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मिसाइल बनाने वाली मिनीरत्न IAF के लिए बनाएगी ग्लाइड बम, मिला 800 करोड़ का बड़ा ऑर्डर; शेयर पकड़ेंगे रफ्तार?

By IANSEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Wed, 23 Sep 2026 08:06 PM (IST)

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की सटीक हमला क्षमता बढ़ाने के लिए भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 810.79 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है।

रक्षा मंत्रालय ने BDL से 810.79 करोड़ का अनुबंध किया।

रक्षा मंत्रालय ने BDL से 810.79 करोड़ का अनुबंध किया।

HighLights

  1. रक्षा मंत्रालय ने BDL से 810.79 करोड़ का अनुबंध किया।

  2. भारतीय वायुसेना के लिए 160 स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन्स की खरीद।

  3. SAAW स्वदेशी रूप से विकसित, IAF की परिचालन क्षमता बढ़ाएगा।

आईएएनएस, नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना (IAF) की लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 810.79 करोड़ रुपए का एक महत्वपूर्ण अनुबंध किया है। इस समझौते के तहत वायुसेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन्स (एसएटी-एसएएडब्ल्यू) और संबंधित उपकरणों की खरीद की जाएगी।

इस बड़े ऑर्डर के मिलने के बाद कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। बुधवार 23 सितंबर को इसके शेयर BSE पर -0.76% टूटकर 1162 रुपये (Bharat Dynamics Share Price) के स्तर पर बंद हुए थे।

रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह खरीद 'बाय इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड' श्रेणी के अंतर्गत की जा रही है। अनुबंध पर हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुए।

सुखोई-30 जैसे विमानों में होता है इन बमों का इस्तेमाल

एसएटी-एसएएडब्ल्यू एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम है, जिसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दुश्मन के एयरफील्ड को काफी दूरी से निशाना बनाने में सक्षम है, जिससे लड़ाकू विमान दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली की सीमा में प्रवेश किए बिना हमला कर सकते हैं।

यह प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित की गई है। मंत्रालय के अनुसार, इसमें लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। साथ ही इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसे उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण किया गया है, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा मिलेगा।

कब तक की जाएगी आपूर्ती?

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एसएटी-एसएएडब्ल्यू की आपूर्ति 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी। इसके शामिल होने से भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसी भी संघर्ष की स्थिति में निर्बाध हवाई अभियान चलाने की क्षमता और मजबूत होगी।

ये स्मार्ट ग्लाइड बम विशेष रूप से रनवे, टैक्सी ट्रैक, मजबूत बंकर, विमान हैंगर, रडार प्रतिष्ठान, ईंधन भंडारण केंद्र और संचार सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनका उद्देश्य संघर्ष के शुरुआती चरण में दुश्मन के एयरबेस को नुकसान पहुंचाकर उसकी हवाई शक्ति को कमजोर करना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लाइड बम पारंपरिक सामरिक मिसाइलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत वाले होते हैं, क्योंकि इनमें आगे बढ़ने के लिए अलग रॉकेट या जेट इंजन नहीं होता।

यह लॉन्च करने वाले विमान की गति और एयरोडायनामिक ग्लाइड क्षमता का उपयोग कर लक्ष्य तक पहुंचते हैं। एसएटी-एसएएडब्ल्यू में उच्च-विस्फोटक, प्री-फ्रैगमेंटेड डीप-पेनेट्रेशन वारहेड लगाया गया है, जो एयरफील्ड अवसंरचना को अधिकतम नुकसान पहुंचाने में सक्षम है। इसके साथ सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली इसे उच्च स्तर की सटीकता प्रदान करती है।

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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)