टूटे चावल के एक्सपोर्ट पर लगेगा ब्रेक? कीमतें 360 डॉलर के पार! एथनॉल और पोल्ट्री में डिमांड हाई
भारत में टूटे चावल की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल व पोल्ट्री फीड उद्योगों से बढ़ती मांग के कारण इसके निर्यात ...और पढ़ें

टूटे चावल पर IREF का बड़ा अनुमान
HighLights
टूटे चावल की कीमतें $360 प्रति टन पार।
इथेनॉल, पोल्ट्री फीड से मांग में भारी वृद्धि।
सरकार निर्यात प्रतिबंध पर कर सकती है विचार।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत में टूटे चावल (100 फीसदी ब्रोकन राइस) की कीमतों में तेजी के बीच इसके निर्यात पर फिर से रोक लगने की आशंका जताई जा रही है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में टूटे चावल की कीमत 360 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई है। इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों, पोल्ट्री फीड इंडस्ट्री और विदेशी खरीदारों की बढ़ती मांग से कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, 2 नवंबर को देश में टूटे चावल की औसत थोक कीमत ₹3,036 प्रति क्विंटल रही। 10 अक्टूबर को यह ₹2,883 प्रति क्विंटल थी। यानी तीन सप्ताह से कुछ अधिक समय में कीमत 5.3 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं, सितंबर 2026 में टूटे चावल की थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 5.38 प्रतिशत रही, जो अगस्त में 4.37 प्रतिशत थी।
टूटे चावल की इंडस्ट्रियल मांग में तेजी
IREF के डायरेक्टर जनरल विनोद कौल ने कहा कि टूटे चावल की कीमतों में तेजी पर ध्यान देने की जरूरत है। एथनॉल उत्पादन और पोल्ट्री फीड जैसे उद्योगों में इसकी मांग बढ़ रही है। घरेलू उद्योगों और निर्यात बाजार के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से इसकी उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ रहा है। अगर यह रुझान जारी रहा तो सरकार इसके निर्यात पर फिर प्रतिबंध लगा सकती है।
एथनॉल उद्योग से बढ़ी मांग
देश में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम बढ़ने से अनाज की मांग बढ़ी है। इसमें टूटे चावल, मक्का और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल का इस्तेमाल होता है। सरकार ने इथेनॉल बनाने के लिए FCI के अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल की अनुमति दी है। हालांकि, निजी डिस्टिलरी कंपनियां खुले बाजार से भी चावल खरीदती हैं। इससे पोल्ट्री फीड कंपनियों और निर्यातकों के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
पहले भी लग चुकी है निर्यात पर रोक
सरकार ने घरेलू उपलब्धता और कीमतों को देखते हुए सितंबर 2022 में टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। यह रोक 7 मार्च 2025 तक लागू रही। इसके बाद निर्यात को फिर से फ्री कैटेगरी में शामिल कर दिया गया।
IREF के मुताबिक, 2025-26 में देश में चावल का रिकॉर्ड 15.40 करोड़ टन उत्पादन होने का अनुमान है। इससे पिछले साल उत्पादन 15.01 करोड़ टन था। भारत ने इस दौरान करीब 2.15 करोड़ टन चावल का निर्यात भी किया। हालांकि, संगठन का कहना है कि कुल चावल का उत्पादन अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि टूटे चावल की उपलब्धता भी पर्याप्त होगी।
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फेडरेशन ने निर्यातकों को नए सौदे करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही सरकार से कहा है कि निर्यात पर कोई भी प्रतिबंध लगाने से पहले उद्योग से जुड़े लोगों से बातचीत की जाए और पहले से किए गए निर्यात सौदों को पूरा करने के लिए उचित समय दिया जाए। हालांकि अब तक चावल के निर्यात को लेकर सरकार की ओर से किसी तरह की कोई घोषणा या चर्चा नहीं हुई है।
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