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धनतेरस-दीवाली पर सोना खरीदेंगे? अगर हां, तो पेमेंट करने से पहले चेक कर लें ये 5 बातें, वरना लग सकता है चूना!

Published: Mon, 02 Nov 2026 04:56 PM (IST)

Gold News Today: धनतेरस और दीवाली पर सोना खरीदते समय ग्राहकों को अक्सर छुपे हुए शुल्कों का सामना करना पड़ता ...और पढ़ें

धनतेरस-दीवाली पर सोना खरीदेंगे? अगर हां, तो पेमेंट करने से पहले चेक कर लें ये 5 बातें, वरना लग सकता है चूना!

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संक्षेप में पढ़ें

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| धनतेरस और दीवाली के पावन अवसर पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी और बेहद खास परंपरा रही है। इस साल धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जा रही है, और इस खास मौके पर देश भर में बड़ी संख्या में लोग सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती सामान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि, जोश और उत्साह में अक्सर ग्राहक केवल सोने का प्रति ग्राम भाव पूछकर खरीदारी कर लेते हैं, लेकिन जब दुकान से फाइनल बिल हाथ में आता है, तो उसमें कई तरह के छुपे हुए चार्ज जुड़ चुके होते हैं, जिससे जेब पर भारी असर पड़ता है।

इसलिए सोना खरीदने और उसका बिल चुकाने से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान से चेक करना बेहद समझदारी का कदम है।

इन 5 बातों का रखें ध्यान

सबसे पहली और अहम चीज है- सोने की मूल कीमत। यह किसी भी ज्वैलरी के बिल का सबसे बड़ा हिस्सा होती है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिल में दर्ज प्रति ग्राम कीमत उसी कैरेट के अनुसार है, जो आप खरीद रहे हैं- जैसे कि 22 कैरेट या 18 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग होते हैं। अलग-अलग दुकानों के रेट की तुलना करना भी हमेशा फायदेमंद साबित होता है।

दूसरी बात है- मेकिंग चार्ज। यह आभूषण को सुंदर डिजाइन देने और गढ़ने की मजदूरी होती है। कई ज्वैलर्स इसे सोने की कीमत का एक निश्चित प्रतिशत जोड़ते हैं, तो कुछ प्रति ग्राम के हिसाब से फिक्स रकम वसूलते हैं। डिजाइन जितना बारीक और जटिल होगा, मेकिंग चार्ज उतना ही ज्यादा होगा। इसलिए बिल चुकाने से पहले यह जरूर पूछ लें कि मेकिंग चार्ज फिक्स है या इस पर मोलभाव किया जा सकता है।

तीसरी जरूरी चीज है- वेस्टेज चार्ज। कई ज्वैलर्स गहना बनाते समय सोने की बर्बादी (कष्ट) का हवाला देकर अलग से वेस्टेज शुल्क वसूल लेते हैं। कई बार यह चार्ज मेकिंग चार्ज के अंदर ही शामिल होता है, लेकिन कुछ जगह इसे अलग से जोड़ा जाता है। इसलिए यह स्पष्ट कर लेना जरूरी है ताकि आपको एक ही लागत के लिए दो बार भुगतान न करना पड़े।

चौथी सबसे बड़ी बात है- बीआईएस हॉलमार्क और शुद्धता। सोने की असली शुद्धता की पहचान केवल हॉलमार्क से होती है। गहनों पर बीआईएस हॉलमार्क और एचयूआईडी (HUID) नंबर जरूर चेक करें। यदि बिल में हॉलमार्किंग का शुल्क अलग से जोड़ा गया है, तो उसका स्पष्ट विवरण मांगें ताकि प्रमाणित सोना ही आपके घर आए।

अंत में, आभूषणों की कुल कीमत (सोने के दाम और मेकिंग चार्ज को मिलाकर) पर सरकार द्वारा 3% GST) लगाया जाता है। बिल में जीएसटी की गणना सही तरीके से हुई है या नहीं, इसकी जांच अवश्य करें।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इन पांचों बातों का ध्यान रखकर आप अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं। यदि आप केवल निवेश के मकसद से खरीददारी कर रहे हैं, तो आभूषणों की जगह सोने के सिक्के, बार या गोल्ड ईटीएफ के विकल्प अधिक किफायती हो सकते हैं।

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