UPI vs Credit-Debit Card: MDR टलने के बाद फेस्टिव शॉपिंग के लिए कौन-सा पेमेंट ऑप्शन है आपके लिए बेस्ट?
Best Payment Method: यूपीआई पर एमडीआर की अंतिम तिथि 1 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी गई है, जिससे व्यापारियों को ...और पढ़ें

UPI vs Credit-Debit Card: MDR टलने के बाद फेस्टिव शॉपिंग के लिए कौन-सा पेमेंट ऑप्शन है आपके लिए बेस्ट?
HighLights
यूपीआई एमडीआर की तारीख 1 जनवरी 2027 तक बढ़ी।
यूपीआई डेबिट/क्रेडिट कार्ड से अभी भी सस्ता विकल्प।
छोटे व्यापारियों और ₹2000 तक के लेनदेन पर शुल्क नहीं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर (MDR on UPI) की डेट को 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दिया गया है। जिससे व्यापारियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल आ रहा है कि इस फेस्टिव किस तरीके से शॉपिंग की पेमेंट (Best Payment Method) करें जिससे उनका पैसा भी बचे और साथ ही अलग से कोई चार्ज न देना पड़ा। तो आइए समझते हैं यूपीआई, कैश और क्रेडिट कार्ड में से आपके लिए शॉपिंग के लिए क्या बेस्ट है।
UPI vs Debit/Credit Card:
जैसे ही यूपीआई पर एमडीआर की खबर आई थी, तो लोगों ने इसका खूब विरोध किया। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अब उन्हें डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इस मुद्दे पर साफ किया है कि 0.4% MDR के साथ भी UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी सस्ता है। यानी कि अगर आप यूपीआई की जगह डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे तो उस पर लगने वाले चार्जेस MDR से ज्यादा होगा।
पेमेंट का तरीका अनुमानित मर्चेंट चार्ज
| पेमेंट का तरीका | अनुमानित मर्चेंट चार्ज |
| UPI | 0.4% (अधिकतम ₹300 तक) |
| डेबिट कार्ड | 0.90% तक |
| क्रेडिट कार्ड | औसतन करीब 2% |
NPCI के मुताबिक, ₹10000 के मर्चेंट पेमेंट पर क्रेडिट कार्ड के मुकाबले यूपीआई का एमडीआर चार्ज 80% तक सस्ता पड़ेगा। आप नीचे ₹10000 के कैलकुलेशन के लिए सारे चार्जेस के बारे में समझ सकते हैं-
- क्रेडिट कार्ड (2%): करीब ₹200 चार्ज
- डेबिट कार्ड (0.9%): करीब ₹90 चार्ज
- UPI (0.4%): सिर्फ ₹40 चार्ज
किस ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा चार्ज?
देखा जाए तो आम लोगों के रोजमर्रा के लेन-देन पर इसका कोई असर नहीं होगा। ₹2000 तक के सभी P2M ट्रांजैक्शन पूरी तरह से फ्री रहेंगे। वहीं अगर कोई छोटा व्यापारी है, जैसे ठेला चलाने वाला या चाय की टपड़ी चलाने वाला, उनपर भी ₹1 लाख की कमाई तक कोई चार्ज नहीं मिलेगा। यानी कि अगर किसी छोटे व्यापारी के यूपीआई पर एक महीने में सिर्फ ₹1 लाख या उससे कम पैसे यूपीआई के जरिए आते हैं, तो कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे उस यूपीआई पर ₹2000 से ज्यादा का पेमेंट भी क्यों न हुआ हो।
