त्योहारों से पहले घटेंगे दाल के दाम? इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर सरकार बना रही मास्टर प्लान, कौन-कौन सी दालें होंगी सस्ती?
सरकार त्योहारों से पहले दालों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चना और पीली मटर पर आयात शुल्क ...और पढ़ें

दालों से आयात शुल्क हटाने की तैयारी में सरकार
HighLights
सरकार चना और पीली मटर पर आयात शुल्क घटाने पर विचार कर रही है।
त्योहारों से पहले दालों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण का लक्ष्य है।
मानसून की कमी से दालों की पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दालों का बड़ा इंपोर्टर देश है, जिसके चलते अक्सर देश में दालों की कीमत हाई रहती है। त्योहारों से पहले दालों की कीमत को कंट्रोल करने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार चना और पीली मटर (येलो पीज) पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर विचार कर रही है। कमोडिटी व्यापारी के मुताबिक इस साल मानसून की बारिश कम होने से दालों की पैदावार को खतरा है और त्योहारों से पहले प्रमुख दालों के दाम बढ़ रहे हैं।
तेजी से बढ़ रहे हैं दालों के दाम
अभी चने के आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि पीली मटर पर 30 प्रतिशत शुल्क है। तूर और उड़द के आयात पर 31 मार्च 2027 तक कोई शुल्क नहीं लग रहा है। चना और पीली मटर पर शुल्क कम करने का प्रस्ताव घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और दामों को काबू में रखने के लिए है। पिछले एक महीने में चना, मूंग, मटर और तूर के दाम 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पिछले एक हफ्ते में ही 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फसल की चिंता और त्योहारी मांग बढ़ने से दाम ऊपर गए हैं।
दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्य उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी से इस साल दालों की पैदावार पर काफी असर पड़ेगा।
दालों की बुवाई प्रभावित
भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून लगभग 12% कम बारिश के साथ समाप्त हो रहा है। लेकिन खेती के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात इसका एक समान न होना है। कई महत्वपूर्ण फसल क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखा और नमी की कमी रही, जबकि कुछ इलाकों में तेज बारिश हुई। अब चिंता बुवाई के क्षेत्रफल से ज्यादा पैदावार पर है।
खरीफ दालों का कुल बुवाई क्षेत्र मानसून की कमी के बावजूद काफी हद तक स्थिर रहा है। 4 सितंबर तक दालों की बुवाई 117.13 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल यह 115.30 लाख हेक्टेयर थी। लेकिन मूंग की बुवाई 33.19 लाख हेक्टेयर हुई, जबकि पिछले साल 34.23 लाख हेक्टेयर थी।
पैदावार को लेकर भी बढ़ी चिंता
अलनीनो के असर के चलते न सिर्फ बुवाई में अनियमितता देखने को मिली बल्कि प्रोडक्शन पर भी सवाल है। व्यापारियों को महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की स्थिति को लेकर खास चिंता है। देश भर में क्षेत्रफल ज्यादा नहीं घटा है, लेकिन फसल के महत्वपूर्ण चरण में नमी की कमी से पैदावार और कुल फसल पर असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: दशहरा से पहले चीनी बिक्री का नया कोटा जारी, इन 3 राज्यों में होगी सबसे अधिक सप्लाई
ड्यूटी में कटौती का दिखेगा असर
यह संभावित ड्यूटी कमी त्योहारों से पहले सरकार का एक और सप्लाई बढ़ाने वाला कदम होगा। पिछले हफ्ते केंद्र ने घरेलू दामों को संतुलित करने के लिए कई खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम किया था। इसमें कच्चे पाम और सोयाबीन तेल पर मूल सीमा शुल्क 5 प्रतिशत कर दिया गया और कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया।
