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एक अच्छी कंपनी के शेयर में गिरावट और एक बर्बाद होती कंपनी के शेयर में गिरावट के बीच कैसे फर्क करें? 5 सवालों का जवाब जरूर लें

Published: Thu, 15 Oct 2026 02:36 PM (IST)

शेयर बाजार में गिरते शेयर को अवसर या खतरे की घंटी समझने के लिए कंपनी के कारोबार, मुनाफे, कर्ज और ...और पढ़ें

शेयर में गिरावट पर क्या करें? (AI फोटो)

शेयर में गिरावट पर क्या करें? (AI फोटो)

HighLights

  1. कंपनी के कारोबार और बिक्री की वृद्धि देखें

  2. मुनाफा, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति जांचें

  3. प्रबंधन, गवर्नेंस और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करें

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर का गिरना हमेशा बुरी खबर नहीं होता। कई बार मजबूत और अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार की कमजोरी, खराब सेंटीमेंट या किसी अस्थायी वजह से 20-30 फीसदी तक टूट जाते हैं। दूसरी तरफ कुछ कंपनियों के शेयर लगातार गिरते रहते हैं क्योंकि कंपनी का कारोबार ही कमजोर हो रहा होता है।
दोनों स्थितियों में चार्ट पर लाल रंग दिखाई देता है, लेकिन असली कहानी कंपनी के कारोबार, मुनाफे और कर्ज में छिपी होती है। ऐसे में निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि गिरावट अवसर है या खतरे की घंटी।

सबसे पहले कंपनी के कारोबार को देखें

शेयर की कीमत से पहले कंपनी का बिजनेस देखना चाहिए। अगर कंपनी की बिक्री लंबे समय में बढ़ रही है, ग्राहक और बाजार बढ़ रहे हैं और उसका मुख्य कारोबार मजबूत बना हुआ है, तो शेयर में आई गिरावट अस्थायी हो सकती है।
उदाहरण के लिए बाजार में डर के कारण किसी अच्छी कंपनी का शेयर गिर सकता है, जबकि कंपनी का कारोबार सामान्य तरीके से चलता रहे। इसके उलट अगर कंपनी की बिक्री लगातार घट रही है, बाजार हिस्सेदारी कम हो रही है या उसके उत्पादों की मांग कमजोर पड़ रही है, तो शेयर में गिरावट को सिर्फ बाजार की कमजोरी मानना गलती हो सकती है।

मुनाफा और कैश फ्लो असली तस्वीर दिखाते हैं

किसी कंपनी का मुनाफा बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ मुनाफे का आंकड़ा देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। यह देखना भी जरूरी है कि कंपनी वास्तव में कितना कैश कमा रही है। अगर मुनाफा बढ़ रहा है और ऑपरेटिंग कैश फ्लो भी मजबूत है, तो कंपनी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा सकती है।
वहीं लगातार मुनाफा दिखने के बावजूद कैश फ्लो कमजोर हो, ग्राहकों से पैसा अटकता रहे या कंपनी को कारोबार चलाने के लिए बार-बार बाहरी पैसा जुटाना पड़े, तो सावधानी जरूरी है।

कर्ज बढ़ रहा है या घट रहा है?

कर्ज किसी भी कंपनी के लिए हमेशा बुरा नहीं होता। विस्तार के लिए लिया गया नियंत्रित कर्ज कारोबार को बढ़ाने में मदद कर सकता है। समस्या तब शुरू होती है जब कंपनी का कर्ज तेजी से बढ़ता जाए और उसकी कमाई उस कर्ज का बोझ संभालने में कमजोर पड़ने लगे।
शेयर गिरने के दौरान निवेशक को कंपनी का Debt-to-Equity, ब्याज भुगतान और कर्ज की स्थिति देखनी चाहिए। मजबूत कंपनी आमतौर पर अपने कर्ज को संभालने की क्षमता रखती है, जबकि बर्बाद होती कंपनी में कर्ज और ब्याज का दबाव लगातार बढ़ सकता है।

गिरावट की वजह और मैनेजमेंट को समझें

एक ही तरह की गिरावट के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कभी पूरी इंडस्ट्री में मंदी आती है और अच्छी कंपनियों के शेयर भी गिरते हैं। लेकिन अगर किसी कंपनी में लगातार कॉरपोरेट गवर्नेंस की समस्या, प्रमोटर की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट, ऑडिटर की चिंता, नियामकीय कार्रवाई या मैनेजमेंट से जुड़े गंभीर सवाल सामने आ रहे हों, तो मामला ज्यादा गंभीर हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह देखकर शेयर नहीं खरीदना चाहिए कि वह अपने पुराने हाई से 50 फीसदी नीचे आ चुका है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या कंपनी अगले 5 साल में बेहतर हो सकती है?

गिरते शेयर को देखकर सबसे खतरनाक सोच होती है - “इतना गिर गया है, अब और कितना गिरेगा?” शेयर बाजार में कोई भी कीमत अपने आप सस्ती नहीं होती। असली सवाल यह है कि कंपनी का भविष्य कैसा है। अगर मजबूत बिजनेस, बढ़ती कमाई, नियंत्रित कर्ज और भरोसेमंद मैनेजमेंट मौजूद है, तो गिरावट लंबी अवधि के निवेशक के लिए अवसर बन सकती है।
लेकिन अगर कारोबार सिकुड़ रहा है, कर्ज बढ़ रहा है, कैश खत्म हो रहा है और भविष्य की ग्रोथ पर सवाल हैं, तो सस्ता दिखने वाला शेयर भी महंगा साबित हो सकता है। इसलिए शेयर की कीमत नहीं, कंपनी की हालत देखकर फैसला करना चाहिए।

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"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)