20 मिनट में कैसे हुई इतिहास की सबसे बड़ी डिजिटल चोरी, 60 हजार करोड़ रुपये गायब; पढ़िए इनसाइड स्टोरी
क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस में 20 मिनट में 60 हजार करोड़ रुपये की डिजिटल चोरी हुई, जिसमें हैकर्स ने सुरक्षा सिस्टम ...और पढ़ें

बाइनेंस में 20 मिनट में 60 हजार करोड़ की चोरी।
HighLights
बाइनेंस में 20 मिनट में 60 हजार करोड़ की चोरी।
हैकर्स ने 'साइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर' को बनाया निशाना।
उत्तर कोरियाई हैकर्स पर चोरी का संदेह, 95% रकम रिकवर।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में डिजिटल करेंसी का बोलबाला। लेकिन जब इसका बबल फूटता है तो एक झटके में खरबों रुपये डूब जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस के साथ। इसके सिस्टम में सेंधमारी की गई। ऐसी सेंधमारी की 6.3 अरब यानी करीब 60 हजार करोड़ रुपये गायब हो गए। हालांकि, Binance का कहना है कि 95% तक की रकम रिकवर हो गई है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हैकर्स ने कहां से सेंध मारी दी और इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय चोरी को कैसे अंजाम दे दिया।
आइए इसे डिकोड करने की कोशिश करते हैं और जानते हैं कि आखिर मात्र 20 मिनट में हैकर्स ने इतनी बड़ी रकम कैसे उड़ा दी। बताया जा रहा है कि इस चोरी के पीछे उत्तर कोरिया का हाथ है।
डिजिटल चोरों ने कैसे दिया चोरी को 60 हजार करोड़ की चोरी को अंजाम
इस चोरी को समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि Binance जैसे क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज काम कैसे करते हैं। यहां लोग बिटकॉइन, ईथर और दूसरी डिजिटल करेंसी खरीदते और बेचते हैं। ग्राहकों की क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। इन वॉलेट से किसी दूसरे पते पर पैसा भेजने के लिए एक खास सुरक्षा सिस्टम काम करता है।
इसे साइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कहा जाता है। आसान भाषा में इसे समझें तो यह सिस्टम किसी भी ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने का काम करता है। जब कोई व्यक्ति क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करता है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था जांचती है कि ट्रांजैक्शन को अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी TRM Labs के मुताबिक, हैकर्स ने इसी साइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। उन्होंने सीधे डिजिटल तिजोरी की चाबी चुराने के बजाय उस सिस्टम को ही अपने नियंत्रण में कर लिया, जो तिजोरी से पैसा निकालने का आदेश देता है।
इसके बाद हैकर्स ने प्रभावित डिजिटल वॉलेट से क्रिप्टोकरेंसी को अपने नियंत्रण वाले दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। ब्लॉकचेन रिकॉर्ड के मुताबिक, यह हमला गुरुवार को रात करीब 8 बजे के बाद शुरू हुआ और चोरी का बड़ा हिस्सा लगभग 20 मिनट में पूरा हो गया।
कैसे पता चला कि गायब हो गए 60 हजार करोड़?
शुरुआत में Binance को लगा कि किसी कर्मचारी का लैपटॉप हैक होने के कारण यह हमला हुआ होगा। हालांकि, बाद की जांच में कंपनी को सुरक्षा में सेंधमारी के कई अन्य संभावित रास्तों का भी पता चला।
Binance ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि शुरुआती जांच में लैपटॉप के साथ छेड़छाड़ की आशंका थी, लेकिन आगे की जांच में कई दूसरे सुरक्षा उल्लंघन भी सामने आए। कंपनी ने सुरक्षा कारणों से सभी तकनीकी जानकारियां सार्वजनिक नहीं कीं।
पहले की चोरी फिर सीना जोरी?
हैकर्स ने पहले बायनेंस प्लेटफॉर्म से 60 हजार करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी चोरी की। इसके बाद उसे अलग-अलग डिजिटल वॉलेट में भेजना शुरू कर दिया। इसका मकसद पैसों के लेनदेन का पता लगाना मुश्किल बनाना था।
हालांकि, इस मामले में कुछ क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों ने तेजी से कार्रवाई की। USDT और USDC जैसी स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों के पास अपने टोकन को फ्रीज करने की सुविधा होती है। यानी अगर किसी डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधि में हुआ है, तो संबंधित कंपनी उस टोकन को आगे ट्रांसफर होने से रोक सकती है।
Tether, Circle, Ripple और World Liberty Financial जैसी कंपनियों ने चोरी से जुड़ी कुछ संपत्तियों को फ्रीज किया। इससे हैकर्स के लिए पूरी रकम को दूसरी जगह इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया।
हालांकि, बिटकॉइन और ईथर जैसी क्रिप्टोकरेंसी को कोई केंद्रीय कंपनी सीधे फ्रीज नहीं कर सकती। इन्हें रोकने के लिए आमतौर पर ऐसे एक्सचेंज या ब्रोकर की मदद लेनी पड़ती है, जो संदिग्ध ट्रांजैक्शन को रोकने में सक्षम हों।
किम जोंग उन ने किया खेल?
इतनी बड़ी वित्तीय जोरी को अंजाम देने का काम किसने किया? यह सवाल सभी के मन में। हालांकि, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मीडिया में ऐसी खबरें चल रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि यह सब उत्तर कोरिया के हैकर्स ने किया है। उत्तर कोरिया यानी किम जोंग उन के देश ने। लेकिन जब तक इसकी आधिकारिक जांच नहीं हो जाती तब तक इस पर कुछ कहना सही नहीं होगा। अमेरिकी और अन्य ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनियों ने इस हमले के तरीके की तुलना उत्तर कोरिया से जुड़े हैकिंग समूहों के पुराने हमलों से की।
TRM Labs ने इस हमले को पिछले साल क्रिप्टो एक्सचेंज Bybit पर हुए हमले से मिलता-जुलता बताया। उस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने उत्तर कोरियाई हैकर्स को जिम्मेदार ठहराया था। TRM ने Binance मामले में भी उसी समूह की भूमिका होने का मजबूत अनुमान जताया।
ग्राहकों के नुकसान की भरपाई कैसे करेगा Binance?
इतनी बड़ी चोरी के बाद Binance ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि उनके फंड सुरक्षित रहेंगे। कंपनी के पास SAFU यानी Secure Asset Fund for Users नाम का एक विशेष सुरक्षा फंड है। इसका इस्तेमाल आपात स्थिति में ग्राहकों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाता है। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इस फंड में करीब 1 अरब डॉलर का बिटकॉइन रिजर्व रखा गया है।
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