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भारत बनेगा गारमेंट इंडस्ट्री का किंग! यूरोप, जर्मनी सहित दुनिया के कई देशों से एडवांस ऑर्डर शुरू; ₹40000 करोड़ की स्कीम लाने की तैयारी में सरकार

Published: Sun, 25 Oct 2026 12:55 PM (IST)

केंद्र सरकार अगले 5 सालों में पारंपरिक कपड़ा और परिधान क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए ₹40,000 करोड़ की TEEM योजना ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ₹40,000 करोड़ की TEEM योजना से कपड़ा उद्योग का आधुनिकीकरण।

  2. बुनियादी ढांचे, तकनीक सुधार से निर्यात और रोजगार में वृद्धि।

  3. EU FTA से भारतीय कपड़ा निर्यात को मिलेगा बड़ा लाभ।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत का कपड़ा उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। केंद्र सरकार अगले 5 सालों में भारत के पारंपरिक टेक्सटाइल और गारमेंट क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए ₹40,000 करोड़ की योजना पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे और तकनीक को बेहतर बनाकर इन क्लस्टरों की कॉस्ट कॉम्पटीशन बढ़ाना और ऑपरेशन एफिशिएंसी में सुधार करना है।

प्रस्तावित टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट (TEEM) योजना भारत में टेक्सटाइल और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए एक्सपोर्ट बढ़ाने और हाल के वर्षों में भारत द्वारा ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के साथ किए गए प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने की कोशिश की जाएगी।

कपड़ा मंत्रालय के इस प्रस्ताव की जांच व्यय सचिव के अधीन काम करने वाली अंतर-मंत्रालयी संस्था व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) कर चुकी है। यह समिति बड़े खर्च से जुड़े प्रस्तावों का रिव्यू करती है। मामले के लोगों ने मीडिया को बताया कि इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जा सकता है।

देश की इकॉनमी और एम्प्लायमेंट के लिए जरूरी सेक्टर

भारत की टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री 179 अरब डॉलर की है। ये कृषि के बाद देश में रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में इसकी हिस्सेदारी 11% है, जबकि देश के कुल वस्तु निर्यात में इसका योगदान 8% से अधिक है। इस वजह से यह क्षेत्र आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण सोर्स है।

वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित TEEM योजना को मांग आधारित और क्लस्टर केंद्रित पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका मुख्य फोकस ट्रेडिशनल बुनाई, कपड़ा प्रोसेसिंग और गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े क्लस्टरों पर होगा।

सरकार ने अभी तक उन क्लस्टरों की फाइनल लिस्ट तय नहीं की है, जिन्हें इस योजना के तहत मॉडर्न बनाया जाएगा। हालांकि, संभावित क्लस्टरों में तिरुपुर, कोयंबटूर, सूरत, अहमदाबाद, वाराणसी, भिवंडी, लुधियाना और कांचीपुरम शामिल हो सकते हैं। इनमें बड़े स्तर पर स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, प्राकृतिक रेशों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम और टेक्सटाइल पार्कों का आधुनिकीकरण शामिल है।

मशीनों और तकनीक को मॉडर्न बनाने के लिए मिलेगी पूंजी सहायता

प्रस्तावित TEEM योजना के तहत पुराने समय से चल रहे टेक्सटाइल क्लस्टरों को मशीनरी खरीदने, तकनीक का अपग्रेडेशन करने और टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सेंटर स्थापित करने के लिए कैपिटल यानि पूंजी की सहायता मिलने की संभावना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि योजना को सही तरीके से तैयार किया गया और जरूरत के हिसाब से सहायता दी गई, तो इससे प्रोडक्शन में बहुत बड़ा सुधार हो सकता है और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिल सकता है।

तिरुपुर के निटवेयर निर्यातक और तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजा शनमुगम ने एक मीडिया कंपनी से बातचीत करते हुए कहा कि ऐसी किसी भी पहल में श्रमिकों के कल्याण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत क्लस्टरों में आवास, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे खासकर दूसरे राज्यों से काम करने के लिए आने वाले प्रवासी श्रमिकों को लाभ मिलेगा। योजना के तहत प्रदूषण नियंत्रण के लिए साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (Common Effluent Treatment Plants) भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा, क्लस्टरों में साझा अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र स्थापित करने के लिए भी धन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे डिजाइन और अन्य इनोवेशन को विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, भारतीय कंपनियां विकसित अर्थव्यवस्थाओं के खरीदारों की जरूरतों के अनुसार अपने उत्पादों में बदलाव कर सकेंगी।

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट का एक्सपोर्टस करने वालों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। राजा शनमुगम ने बताया कि यूरोपीय संघ के खरीदारों ने तिरुपुर की कंपनियों को ऐसे गारमेंट्स के एडवांस ऑर्डर देने शुरू कर दिए हैं, जिनकी सप्लाई भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद की जानी है। यह समझौता 2027 की शुरुआत में लागू होने की संभावना है।

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उन्होंने कहा कि यूरोप के कुछ खरीदार तुर्किये, पुर्तगाल और ग्रीस जैसे देशों में मौजूद अपने मौजूदा सप्लायर्स की जगह भारतीय कंपनियों को शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। शनमुगम के मुताबिक, जर्मनी समेत कई देशों की टीमें तिरुपुर का दौरा कर चुकी हैं। इन दौरों का उद्देश्य कारोबार से जुड़े समझौतों को अंतिम रूप देना और भारतीय सप्लायर्स को यूरोपीय खरीदारों की खास जरूरतों तथा डिजाइन संबंधी अपेक्षाओं से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा, "तिरुपुर की यूनिट्स के यूरोपीय खरीदारों के साथ पहले से अच्छे कारोबारी संबंध हैं। लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी के मामले में नुकसान के कारण कुछ ऑर्डर भारत के हाथ से निकल रहे थे। अब स्थिति बदलने वाली है।" उन्हें उम्मीद है कि मुक्त व्यापार समझौता लागू होने का समय नजदीक आने पर भारतीय कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर में तेजी आ सकती है। उनका मानना है कि यूरोप और ब्रिटेन के बाजार में भारतीय कंपनियों को मिलेगा फायदा