो गए थे।
सरकारी दखल का डर
इसी तरह, सरकार का शेयरधारक के रूप में बने रहना भी कुछ बैंकरों के लिए चिंता का विषय है। उनका तर्क है कि कई संस्थानों को यह डर है कि केंद्र सरकार बैंक के कामकाज को अपने हितों के हिसाब से चला सकती है, जिससे नए मालिक को पूरी तरह से स्वतंत्र होकर काम करने (फ्री हैंड) की छूट नहीं मिल पाएगी।
कहा जा रहा है कि अगर सरकार वास्तव में आईडीबीआई बैंक का प्राइवेटाइजेशन को लेकर गंभीर है, तो उसके पास बैंक का कोई भी शेयर नहीं बचना चाहिए।
हिस्सेदारी और विनिवेश लक्ष्य
IDBI बैंक में केंद्र सरकार की 45.5% हिस्सेदारी है, जबकि LIC 49.2% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया की पूरी रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष में 80,000 करोड़ रुपये के बड़े विनिवेश (डिसइन्वेस्टमेंट) और एसेट मोनेटाइजेशन (संपत्ति मुद्रीकरण) लक्ष्य को हासिल करने के लिए, सरकार केवल NHAI के InvITs पर निर्भर नहीं रह सकती।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान के बाद हाल के दिनों में IDBI बैंक के शेयरों में तेजी (रिकवरी) देखी गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। मंगलवार को BSE पर बैंक का शेयर 76.9 रुपये पर बंद हुआ।
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