कच्चे तेल की कीमतों में फिर लगी आग! भाव पहुंचा 109 डॉलर के पार; पेट्रोल-डीजल फिर होगा महंगा?
मध्य पूर्व तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति ...और पढ़ें

ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, मई के बाद उच्चतम स्तर पर।
HighLights
ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, मई के बाद उच्चतम।
मध्य पूर्व तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध मुख्य कारण हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखी गई है। मई के बाद पहली बार फिर से ब्रेंट ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। आपूर्ति में जल्द राहत मिलने की उम्मीदें कम हो रही हैं, जिसके चलते ट्रेडर्स ने वीकेंड से पहले कीमतों में और बढ़ोतरी होने का दांव लगाना शुरू कर दिया है। अगर ऐसी ही तेजी जारी रही तो आने वाले समय में इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
ब्रेंट फ्यूचर्स मई के बाद पहली बार $110 प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। मध्य पूर्व और रूस में चल रहे युद्धों के कारण सप्लाई बाधित होने से, इस साल कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में 70% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने रूस और ईरान से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदने वाले 5 देशों पर 100% टैरिफ से राहत दी है।
वैश्विक संघर्ष से सप्लाई प्रभावित
प्रमुख निर्यात केंद्रों में जारी संघर्ष की खबरों के बीच, बाजार में तेजी का रुख और मजबूत हुआ, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 3.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ईरान समर्थित हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं। दूसरी ओर रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। इन संघर्षों का असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है। सप्लाई बाधित होने से कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
अमेरिका में पेश हुआ रूस से समझौता रोकने वाला बिल
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच अमेरिकी सांसदों ने शुक्रवार को एक बिल पेश किया, जिसका मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मॉस्को के बीच हुए उस समझौते को रोकना है, जिसके तहत कई सौ मिलियन बैरल डीजल जारी किया जाना है। यह कदम ऐसे किसी भी उपाय के खिलाफ व्यापक विरोध को दर्शाता है, जिससे रूस को अपने युद्ध कोष (war chest) को मजबूत करने का मौका मिल सके।
अगर वैश्विक बाजारों में रूसी डीजल की एंट्री पर रोक बनी रहती है, तो अन्य जगहों की रिफाइनरियों को मांग पूरी करने के लिए तेल प्रोसेसिंग बढ़ानी पड़ेगी। ट्रंप ने फिर दोहराया है कि मॉस्को डीजल जारी करने के समझौते पर अमल करेगा।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, काला सागर (Black Sea) के आसपास लगातार जारी तनाव जिसमें रूस की रियाज़ान तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हुआ हमला भी शामिल है, जिसके कारण वहां कामकाज ठप हो गया। इस संघर्ष ने समझौते के पूरा होने को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है।
