Gold Silver Outlook: सोने और चांदी में आने वाली है तूफानी तेजी, गोल्ड ₹1.85 लाख जाएगा; सिल्वर की राह कितनी मुश्किल?
Gold Silver Outlook 2027: ब्रिटिश कंपनी मेटल्स फोकस ने 2027 तक सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी का ...और पढ़ें

सोने चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल की भविष्यवाणी, 2027 तक गोल्ड ₹1.85 लाख पार

समय कम है?
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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| सोने और चांदी की कीमतें पिछले 9 महीने में औंधे मुंह गिर चुकी हैं। 29 जनवरी 2026 के ऑल टाइम हाई से सोना करीब 24% और चांदी 50% तक सस्ती हो चुकी है। साफ शब्दों में कहें तो सोना 45000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.10 लाख रुपए किलोग्राम तक (gold silver price crash) सस्ती हो चुकी है।
इस बीच कीमती धातुओं पर रिसर्च करने वाली ब्रिटिश कंपनी मेटल्स फोकस (Metals Focus) ने गोल्ड-सिल्वर में तेजी का अनुमान जारी किया है। मेटल्स फोकस के मुताबिक, 2027 में सोने की औसत कीमत 5,330 डॉलर प्रति औंस (gold price outlook) और चांदी की औसत कीमत 84.40 डॉलर प्रति औंस रह सकती है।
साल की आखिरी तिमाही में सोना 6,000 डॉलर (करीब 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) और चांदी 90 डॉलर प्रति औंस (करीब 2.75 लाख रुपए प्रति किलोग्राम) के करीब या उससे ऊपर (silver price outlook) पहुंच सकती है।
गिरावट का मतलब मंदी नहीं
मेटल्स फोकस में गोल्ड-सिल्वर के डायरेक्टर मैथ्यू पिगॉट ने एक इंटरव्यू में कहा कि,
"सोने में इस साल आई गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में तेजी की बुनियाद कमजोर नहीं हुई है। सोने की कीमतों में फिलहाल गिरावट का मतलब मंदी का दौर शुरू होना नहीं, बल्कि बाजार में स्थिरता आने की प्रक्रिया भी हो सकती है। संस्थागत निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने को 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर सहारा दे रही है।"
इंटरव्यू के दौरान पिगॉट ने यह भी बताया कि सोने की कीमतों में ब्रेक क्यों लगा? मिडिल ईस्ट की क्या भूमिका? उन्होंने यह भी बताया कि सोने और चांदी की कीमतों में भारत कैसे अहम भूमिका निभा सकता है। 5 पॉइंट्स में जानें सबकुछ।
1. सोने में तेजी पर क्यों लगा ब्रेक?
सोने की कीमतों पर महंगाई, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता का दबाव है। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों को ऐसे विकल्प आकर्षक लग रहे हैं, जहां नियमित रिटर्न मिलता है। इसके अलावा शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी और दूसरी कमोडिटी में भी निवेश के मौके मिल रहे हैं। पिगॉट के मुताबिक, सोने की कीमत जब 4,000 डॉलर प्रति औंस के करीब आती है, तो संस्थागत निवेशक फिर खरीदारी करने लगते हैं। केंद्रीय बैंक भी कीमतों को सहारा दे रहे हैं। बढ़ता सरकारी कर्ज, बजट घाटा और अमेरिकी आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता सोने की लंबी अवधि की मांग को मजबूत कर रहे हैं।
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2. मिडिल ईस्ट वॉर कब तक रोकेगा तेजी?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष सोने और चांदी की कीमतों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने की आशंका बढ़ती है। आमतौर पर महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता सोने की मांग बढ़ाती है। लेकिन जब महंगाई के साथ डॉलर और ब्याज दरों को भी मजबूती मिलती है, तो सोने की तेजी पर दबाव पड़ सकता है। पिगॉट का कहना है कि
निवेशकों का भरोसा लौटने के लिए ऊर्जा बाजार में तनाव कम होना और मिडिल ईस्ट में बातचीत के मोर्चे पर ठोस प्रगति जरूरी है। केवल बातचीत की घोषणा से बाजार का भरोसा लौटना मुश्किल है, जब तक उसके नतीजे जमीन पर दिखाई न दें। पिगॉट का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से लंबे समय तक लगातार ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद नहीं है। क्योंकि, बहुत ज्यादा सख्ती से अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो सकती है, जिससे आगे चलकर सोने की मांग को समर्थन मिलेगा।"
3. 2027 में कितना महंगा हो सकता है सोना?
