देश में 13.39 लाख टन तक पहुंचा खाद्य तेलों का आयात, फिर से महंगा होगा आपकी थाली तक पहुंचने वाला तेल?
मई महीने में देश का खाद्य तेल आयात 13.39 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में ...और पढ़ें
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खाने के तेल का आयात पिछले साल के मुकाबले 6.7 प्रतिशत बढ़ा
HighLights
मई में खाद्य तेल आयात 13.39 लाख टन पहुंचा, 6.7% वृद्धि।
सोयाबीन तेल सस्ता होने से आयात में हुई बढ़ोतरी।
घरेलू किसानों पर दबाव, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ने की आशंका।
नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते महीने देशवासियों से खाने के तेल को कम करने की अपील की थी। अब मई महीने में खाने के तेल की आयात का आंकड़ा भी सामने आ गया है। । उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, देश का खाद्य तेल (Edible Oil) का आयात मई में 13.39 लाख टन तक पहुंच गया। ये आंकड़ा पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 6.7 प्रतिशत बढ़ा है।
सोयाबीन तेल सस्ता होने से बढ़ा आयात
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, नवंबर 2025 से मई 2026 तक भारत का खाद्य तेल आयात बढ़कर 92.17 लाख टन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि के 81.31 लाख टन से 13.35% ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मई 2026 में अकेले 13.29 लाख टन खाद्य तेल आयात हुआ, जो अप्रैल के 13.07 लाख टन से 2.4% अधिक है। इसमें सोयाबीन तेल 4.93 लाख टन, पाम तेल 5.49 लाख टन और सूरजमुखी तेल 2.95 लाख टन शामिल था। आयात बढ़ने का मुख्य कारण सोयाबीन तेल का सस्ता होना है, जिससे यह पाम तेल की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मई 2026 में सभी प्रमुख खाद्य तेलों (पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी) के आयात मूल्य पिछले साल से 19-23% तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा पिछले एक साल में रुपये के 12% से ज्यादा कमजोर होने से आयात और महंगा हो गया है।
कच्चे सोयाबीन तेल की टैरिफ वैल्यू में कमी
सरकार ने 1 जून 2026 से कच्चे पाम तेल (CPO) की टैरिफ वैल्यू बढ़ाकर 1,218 डॉलर प्रति टन और RBD पाम तेल की वैल्यू 1,222 डॉलर प्रति टन कर दी है, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल की टैरिफ वैल्यू में थोड़ी कमी की गई है। SEA के अनुसार, मई 2026 में RBD पामोलिन का कोई आयात ही दर्ज नहीं किया गया। नवंबर 2025 से मई 2026 तक कुल RBD पामोलिन का आयात पिछले साल के 8,26,800 टन से बहुत तेजी से घटकर सिर्फ 47,270 टन रह गया है।
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किसानों-उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विदेशों से खाद्य तेल आयात होने से घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी, लेकिन इससे तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों पर दबाव भी बढ़ सकता है। इंपोर्टेड तेल की अधिकता के कारण घरेलू बाजारों में कीमतें बढ़ने का भी अनुमान है, हालांकि आने वाले महीनों में अंतर्राष्ट्रीय कीमतें, रुपये की स्थिति और घरेलू तिलहन का उत्पादन तय करेंगे कि उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या नहीं।
