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MSP से 14 फीसदी कम कीमत पर बिक रहीं दालें, सरकार के हस्तक्षेप का भी नहीं दिखा असर

Published: Tue, 05 May 2026 03:40 PM (IST)Updated: Tue, 05 May 2026 03:43 PM (IST)

दालों की पैदावार बढ़ने और सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद, अधिकांश दालों की कीमतें MSP से 4-14% नीचे बिक रही हैं, जिसका मुख्य कारण अधिक आवक और कम मांग है।

मंडियों में MSP से काफी नीचे बिक रही दालें

मंडियों में MSP से काफी नीचे बिक रही दालें

HighLights

  1. दालों की कीमतें MSP से 4-14% नीचे बिक रही हैं।

  2. सरकारी बफर स्टॉक 26.9 लाख टन तक पहुंचा है।

  3. मॉनसून प्रदर्शन पर निर्भर करेगा भविष्य का भाव।

नई दिल्ली| दालों की खेती को बढ़ावा देने से पैदावार में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते बफर स्टॉक भी मजबूत हुआ है। हालांकि सरकार के हस्तक्षेप के बाद भी ज्यादातर दालों की कीमत MSP से नीचे बनी हुई है। रिपोर्ट्स की मानें तो दालों की अधिक आवक और मांग में कमी के कारण कीमतें कम हैं। आंकड़े बताते हैं कि तुअर, चना, उड़द, मूसर और मूंग जैसी दालों का बाजार रेट MSP से 4 से 14 फीसदी तक नीचे है।

MSP से काफी नीचे आया दालों का भाव

दाल उत्पादन का लगभग 50 फीसदी हिस्सा चने का होता है, और वर्तमान में इसकी मंडी में कीमत 5200 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि इस सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय है। वहीं तुअर की कीमतें मानक कीमत से लगभग 6 फीसदी नीचे हैं। मसूर 6200 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द की कीमतें 7500 रुपये प्रति क्विंटल हैं तय हैं लेकिन ये दालें भी MSP से क्रमशः 11 प्रतिशत और 4 प्रतिशत कम में बिक रही हैं।

सरकारी एजेंसियों के मौजूदा बफर स्टॉक

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, बाजार में दालों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दालों का एक बड़ा बफर स्टॉक बनाया है। फिलहाल मौजूदा समय में सरकारी एजेंसियों - NAFED और NCCF के पास 26.9 लाख टन दालें मौजूद हैं। इसमें 11 लाख टन चना, 7.5 लाख टन तुअर, 3.6 लाख टन मूसर, 4 लाख टन मूंग और 33,402 टन उड़द शामिल है।

सरकार ने राज्यों से की थी ये मांग

राज्यों को भेजे गए एक पत्र में, उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा, वे अपनी जनता के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं जैसे पीएम-पोषण, आईसीडीएस और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए दालें खुले बाजार से ना खरीदें बल्कि केंद्रीय भंडार से लें। सरकार के अनुसार, इससे राज्यों को लंबी निविदा प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा और केंद्रीय स्टॉक का सही उपयोग हो सकेगा।

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मॉनसून से तय होगा दालों का भाव

दालों के व्यापार की अग्रणी कंपनी मयूर ग्लोबल कॉर्पोरेशन के प्रमुख हर्षा राय ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया कि कीमतों में कमी थोड़े समय के लिए है। इसमें लगातार बदलाव देखे जाते हैं। जब आवक कम हो जाएगी तो कीमतों में सुधार होगा। इसके अलावा जानकारों ने बताया कि गर्मी के महीनों में दालों की मांग सुस्त रहती है, और भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव मानसून के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।