सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

8% से अधिक बढ़े चावल के दाम, सरकार ने ‘भारत चावल’ की बिक्री का लक्ष्य किया दोगुना! इन राज्यों में लगेगी स्टॉक लिमिट

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:02 AM (IST)

केंद्र सरकार ने बढ़ती चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत चावल बिक्री ...और पढ़ें

भारत राइस की बिक्री का लक्ष्य दोगुना

भारत राइस की बिक्री का लक्ष्य दोगुना

HighLights

  1. चावल बिक्री लक्ष्य 25 से बढ़ाकर 50 लाख टन किया गया।

  2. सहकारी संस्थाओं को 'भारत चावल' की पहुंच बढ़ाने के निर्देश।

  3. व्यापारियों को स्टॉक घोषित करने, राज्यों को लिमिट लगाने की अनुमति।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक)-2026-27 के तहत ई-नीलामी के जरिए बेचे जाने वाले चावल का लक्ष्य दोगुना कर 50 लाख टन कर दिया है। शुक्रवार को सरकार ने यह फैसला तब लिया, जब चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर तक 7 महीनों के दौरान 25 लाख टन चावल की बिक्री हो चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में 11 लाख टन चावल की बिक्री हुई थी।

सरकार ने सहकारी संस्थाओं NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार को देशभर में अपनी पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर दक्षिणी राज्यों में इन संस्थाओं का नेटवर्क विस्तार करने को कहा गया है।

सप्लाई बढ़ाने पर जोर

खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इन एजेंसियों को ‘भारत चावल’ की बड़े पैमाने पर सप्लाई और आम ग्राहकों तक आसान पहुंच बनाने के लिए वितरण के सभी संभावित माध्यमों को तलाशने का निर्देश दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इस पहल से बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ने, उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर चावल उपलब्ध कराने और खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मंत्रालय के अनुसार, नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को ‘भारत चावल’ कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त आवंटन दिया जा रहा है। हालांकि, पिछले साल सरकार की ओर से मात्रा आवंटित किए जाने के बावजूद सहकारी संस्थाओं ने इस योजना में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई थी।

सितंबर में चावल की खुदरा महंगाई 8.25 फीसदी पर पहुंची

रिपोर्ट के मुताबिक चावल की खुदरा महंगाई दर सितंबर में सालाना आधार पर बढ़कर 8.25 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.89 फीसदी थी। चावल की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48.23 प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले की तुलना में 12 फीसदी अधिक है।

कारोबारियों और मिलों के लिए निर्देश

इस साल चावल की महंगाई के पीछे खरीफ सीजन में धान के रकबे में कमी और कई राज्यों में कम तथा असमान बारिश को प्रमुख कारण बताया गया है। इसका असर खासतौर पर प्रीमियम गैर-बासमती चावल की किस्मों पर पड़ा है। सरकार ने देशभर के व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, थोक कारोबारियों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और चावल मिल ऑपरेटर्स को अपने पास उपलब्ध चावल और धान के स्टॉक की जानकारी घोषित करने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को जरूरत पड़ने पर चावल और धान दोनों पर स्टॉक लिमिट लगाने की अनुमति दी गई है।

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, इन कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना, कीमतों में स्थिरता बनाए रखना, जमाखोरी रोकना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।

हर शुक्रवार ऑनलाइन देनी होगी स्टॉक की जानकारी

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों के व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी रिटेल चेन और प्रोसेसर/मिलर्स को निर्धारित पोर्टल पर हर शुक्रवार ऑनलाइन अपने स्टॉक की जानकारी देनी होगी। इसमें बासमती चावल, गैर-बासमती प्रीमियम चावल, गैर-बासमती चावल, उसना चावल, टूटे चावल और धान का स्टॉक शामिल होगा।

ये भी पढ़ें: गेहूं की कीमतों में ₹344 प्रति क्विंटल तक की गिरावट, FCI की ई-नीलामी में घटे दाम! इस राज्य में हुई बढ़ोतरी

मंत्रालय ने कहा कि उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चावल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना की राज्य सरकारों को आवश्यकतानुसार उचित नियंत्रण आदेश जारी कर धान और चावल पर स्टॉक लिमिट लगाने की सहमति दे दी है। यदि राज्य सरकारें स्टॉक लिमिट लागू करती हैं, तो ये प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकारें इन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगी, ताकि बाजार में चावल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोका जा सके।

खरीफ 2026-27 में धान का रकबा 4 फीसदी घटा

खरीफ 2026-27 में बासमती और गैर-बासमती धान का कुल रकबा करीब 4 फीसदी घटकर 4.268 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। कई राज्यों में बारिश की कमी को रकबा घटने की प्रमुख वजह बताया गया है। केंद्र सरकार ने अभी तक खरीफ फसल के उत्पादन का पहला अनुमान जारी नहीं किया है। हालांकि, व्यापार और उद्योग जगत ने खरीफ 2026-27 में चावल का उत्पादन करीब 112 से 115 मिलियन टन रहने का अनुमान जताया है।

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।