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Repo rate Hiked का छोटे और मीडियम बिजनेस पर बढ़ेगा दवाब! बिजनेस लोन और MSME के रिपेमेंट पर क्या बदलाव?

Published: Wed, 07 Oct 2026 03:12 PM (IST)

भारतीय रिजर्व बैंक ने बढ़ती महंगाई के दबाव में रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% कर दिया है, जिससे ...और पढ़ें

रेपो रेट को 25 आधार अंक की बढ़ोतरी

रेपो रेट को 25 आधार अंक की बढ़ोतरी

HighLights

  1. RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया।

  2. बढ़ती महंगाई के कारण ब्याज दर वृद्धि चक्र की शुरुआत हुई।

  3. MSME सेक्टर पर लोन और EMI का दबाव बढ़ेगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| 7 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के इंट्रेस्ट रेट डिटर्मिनेशन पैनल ने फूड आयटम्स, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती महंगाई के दबाव को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर (rerp rate 25 bps hiked) 5.25 प्रतिशत से 5.50 प्रतिशत कर दिया, जिससे ब्याज दर वृद्धि चक्र (Interest rate hike cycle) की शुरुआत हुई।

इन्फ्लेशन दबावों को देखते हुए, 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट बढ़ाने का निर्णय लिया। MPC ने मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को देखते हुए ये फैसला लिया। बता दें कि इस फैसले से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है, इसलिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज में लगने वाले ब्याज की दरें भी बढ़ जाती हैं। यदि आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है, तो आपकी EMI बढ़ जाएगी। इस बढ़ी हुई महंगाई का असर देश के MSME सेक्टर पर भी देखने को मिलेगा। जिस पर FISME ने भी अपनी राय रखी है।

MSME सेक्टर में क्या प्रभाव पड़ेगा?

RBI के रेपो रेट बढ़ाए जाने पर FISME ने जागरण बिजनेस को बताया कि RBI को महंगाई रोकने और अर्थव्यवस्था की विकास दर बनाए रखने के बीच बहुत मुश्किल संतुलन बनाना पड़ता है। इसलिए महंगाई बढ़ने और भू-राजनीतिक दबावों के कारण 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट) ब्याज दर बढ़ाने का फैसला समझ में आता है, लेकिन इससे छोटे और मध्यम उद्यमियों पर भी प्रभाव देखने को मिलेगा। इससे उनके लोन ब्याज की दरें और भुगतान की अवधि में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

FISME के सेकेट्री जनरल अनिल भारद्वाज बताते हैं कि MSME (छोटे और मध्यम उद्यम) दोनों तरफ से दबाव में हैं। एक तरफ बिजली, माल ढुलाई और कच्चे माल के खर्च बढ़ गए हैं, दूसरी तरफ कामकाजी पूंजी (working capital) का खर्च भी बढ़ गया है।
अभी जो महंगाई है, उसका बड़ा हिस्सा सप्लाई की कमी की वजह से है। सिर्फ ब्याज दर बढ़ाने से इसे पूरी तरह नहीं रोका जा सकता।

इसलिए RBI को फर्क करना चाहिए कि वित्तीय सिस्टम में ज्यादा नकदी (liquidity) कहां है और उद्योगों को काम करने के लिए जरूरी नकदी कहां है। आगे ब्याज दर बढ़ाने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और आंकड़ों के आधार पर ही फैसला लेना चाहिए। वरना महंगाई से लड़ते-लड़ते निवेश, नई क्षमता बनाने और रोजगार पैदा करने का खर्च बढ़ जाएगा। जो भारत की लंबी अवधि की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है।

ये भी पढ़ें: Explainer: RBI का रेपो रेट क्या होता है? बढ़े तो आपकी EMI क्यों बढ़ती है, घटे तो कैसे मिलती है राहत?

ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर RBI का तर्क

रेपो रेट में बढ़ोतरी का उद्देश्य बढ़ती महंगाई को कंट्रोल साथ ही बढ़ती कीमतों के जोखिमों को कम करने के लिए की है। इस पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि-

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है और आगे की नीतिगत कार्रवाई केवल परिस्थितियों के बदलने और आउटलुक के आधार पर ब्याज दरों में वृद्धि या उन्हें स्थिर रखने तक ही सीमित हो सकती है।

क्या होता है रेपो रेट?

रेपो रेट (repo rate) वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों को शॉर्ट टर्म के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। बैंक जरूरत पड़ने पर RBI से पैसा लेते हैं और इसके बदले सरकारी सिक्योरिटीज को गिरवी रखते हैं। RBI के मुताबिक, रेपो रेट उसकी प्रमुख पॉलिसी रेट है, जिसका इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में पैसे और क्रेडिट की स्थिति को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। इसके बढ़ने पर इंट्रेस्ट रेट और रिपेमेंट्स की अवधि बढ़ जाती है।