विदेश से आने वाले खाने के तेल का इंपोर्ट सितंबर में 7% घटा! रिफाइंड पामोलीन का क्या है चक्कर?
भारत का खाद्य तेल आयात सितंबर 2026 में 7% घटकर 15.44 लाख टन रहा, जिसका मुख्य कारण कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात में कमी थी।

सितंबर में खाद्य तेलों के आयात में गिरावट
HighLights
सितंबर 2026 में खाद्य तेल आयात 7% घटा।
कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात में भारी गिरावट।
रिफाइंड तेल आयात आधा, कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत का खाद्य तेल इंपोर्ट सितंबर 2026 में सालाना आधार पर 7 फीसदी घटकर 15.44 लाख टन रह गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे सूरजमुखी तेल के आयात में भारी गिरावट रही। उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 में देश ने 16.58 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया था।
SEA की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में कच्चे सूरजमुखी तेल के इंपोर्ट में गिरावट आई है। आयात घटकर करीब 1.05 लाख टन रह गया, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह 2.72 लाख टन था। हालांकि, पूरे तेल वर्ष 2025-26 के शुरुआती 11 महीनों यानी नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान खाने के तेल का कुल आयात 3 फीसदी बढ़कर 151.64 लाख टन हो गया। पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 146.83 लाख टन था।
रिफाइंड तेल का इंपोर्ट आधे से भी कम
SEA के मुताबिक, नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के दौरान खाद्य और गैर-खाद्य तेल सहित कुल वनस्पति तेल का इंपोर्ट बढ़कर 154.64 लाख टन हो गया। पिछले साल की समान अवधि में यह 150.31 लाख टन था। इस दौरान रिफाइंड तेल का इंपोर्ट तेजी से घटा। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच भारत ने 7,40,441 टन रिफाइंड तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 16,89,228 टन थी।
इस गिरावट के चलते कुल खाद्य तेल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी 12% से घटकर 5% रह गई। SEA के अनुसार, इसकी प्रमुख वजह इंडोनेशिया और मलेशिया से रिफाइंड पामोलीन का इंपोर्ट लगभग नाममात्र का रहना है।
कच्चे खाद्य तेल पर बढ़ी निर्भरता
मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि कच्चे खाद्य तेल पर निर्भरता बढ़ी है और इसका आयात बढ़कर 1,44,23,939 टन हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 1,29,93,972 टन था। कुल खाद्य तेल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी भी 88% से बढ़कर 95% हो गई। SEA ने कहा कि कच्चे खाद्य तेल के आयात में बढ़ोतरी मुख्य रूप से कच्चे पाम तेल की अधिक खरीद के कारण हुई। इसने रिफाइंड पामोलीन के आयात की जगह ली। इसके अलावा, नेपाल से भारत में रिफाइंड सोयाबीन तेल का निर्यात भी काफी बढ़ा है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के खाद्य तेल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि रिफाइंड तेल का सीधा इंपोर्ट घट रहा है। इससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग की भूमिका और आयात के स्रोतों में आए बदलाव पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
