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गेहूं की कीमतों पर लगाम के लिए FCI का बड़ा कदम, नीलामी की मात्रा दोगुनी! किस राज्य के लिए कितना अलॉट?

Published: Mon, 02 Nov 2026 05:42 PM (IST)

गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) 4 नवंबर ...और पढ़ें

गेहूं की कीमतें कंट्रोल करने का प्लान

गेहूं की कीमतें कंट्रोल करने का प्लान

HighLights

  1. FCI 4 नवंबर को दोगुनी मात्रा में गेहूं की नीलामी करेगा।

  2. पंजाब, हरियाणा, यूपी जैसे राज्यों को गेहूं का अधिक आवंटन।

  3. MSME संगठन ने नीलामी की शर्तों पर सवाल उठाए हैं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी और सरकारी भंडार में घटते स्टॉक के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में गेहूं की सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) 4 नवंबर को होने वाली साप्ताहिक नीलामी में 1.99 लाख टन गेहूं बिक्री के लिए पेश करेगा। यह मात्रा 28 अक्टूबर को हुई पिछली नीलामी में पेश किए गए 1.01 लाख टन गेहूं के मुकाबले लगभग दोगुनी है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से गेहूं की कीमतों में कितनी कमी आएगी।

इन राज्यों के लिए बढ़ा आवंटन

30 और 31 अक्टूबर को जारी 22 राज्यों की नीलामी संबंधी टेंडर के अनुसार, FCI ने कई राज्यों के लिए गेहूं की मात्रा बढ़ाई है। पंजाब के लिए आवंटन 25,000 टन से बढ़ाकर 44,000 टन कर दिया गया है। हरियाणा में 12,000 टन से बढ़कर 23,000 टन और उत्तर प्रदेश में 8,000 टन से बढ़कर 14,000 टन हो गया है। वहीं मध्य प्रदेश के लिए मात्रा 6,000 टन से बढ़ाकर 10,000 टन की गई है।

असम, दिल्ली और कर्नाटक में आवंटन 5,000 टन से बढ़ाकर 12,000 टन प्रति राज्य किया गया है। गुजरात के लिए 8,000 टन और राजस्थान के लिए भी 8,000 टन गेहूं रखा गया है। पिछली नीलामी में इन राज्यों के लिए क्रमशः 4,500 टन और 4,000 टन की मात्रा तय की गई थी। इसके साथ ही तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए आवंटन 4,000 टन से बढ़ाकर 10,200 टन किया गया है।

पिछली नीलामी में लगभग पूरा गेहूं बिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 अक्टूबर की नीलामी में FCI ने 1.01 लाख टन गेहूं बिक्री के लिए पेश किया था। इसमें से 99,316 टन गेहूं बिक गया, जो कुल पेश की गई मात्रा का लगभग 98.3 प्रतिशत है। कई राज्यों में नीलामी के लिए रखी गई पूरी मात्रा बिक गई थी।

इससे बाजार में गेहूं की मांग का संकेत मिलता है। हालांकि, व्यापारियों को नीलामी में भाग लेने की अनुमति नहीं है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गेहूं को वास्तविक उपयोगकर्ताओं, जैसे आटा मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स तक पहुंचाना है।

MSME संगठन ने उठाए नीलामी की शर्तों पर सवाल

गेहूं की नीलामी की मात्रा बढ़ाने से एक दिन पहले, दिल्ली स्थित MSME Welfare Association के अध्यक्ष आशीष गर्ग ने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी को पत्र लिखकर नीलामी की व्यवस्था का रिव्यू करने की मांग की थी। उन्होंने गेहूं के आरक्षित मूल्य, लॉट के आकार, खरीदारों के लिए मात्रा संबंधी सीमाओं और बिक्री की अन्य शर्तों पर दोबारा विचार करने की रिक्वेस्ट की। उनका कहना है कि इससे वास्तविक आटा मिलों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और अन्य पात्र खरीदारों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गेहूं मिल सकेगा।

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गर्ग ने बोली लगाने वालों के वेरिफिकेशन को मजबूत करने और फर्जी बोली लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की। उनके मुताबिक, ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत कुछ बिक्री स्थितियों में FCI का गेहूं बाजार भाव से 20-30 प्रतिशत अधिक कीमत पर बिका है। उन्होंने खाद्य निगम के सरकारी गेहूं भंडार का अधिक प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने की जरूरत बताई, ताकि कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को राहत मिले।

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