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पेट्रोल-डीजल ही नहीं, दूध-सब्जियों से लेकर महंगा हो सकता है हर सामान! क्रूड ऑयल $110 के पार जाते ही क्यों बढ़ी टेंशन?

Published: Tue, 20 Oct 2026 03:07 PM (IST)

Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पांच महीने ...और पढ़ें

पेट्रोल-डीजल ही नहीं, दूध-सब्जियों से लेकर महंगा हो सकता है हर सामान! क्रूड ऑयल $110 के पार जाते ही क्यों बढ़ी टेंशन?

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। मंगलवार, 20 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा का उछाल आया और कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.23% उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price Today) के करीब पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की सख्त चेतावनियों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

इस साल अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 80% की तेजी आ चुकी है। तेल की कीमतों में इस उछाल से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है। क्रूड में लगातार उछाल आने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। जिसका सीधा असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।

ईरान-अमेरिका तनाव और सप्लाई पर असर

ईरान के पहले उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने साफ कहा है कि, देश की सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए होर्मुज (strait of hormuz) पर नियंत्रण जरूरी है। इसके अलावा, यमन में हूतियों के हमलों और सऊदी अरब की ऊर्जा एवं सैन्य सुविधाओं पर लगातार हो रहे हमलों ने तेल बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट और इराक के तेल मंत्री का कहना है कि खाड़ी देशों से तेल का निर्यात धीरे-धीरे युद्ध-पूर्व के स्तर के करीब लौट रहा है और ओपेक सदस्य देशों द्वारा छूट दिए जाने के बाद शिपमेंट में कुछ सुधार हुआ है, फिर भी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

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अब 150 डॉलर तक पहुंच सकता है क्रूड?

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी वाइस प्रेसिडेंट एवं रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने जागरण बिजनेस से खास बातचीत में बताया कि, अगर भू-राजनीतिक हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें खतरनाक स्तर पर जा सकती हैं। अगर अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद अमेरिका बड़े पैमाने पर ईरान पर हमले शुरू कर देता है और ईरान जवाबी कार्रवाई में शिपमेंट को पूरी तरह ठप कर देता है, तो कच्चे तेल के दाम उछलकर 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकते हैं।

इसके लिए एक बड़ी शर्त यह है कि ब्रेंट क्रूड को 110 से 115 डॉलर के मेजर हर्डल को पार करके साप्ताहिक आधार पर इसके ऊपर क्लोजिंग देनी होगी। जब तक यह बड़ा हर्डल क्रॉस नहीं होता, तब तक कीमतों के 140-150 डॉलर तक पहुंचने का तत्काल डर नहीं है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई (WTI) के बीच का मौजूदा करीब 10 डॉलर का प्राइस डिफरेंस यह बताता है कि ब्रेंट में अभी प्रीमियम बना हुआ है। जब यह डिफरेंस घटकर सामान्य स्तर (2 से 3 डॉलर) पर आने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि क्रूड में बड़ी गिरावट शुरू होने वाली है।"

भारत में क्या-क्या हो सकता है महंगा?

जतीन त्रिवेदी बताते हैं कि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल इसी तरह महंगा बना रहा या 150 डॉलर तक पहुंचा, तो इसका सीधा असर भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड महंगा होने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। साथ ही कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

पेट्रोल और डीजल: भारत में ईंधन के खुदरा दाम सीधे तौर पर क्रूड ऑयल की इंटरनेशनल कीमतों से जुड़े हैं, जिससे पंपों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

लॉजिस्टिक और ट्रांसपोर्टेशन: डीजल महंगा होने से ट्रकों और मालवाहक गाड़ियों का किराया बढ़ जाएगा, जिससे फल, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा की जरूरत के तमाम पैक्ड फूड आइटम्स महंगे हो जाएंगे।

दैनिक उपभोग के सामान (FMCG): ढुलाई लागत बढ़ने और प्लास्टिक पैकेजिंग मैटेरियल (जो क्रूड से ही बनता है) के महंगे होने से साबुन, तेल, शैंपू और अन्य घरेलू सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।

विमान का सफर: जेट ईंधन (ATF) के दाम बढ़ने से हवाई यात्राएं काफी महंगी हो सकती हैं।

महंगाई: कच्चे तेल में तेजी आने से भारत में आयातित सामान महंगे होंगे, जिससे देश में एक बार फिर महंगाई दर बढ़ सकती है और आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।

नंवबर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती है सरकार

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की लीड इकोनॉमिस्ट एलेक्जेंड्रा हरमन प्रसाद के मुताबिक, भारत सरकार नवंबर के महीने में पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel Price Hike) की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती है। अगले साल की शुरुआत में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सरकार के पास ईंधन के दाम बढ़ाने के लिए यही एकमात्र और आखिरी व्यावहारिक समय बचा है। उन्होंने आगे कहा कि,

अगर नवंबर में कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो यह बढ़ोतरी अमेरिका और ईरान (US-Iran War) के बीच युद्ध के दौरान मई में हुई कुल 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के मुकाबले लगभग आधी हो सकती है।"

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं, उनमें गोवा, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश (up elections 2027), हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल हैं, जहां चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ही सरकार यह कदम उठा सकती है।

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