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E20 Petrol: मौसम ने बदला सरकार का प्लान, चीनी की कमी रोकने के लिए चावल से बनेगा पेट्रोल का विकल्प!

Published: Mon, 29 Jun 2026 04:52 PM (IST)

EL Nino affcet on Ethenol: भारत सरकार का E20 इथेनॉल लक्ष्य कमजोर मानसून के कारण खतरे में है, जिससे गन्ना ...और पढ़ें

E20 लक्ष्य बचाने के लिए अब चावल से बनेगा ज्यादा इथेनॉल!

E20 लक्ष्य बचाने के लिए अब चावल से बनेगा ज्यादा इथेनॉल!

HighLights

  1. कमजोर मानसून से E20 इथेनॉल लक्ष्य पर खतरा।

  2. गन्ना और मक्का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका।

  3. चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए नया विकल्प बन रहा है।

नई दिल्ली: भारत सरकार पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20) के लक्ष्य को तय समय पर हासिल करना चाहती है, लेकिन अब मौसम इसमें बड़ी बाधा बनता दिख रहा है। एल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका है, जिससे गन्ना और मक्का जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। ये दोनों फसलें इथेनॉल उत्पादन का प्रमुख आधार है, इसलिए इनके उत्पादन में गिरावट पूरे ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर असर डाल सकती है। ऐसे में सरकार अब वैकल्पिक स्त्रोतों की ओर ध्यान दे रही है, जिसमें चावल आधारित इथेनॉल प्रमुख बनकर उभर रहा है।

फसलों पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

एल नीनो का सीधा असर मानसून पर पड़ता है और भारत जैसे कृषि आधारित देश में इसका मतलब होता है खेती पर दबाव बढ़ना। गन्ना एक ऐसी फसल है जिसे भरपूर पानी की जरूरत होती है, वहीं मक्का की पैदावार भी बारिश पर काफी निर्भर करती है। अगर बारिश सामान्य से कम होती है तो किसान इन फसलों की बुवाई कम कर सकते हैं या उत्पादन घट सकता है। इसका नतीजा यह होगा की इथेनॉल बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल कम पड़ जाएगा और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा।

E20 लक्ष्य क्यों है अहम?

E20 लक्ष्य केवल एक ईंधन नीति नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा और आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। साथ ही, इथेनॉल मिश्रित ईंधन प्रदूषण को भी कम करता है, जो पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, इथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसलिए इस लक्ष्य को समय पर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता बना हुआ है।

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चावल कैसे बन रहा है गेम चेंजर?

गन्ना और मक्का की संभावित कमी को देखते हुए सरकार अब चावल को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही है। भारत के पास अक्सर चावल का अधिशेष भंडार रहता है, जिसे इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है। चावल की उपलब्धता अपेक्षाकृत स्थिर होती है और यह मौसम के उतार-चढ़ाव से गन्ने जितना प्रभावित नहीं होता। यही वजह है कि आने वाले समय में इथेनॉल उत्पादन में चावल की हिस्सेदारी बढ़ सकती है, जिससे E20 लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिल सके।

क्या हैं इससे जुड़ी चिंताएं?

हालांकि चावल आधारित इथेनॉल एक व्यावहारिक समाधान नजर आता है, लेकिन इसके साथ कुछ चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। सबसे बड़ी चिंता खाद्य सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि जिस चावल का इस्तेमाल खाने के लिए होता है, वही अब ईंधन बनाने में भी इस्तेमाल होगा। इसके अलावा, गन्ने की कमी से चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे घरेलू और वैश्विक बाजार में शुगर सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इन सभी पहलुओं को संतुलित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।