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नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अंतरिम बजट 2019-20 में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 5 लाख तक की सालाना कमाई को टैक्स फ्री कर दिया है। हालांकि इसके ऊपर भी टैक्स पेयर 80C के इस्तेमाल से करमुक्त आय को 6.50 लाख रुपये तक ले जा सकते हैं। अधिकांश लोगों को टैक्स बचाने के लिए सिर्फ 80C और 80U की ही जानकारी होती है, लेकिन इसके अलावा भी आयकर की अन्य धाराएं होती है जो कि तरह-तरह के निवेश विकल्पों से जुड़ी होती हैं और टैक्स भी बचाती हैं।

आईटी एक्ट के अंतर्गत आने वाले टैक्स सेविंग विकल्पों में अधिकांश लोग पीपीएफ, पांच वर्षीय फिक्स्ड डिपॉजिट, ईएलएसएस, लाइफ इंश्योरेंस प्लान इत्यादि को ही तवज्जो देते हैं जो कि आयकर की धारा 80C के अंतर्गत आते हैं और इस पर आप एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 1.50 लाख रुपये की कर छूट का दावा कर सकते हैं। हालांकि अगर आप इस सीमा को पार कर चुके है उसके बाद भी 5 ऐसे टैक्स सेविंग विकल्प हैं जो आपके टैक्स की बचत करवा सकते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस): NPS एक लंबी अवधि का टैक्स सेविंग निवेश विकल्प है। जब आप 60 वर्ष के हो जाते हैं एनपीएस मैच्योर हो जाता है। हालांकि इसमें मैच्योरिटी से पहले निकासी की अनुमति मिलती है। सब्सक्राइबर्स अपने एनपीएस खाते से 20 फीसद राशि की निकासी कर सकते हैं। आईटी एक्ट के मुताबिक एनपीएस में एक साल के भीतर किया गया 50,000 रुपये का सालाना निवेश आयकर की धारा 80(CCD) के अंतर्गत टैक्स छूट पाने योग्य होता है। आप एनपीएस और 80C को मिलाकर 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

एजुकेशनन लोन का ब्याज: अगर आपने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन ले रखा है तो आप टैक्स छूट के लिए क्लेम कर सकते हैं। आप आयकर की धारा 80E के अंतर्गत एजुकेशन लोन के ब्याज भुगतान पर टैक्स कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं। इसके अंतर्गत आप एक वित्त वर्ष के दौरान 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं।

हेल्थ इंश्योरेंस: अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है तो धारा 80D के अंतर्गत इनकम टैक्स एक्ट आपको टैक्स बेनिफिट क्लेम करने की इजाजत देता है। इस धारा के अंतर्गत आप 25,000 रुपये की टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं। वहीं सीनियर सिटिजन के लिए यह लिमिट 30,000 रुपये है।

होम लोन इंटरेस्ट: टैक्सपेयर्स होम लोन के इंटरेस्ट (ब्याज) पर एक वित्त वर्ष के दौरान 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। यह छूट आयकर की धारा 80EE के अंतर्गत मिलती है। वर्ष 2016 तक इसकी सीमा 1.5 लाख रुपये निर्धारित थी लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस सीमा में 50,000 रुपये का इजाफा कर दिया।

हाउस रेंट अलाउंट (एचआरए): टैक्स पेयर्स हाउस रेंट अलाउंट यानी एचआरए (HRA) पर भी टैक्स कटौती क्लेम कर सकते हैं। यह छूट आयकर की धारा 80GG के अंतर्गत मिलती है। टैक्स डिडक्शन की राशि उस पर निर्भर करती है कि आप किस शहर में रहते हैं। लेकिन इस पर टैक्स कटौती तभी क्लेम किया जा सकता है जब आप किराए के घर, फ्लैट और अपार्टमेंट में रह रहे हों।

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Posted By: Praveen Dwivedi

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