बैट से लेकर हॉकी और फुटबाल जैसी स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री में होगा भारत का दबदबा! 8 सालों के लिए बना ₹1856 करोड़ का मास्टर प्लान
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेल सामग्री उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को मंजूरी दी ...और पढ़ें

खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम लांन्च
HighLights
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स स्कीम को मंजूरी दी।
₹1,856.67 करोड़ की योजना से उत्पादन, निवेश बढ़ेगा।
स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित होंगे, निर्यात को बढ़ावा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेल सामग्री बनाने वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' को मंजूरी दी है। साल 2026 से 2033-34 तक चलने वाली इस योजना पर कुल ₹1,856.67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य देश में स्पोर्ट्स गुड्स के प्रोडक्शन, इन्वेस्टमेंट, नई तकनीक, अनुसंधान और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है। इससे भारत को ग्लोबल खेल सामग्री मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित इस योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खेल सामग्री के इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।
खेल सामग्री बनाने के लिए विकसित होंगे विशेष जोन
योजना के तहत 'स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग जोन' विकसित किए जाएंगे। इन जोन में खेल सामग्री बनाने वाली कंपनियों, उनके सप्लायर्स, टेस्ट सेंटर, डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करने वाली सुविधाओं को एक ही जगह पर लाने की योजना है। इससे प्रोडक्शन की लागत और समय कम करने के साथ कंपनियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इन जोन को भव्य योजना और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के इंडस्ट्रियल पार्कों के मौजूदा बुनियादी ढांचे से जोड़कर विकसित किया जाएगा। इससे खेल सामग्री बनाने के लिए एक मजबूत औद्योगिक व्यवस्था तैयार करने में मदद मिलेगी।
इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए ₹1,130 करोड़ का प्रावधान
योजना में नए निवेश को आकर्षित करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए कुल ₹1,130 करोड़ के निवेश वाले उपाय किए जाएंगे। 'एंकर इन्वेस्टमेंट सपोर्ट' के तहत बड़ी भारतीय और विदेशी कंपनियों, ब्रांडों और रिटेल चेन को इन जोन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं, 'टर्नओवर लिंक्ड सपोर्ट' के जरिए कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने और अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे घरेलू कंपनियों के साथ उनके सप्लायर्स और सहायक इंडस्ट्री को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
MSME और पुराने क्लस्टरों को मिलेगी मदद
स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की भूमिका को देखते हुए मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत साझा सुविधाएं और बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहायता दी जाएगी। इससे छोटे उद्यमों को उत्पादन बेहतर बनाने और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
क्वालिटी सर्टिफिकेशन के लिए ₹105 करोड़
भारतीय खेल सामग्री को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ₹105 करोड़ का बजट रखा गया है। इसके तहत मैन्युफैक्चरर को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से क्वालिटी और प्रदर्शन संबंधी सर्टिफिकेशन लेने और उसका नवीनीकरण कराने में सहायता मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
एकेडमी और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना के तहत खेल उपकरणों, नई सामग्रियों, सुरक्षा उपकरणों और मार्डन मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रमुख एकेडमी और रिसर्च इंस्टीट्यूट में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने में सहायता दी जाएगी।
ये भी पढ़ें: भारत ने जमकर खरीदी अरहर! दीवाली से पहले ₹300 तक घटे दाम, सूखे की चिंता के बीच आगे कैसी रहेगी सप्लाई?
इसके अलावा, ब्रांडिंग, प्रचार और बाजार विकास के जरिए भारतीय खेल सामग्री को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन का लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की पहचान और विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