मेटल्स फोकस के मुताबिक, सोने की औसत कीमत 2026 में 4,600 डॉलर प्रति औंस और 2027 में 5,330 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। यह करीब 16% की बढ़ोतरी है। 2027 की चौथी तिमाही में औसत कीमत 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है। बाजार की परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो भाव 6,000 डॉलर के करीब जा सकते हैं।
साल के आखिरी महीनों में भारत और चीन जैसे बाजारों में सोने की भौतिक मांग भी कीमतों को सहारा दे सकती है। फिलहाल सोने के सिक्कों और बार में निवेश की मांग जनवरी के शुरुआती उछाल के मुकाबले कमजोर रही है। डीलरों को पुराना सोना बेचने की वजह से नई खरीदारी का असर भी सीमित रहा है।"
4. चांदी के 90 डॉलर पार जाने की राह कितनी मुश्किल?
चांदी के लिए तस्वीर सोने के मुकाबले ज्यादा जटिल है। चांदी की औसत कीमत 2026 में 72.60 डॉलर और 2027 में 84.40 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। यानी करीब 16% की बढ़ोतरी। अगले साल की चौथी तिमाही में भाव 90 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा सकते हैं। लेकिन चांदी की औद्योगिक मांग में कमजोरी तेजी की राह में बाधा बन सकती है। कंपनी का अनुमान है कि चांदी का वैश्विक बाजार 2026 में 3.54 करोड़ औंस की कमी से 2027 में 3.73 करोड़ औंस के अधिशेष में आ सकता है।
इसका प्रमुख कारण सौर पैनल बनाने वाली कंपनियों का चांदी का इस्तेमाल घटाना है। कंपनियां उत्पादन लागत कम करने और तकनीक की दक्षता बढ़ाने के लिए हर पैनल में कम चांदी लगा रही हैं। कुछ कंपनियां तांबे जैसे दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रही हैं।"
5. क्या निवेशकों की खरीदारी चांदी को नई ऊंचाई देगी?
पिगॉट के मुताबिक, चांदी की अगली बड़ी तेजी का मुख्य आधार औद्योगिक मांग के बजाय निवेशकों की वापसी होगी। अगर सोने में तेजी आती है और चांदी से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड उत्पादों में निवेश बढ़ता है, तो बाजार में उपलब्ध चांदी की मात्रा घट सकती है। इससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, उन्हें इस बार पहले जैसी अत्यधिक भौतिक कमी और आपूर्ति संबंधी दबाव की उम्मीद नहीं है, जिसने चांदी को पहले 120 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई थी।
भारत में भी चांदी में भौतिक निवेश की मांग अहम बनी हुई है। 2026 में भारतीय निवेश मांग करीब 10% घट सकती है। इसे कमजोरी नहीं मानना चाहिए, क्योंकि 2025 की दूसरी छमाही में खरीदारी असाधारण रूप से मजबूत थी। उस ऊंचे स्तर से गिरावट के बावजूद मांग अच्छी बनी हुई है।
पिगॉट के मुताबिक, सोने के लिए केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, सरकारी कर्ज और आर्थिक अनिश्चितता लंबी अवधि में सहारा बने रह सकते हैं। वहीं, चांदी की तेजी के लिए सोने का मजबूत प्रदर्शन और निवेशकों की सक्रिय भागीदारी अहम होगी। हालांकि, ये अनुमान हैं, पक्के भाव नहीं। ब्याज दरों, डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और निवेश प्रवाह में बदलाव से बाजार की दिशा बदल सकती है।
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