भारत ने जमकर खरीदी अरहर! दीवली से पहले ₹300 तक घटे दाम, सूखे की चिंता के बीच आगे कैसी रहेगी सप्लाई?
जनवरी-अगस्त में भारत का तुअर दाल आयात 44% बढ़कर 6.25 लाख टन हुआ, जिससे हाल ही में कीमतों में गिरावट ...और पढ़ें
-1793168759299_m.webp)
अरहर की खरीद में 44 फीसदी की बढ़ोतरी
HighLights
तुअर दाल आयात 44% बढ़कर 6.25 लाख टन हुआ।
म्यांमार से सस्ते आयात के कारण कीमतें गिरीं।
सूखे से खरीफ फसल प्रभावित, भविष्य में आपूर्ति चिंता।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत अरहर का बड़ा निर्यातक देश रहा है। इस साल जनवरी से अगस्त के दौरान तुअर दाल का आयात 44% बढ़कर 6.25 लाख टन हो गया। पिछले साल इसी अवधि में 4.34 लाख टन तुअर का आयात किया गया था। महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की स्थिति के कारण खरीफ 2026 की फसल प्रभावित होने की आशंका है। इसी बीच आयात में बढ़ोतरी हुई है।
म्यांमार और अफ्रीकी देशों से आयात
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-अगस्त 2026 के दौरान भारत ने म्यांमार से 1.53 लाख टन से अधिक तुअर का आयात किया। वहीं, मोजाम्बिक से 2.29 लाख टन से अधिक, तंजानिया से 1.10 लाख टन और सूडान से 71,808 टन तुअर का आयात हुआ। अन्य देशों से कुल 61,138 टन तुअर खरीदी गई।
दो सप्ताह से कीमतों में गिरावट
IPGA के साप्ताहिक बाजार अपडेट के अनुसार, 24 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के प्रमुख बाजारों में देसी और इंपोर्टेड अरहर की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। म्यांमार से कम कीमत पर आयात की पेशकश, रुपये में मजबूती, कमजोर मांग और बाजार में नकदी की कमी के कारण खरीदारी सीमित रही।
गुलबर्गा और अकोला जैसे बाजारों में अरहर दाल की कीमतें साप्ताहिक आधार पर करीब ₹200 से ₹300 प्रति क्विंटल तक गिर गईं। वहीं, मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतों में उसके मूल देश के आधार पर ₹50 से ₹150 प्रति क्विंटल की गिरावट आई।
फसल पर सूखे का खतरा, बारिश का इंतजार
IPGA के अनुसार, त्योहारी सीजन की ज्यादातर मांग पूरी हो चुकी है। दाल की कीमतों में नरमी के कारण मिलें कच्ची अरहर की खरीद के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं हैं। इसलिए खरीदारी जरूरत के हिसाब से हो रही है।
हालांकि, खरीफ फसल के कम उत्पादन की आशंका और महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सूखे की बिगड़ती स्थिति के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव सीमित है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अफ्रीकी देशों से उम्मीद से कम इंपोर्ट होने के कारण भी सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। अगले सीजन में कीमतें बढ़ने की उम्मीद के चलते स्टॉकिस्ट और व्यापारी भी अपना माल तेजी से बेचने से बच रहे हैं।
ये भी पढ़ें: खाड़ी देशों में फिर बढ़ेगी भारतीय बासमती की मांग! मंडियों में भी बढ़े दाम; किसानों और एक्सपोर्टर्स की चांदी
कर्नाटक के सूखाग्रस्त कालबुर्गी क्षेत्र में किसान खड़ी तुअर की फसल को बचाने के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। एक किसान के मुताबिक, खड़ी फसल को दोबारा संभलने के लिए कम से कम एक-दो बार बारिश होना जरूरी है।
तुअर की बुवाई का रकबा बढ़ा
कृषि आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 में अरहर की बुवाई का रकबा 1.3% बढ़कर 47.25 लाख हेक्टेयर हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 45.95 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, रकबे में बढ़ोतरी के बावजूद प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे के कारण फसल की पैदावार पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
