MCGS स्कीम से मिलेगा कोलेट्रल फ्री ₹100 करोड़, बस DPR में बैंक को दिखाएं ये जरूरी बात और फटाफट लोन पास!
MCGS-MSME योजना के तहत उद्यमी ₹100 करोड़ तक का कोलैटरल-फ्री लोन प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का लाभ उठाने ...और पढ़ें

₹100 करोड़ का लोन देने वाली सरकारी स्कीम (AI Image)
HighLights
MCGS-MSME योजना से ₹100 करोड़ तक का कोलैटरल-फ्री लोन।
मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर MSMEs को मशीनरी खरीद हेतु वित्तीय सहायता।
उद्यम रजिस्ट्रेशन, DPR में मशीनरी खर्च 75% होना अनिवार्य।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए सीरियस हैं लेकिन फंड की कमी है तो आप सरकारी योजनाओं की मदद से अपने आइडिया पर काम कर सकते हैं। अगर आप मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर में बिजनेस चला रहे हैं और मशीनरी या उपकरण खरीदने के लिए बड़े लोन की जरूरत है, तो सरकार की Mutual Credit Guarantee Scheme for MSMEs (MCGS-MSME) आपके लिए उपयोगी हो सकती है। इस स्कीम के तहत पात्र उद्यमियों को ₹100 करोड़ तक के टर्म लोन पर सरकारी गारंटी कवरेज मिलता है, जिससे बैंकों के लिए लोन देना आसान हो जाता है।
किस काम के लिए मिलता है लोन?
MCGS-MSME का मुख्य उद्देश्य उद्यमियों को प्लांट, मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। यह योजना नई और मौजूदा दोनों MSME यूनिट्स पर लागू हो सकती है, शर्त ये है कि आपके प्रोजेक्ट में मशीनरी और उपकरण का हिस्सा प्रमुख हो। वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 में योजना में बदलाव कर मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ सर्विस सेक्टर और MSME निर्यातकों को भी इसके दायरे में शामिल किया।
स्कीम का लाभ लेने की जरूरी पात्रता
- अप्लाई करने से पहले उद्यम (Udyam) रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
- आवेदक MSME किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान का NPA नहीं होना चाहिए।
- प्रोजेक्ट लागत का कम से कम 75% हिस्सा मशीनरी या उपकरणों पर खर्च होना चाहिए।
- मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और एक्सपोर्ट से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे MSME पात्र हैं।
अप्लाई करने का तरीका
आवेदन करने के लिए उद्यमी को सीधे किसी बैंक या वित्तीय संस्था से संपर्क करना होता है। बैंक प्रोजेक्ट की वर्कबिलिटी, फाइनेंशियल कंडीशन और रिपेमेंट क्षमता का की जांच करता है। लोन मंजूर होने के बाद बैंक खुद NCGTC के माध्यम से MCGS-MSME गारंटी कवर के लिए आवेदन करता है।
जरूरी डाक्यूमेंट्स
- उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट
- आधार और पैन कार्ड
- GST रजिस्ट्रेशन और रिटर्न
- कंपनी/फर्म के फॉर्मेशन डाक्यूमेंट्स
- डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR)
- मशीनरी और पार्ट्स के कोटेशन
- पिछले सालों का फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स
- इनकम टैक्स रिटर्न
- बैंक स्टेटमेंट
- मौजूदा लोन की जानकारी
- प्रमोटर के इन्वेस्टमेंट का प्रूफ
- आवश्यक लाइसेंस और परमीशन
रिपेमेंट्स के लिए कितना समय?
अगर आप फैक्ट्री लगाने के लिए या कोई भी पार्ट्स एंड मशीनरी से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए ₹50 करोड़ तक का लोन ले रहे हैं तो अधिकतम 8 साल की रिपेमेंट अवधि और मूलधन पर 2 साल का मोरेटोरियम दिया जा सकता है। ₹50 करोड़ से अधिक के लोन मामलों में बैंक लंबे रिपेमेंट्स अवधि पर विचार कर सकते हैं।
