GST में 10% की कटौती का असर! बाइक्स की बिक्री में 33 फीसदी से अधिक का उछाल, ट्रैक्टर खरीदने से किसानों ने क्यों बनाई दूरी?
सितंबर में जीएसटी कलेक्शन में उछाल के साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी तेजी देखी गई, खासकर दोपहिया वाहनों की ...और पढ़ें

बाइक्स की बिक्री में जबरदस्त उछाल
HighLights
सितंबर में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 33.08% की वृद्धि।
350cc से कम बाइक्स पर जीएसटी दर 28% से 18% हुई।
कम मानसून के कारण ट्रैक्टरों की बिक्री में 12.6% की गिरावट।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| GST काउंसिल की 57वीं बैठक से पहले सितंबर महीने में जीएसटी कलेक्शन का भी डेटा सामने आया, जिसमें करीब 14.7 फीसदी का उछाल आया है। इसके साथ ही फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों भी सामने आए हैं, जिसके अनुसार सितंबर में दोपहिया और यात्री वाहनों की कुल खुदरा बिक्री में साल-दर-साल 31.8% की वृद्धि हुई और यह 25 लाख यूनिट तक पहुंच गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले साल लागू की गई टैक्स में कटौती से इस सेक्टर को लाभ हुआ है।
बाइक की बिक्री में जबरदस्त उछाल
सितंबर 2026 में ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री में कुल 31.82% (करीब 31.8%) की वृद्धि दर्ज की गई और सभी कैटेगरी को मिलाकर कुल बिक्री रिकॉर्ड 25.37 लाख (2.54 मिलियन) यूनिट्स तक पहुंच गई। FADA) के अनुसार दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 33.08% बढ़कर 17,90,188 यूनिट्स रही।
GST दरों में कटौती का दिखा असर
पिछले साल सरकार ने GST 2.0 सुधारों के तहत टू-व्हीलर सेगमेंट पर GST की दर को पूरे 10% कम किया था। 350cc से कम इंजन वाली बाइक्स और स्कूटर पर जीएसटी की दर को 28% से घटाकर सीधे 18% कर दिया गया था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसका सीधा फायदा देखने मिला, क्योंकि भारत की करीब 98% मोटरसाइकिलें और 124cc तक के स्कूटर इसी दायरे में आते हैं।
ट्रैक्टरों की खरीद में आई गिरावट
सितंबर महीने में जहां एक ओर वाहनों की खरीद में हाई उछाल आया है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर्स कि बिक्री में कमी देखने को मिली है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, डीलरों ने सितंबर में 76,906 ट्रैक्टर बेचे, जो अगस्त में बेची गई 87,977 इकाइयों से कम है। सितंबर में भारत में ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में 12.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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जानकारों का मानना है कि ट्रैक्टर्स की बिक्री में कमी का सबसे बड़ा कारण मानसून है। इस साल जून से सितंबर तक बारिश सामान्य से कम होने के कारण एग्रीकल्चर से जुड़े लोगों ने कम खरीद की है। ग्रामीण मांग मानसून से closely जुड़ी हुई है, और अनियमित वर्षा के साथ-साथ लंबे समय तक सूखे की स्थिति कृषि आय पर दबाव डाल सकती है और कैश फ्लो में देरी होती है, जिससे परिवारों को बड़ी खरीदारी पर खर्च को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
