त्योहारों से पहले सस्ता होगा खाने का तेल? ग्राहकों को राहत देने के लिए खुदरा कीमतों पर IVPA का मास्टर प्लान! सरकार करेगी निगरानी
सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती की है, जिससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की ...और पढ़ें

कुकिंग ऑयल के दाम कम करने का प्लान
HighLights
सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती की।
IVPA ने कंपनियों से खुदरा कीमतें घटाने को कहा।
त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में खाद्य तेलों का आयात लगातार बढ़ता जा रहा है। घरेलू बाजारों में आपूर्ति बनाए रखने के साथ ही इसकी कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने खाने के तेलों की इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है। त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग के बीच खाने के तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने अपने सदस्य तेल उत्पादकों और रिफाइनरों को पत्र लिखकर खुदरा कीमतों में कटौती करने की अपील की है, साथ ही कंपनियों से हर सप्ताह खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों की जानकारी सरकार को उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। IVPA का मानना है कि ड्यूटी में कमी का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए।
नेपाल से इंपोर्ट में आएगी कमी
IVPA का मानना है कि ड्यूटी में कटौती से नेपाल के रास्ते होने वाले आयात में कीमत का अंतर कम हो सकता है, इससे आयात में आई तेजी को नियंत्रित करने साथ ही घरेलू इंपोर्टर्स और रिफाइनर्स के बीच बेहतर प्रतिस्पर्धा बनाने में मदद मिलेगी। संगठन के अनुसार यह फैसला सिर्फ उपभोक्ता कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल व्यापार में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
त्योहारों के बीच आम ग्राहकों को राहत
IVPA के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब देश त्योहारी सीजन की ओर बढ़ रहा है और खाद्य तेलों की खपत आमतौर पर बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल मार्केट में खाद्य तेलों की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव, मौसम संबंधी चुनौतियों और बायोफ्यूल उत्पादन के लिए वनस्पति तेलों की बढ़ती मांग के कारण दबाव में रही हैं। इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा और उपभोक्ताओं के बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा।
खुदरा बाजारों में कीमतें कम करने पर जोर
देसाई ने आगे कहा कि इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे ड्यूटी में कमी का लाभ खुदरा कीमतों में कमी के रूप में ग्राहकों तक पहुंचाएं। साथ ही कंपनियां हर सप्ताह अपनी खुदरा मूल्य सूची सरकार को भेजें, ताकि कीमतों की निगरानी की जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी राहत का लाभ समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचे।
IVPA के अनुसार पिछले 6 से 12 महीनों के दौरान वैश्विक खाद्य तेल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। भारत में खुदरा महंगाई भी बढ़ी है और अगस्त 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 4.8 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस दौरान कई खाद्य तेलों की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बढ़ती मांग के बीच कीमतों में नरमी
संगठन ने कहा कि त्योहारी सीजन में घरों, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर, मिठाई, नमकीन और होटल-रेस्तरां (HoReCa) इंडस्ट्री में खाद्य तेलों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आयात लागत में कमी से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और खपत को भी समर्थन मिलेगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि कंपनियां ड्यूटी कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं तो आने वाले हफ्तों में सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम तेल सहित कई खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है, जिससे त्योहारों के दौरान आम लोगों के रसोई बजट को राहत मिलेगी।
