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Gold Silver Outlook: सोने-चांदी में आएगी उछाल या चमक पड़ेगी फीकी? दीवाली से पहले ऐसा रह सकता है बुलियन मार्केट

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:59 PM (IST)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की चाल के कारण आगामी सप्ताह में ...और पढ़ें

गोल्ड-सिल्वर की कैसी होगी चाल? (AI फोटो)

गोल्ड-सिल्वर की कैसी होगी चाल? (AI फोटो)

HighLights

  1. पश्चिम एशिया तनाव से सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव

  2. कच्चे तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के करीब पहुंचीं

  3. रुपये की मजबूती से घरेलू सोने की कीमत गिरी

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने और रुपये की चाल से आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विश्लेषकों ने यह राय जताई। विश्लेषकों ने कहा कि निवेशकों की नजर शुरुआत में चीन के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जो औद्योगिक धातुओं और चांदी के लिए अहम हैं।
इसके बाद अमेरिका के आवास संबंधी आंकड़ों, उपभोक्ता धारणा, मुद्रास्फीति की उम्मीदों और भारत, ब्रिटेन तथा अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) के आंकड़ों पर नजर रहेगी।

उतार-चढ़ाव की उम्मीद

दशहरा के कारण मंगलवार को सुबह के सत्र में जिंस बाजार बंद रहेंगे। ब्रोकरेज मंच लेमॉन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा, “हमें इस सप्ताह कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर इसके असर से बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी, जिससे सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।”
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ने से ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है, जो सोने-चांदी की कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है। हालांकि, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल में नरमी से इन धातुओं को कुछ समर्थन मिल सकता है।

सोने का वायदा भाव

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव बीते सप्ताह 3,581 रुपये यानी 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी 14,568 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत टूटकर 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
गर्ग ने कहा कि रुपये में मजबूती के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों का अंतर बढ़ गया। उन्होंने कहा, “कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह मुद्रा में बदलाव रहा

भारतीय रुपये का हाल

भारतीय रुपया पांच कारोबारी सत्रों में 96.8 के स्तर से मजबूत होकर 94.8 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें 180 पैसे से अधिक की मजबूती आई। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और कारोबारियों की ओर से डॉलर की खरीद के सौदे घटाने की भूमिका रही।”
रुपये की मजबूती से आयातित सोने की लागत कम हुई, जिससे घरेलू बाजार में चार सत्रों के दौरान इसकी कीमत 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक गिर गई। यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट से करीब पांच गुना ज्यादा थी।

चांदी पर ज्यादा असर

गर्ग ने कहा कि ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताओं का चांदी पर ज्यादा असर पड़ा। इसकी कीमत में तेज गिरावट आई और बाद में यह करीब 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची। उन्होंने कहा कि कारोबारियों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के मुकाबले रुपये की चाल का ज्यादा असर पड़ा।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर ने कहा, “ सोने और चांदी के वायदा भाव शुक्रवार को सीमित दायरे में रहे, लेकिन पहले की बिकवाली के सौदे काटने और निचले स्तर पर खरीदारी के कारण इनमें तेजी का रुख रहा।” उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर कमजोर होने से सोने-चांदी को कुछ समर्थन मिला।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम

महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक रहने के बावजूद कारोबारियों ने अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम कर दी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने संकेत दिया कि फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) मौद्रिक नीति पर आगे कोई फैसला करने से पहले और आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर सकती है।
मेर ने कहा, “इसके अलावा, हमें उम्मीद नहीं है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ब्याज दरें बढ़ाएगा या भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर कोई नया संकेत देगा।”
विश्लेषकों ने कहा कि आने वाले सप्ताह में डॉलर की चाल, रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रम और भू-राजनीतिक जोखिमों पर भी नजर रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव से मुद्रास्फीति की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं और इसका असर सोने-चांदी की कीमतों के रुख पर पड़ सकता है।

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