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तांबा, पानी और बिजली का 'चक्रव्यूह': जाम्बिया में अनिल अग्रवाल की वेदांता से राष्ट्रपति ने कर दी अपील! खदानों को बचाना जरूरी

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:12 AM (IST)

जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने वेदांता रिसोर्सेज से कोंकोला कॉपर माइंस के विस्तार के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने ...और पढ़ें

अनिल अग्रवाल की कंपनी का जाम्बिया में प्लान (AI फोटो)

अनिल अग्रवाल की कंपनी का जाम्बिया में प्लान (AI फोटो)

HighLights

  1. जाम्बिया ने वेदांता से कोंकोला खदान विस्तार हेतु बिजली मांगी

  2. कोंकोला खदान को चालू रखने के लिए निरंतर बिजली पंपिंग आवश्यक

  3. वेदांता का लक्ष्य वार्षिक तांबा उत्पादन 500,000 टन तक बढ़ाना

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अफ्रीकी देश जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल के कंट्रोल वाले माइनिंग ग्रुप वेदांता रिसोर्सेज से देश की सबसे विवादित खनन संपत्ति, कोंकोला कॉपर माइंस (Konkola Copper Mines) के विस्तार को सहारा देने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता के निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया है।
हिचिलेमा ने वेदांता के रणनीति और स्ट्रैटजी एंड डेवलपमेंट हेड पुष्पेंद्र सिंगला से मुलाकात के दौरान यह आग्रह किया। सिंगला ने उन्हें कोंकोला में हुई प्रगति और कंपनी की लंबी अवधि में वार्षिक तांबा उत्पादन को 500,000 टन तक बढ़ाने की योजना के बारे में जानकारी दी।

500,000 टन का लक्ष्य नया नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति हिचिलेमा ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन में और अधिक निवेश से खदान और जाम्बिया के बड़े एनर्जी लक्ष्यों दोनों को पूरा करने में मदद मिलेगी। 500,000 टन का लक्ष्य नया नहीं है। कॉपरटेक मेटल्स, वेदांता की सहायक कंपनी जो अब कोंकोला की मालिक और ऑपरेटर है, ने पिछले नवंबर में अपनी शुरुआत के समय इसे एक लॉन्ग टर्म महत्वाकांक्षा के रूप में तय किया था।

लगातार पंपिंग करना जरूरी

जाम्बिया के कॉपरबेल्ट में जमीन के काफी नीचे स्थित यह अयस्क भंडार दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले अयस्क भंडारों से कहीं अधिक क्वालिटी वाला है। यही कारण है कि दो दशकों से चले आ रहे विवादों के बावजूद खरीदारों की इसमें रुचि बनी हुई है।
यह भंडार भारी मात्रा में पानी के नीचे स्थित है। कोंकोला दुनिया की सबसे नम खानों में से एक है, और इसे चालू रखने के लिए लगातार पंपिंग करना आवश्यक है। पंप बंद करने पर खदान में पानी भर जाता है।

लगातार पंपिंग के लिए ही बिजली उत्पादन एक आवश्यकता बन जाती है। मौजूदा उत्पादन को 300,000 टन और फिर पांच लाख टन तक बढ़ाने का मतलब है अधिक गहराई तक खुदाई करना, अधिक पंप करना और अधिक गलाने की प्रक्रिया करना, जिसमें हर फेज पिछले चरण की तुलना में अधिक बिजली की खपत करेगा।

वर्षा पर बहुत अधिक निर्भरता

जाम्बिया खुद फिलहाल बिजली सप्लाई की गारंटी नहीं दे सकता। देश जलविद्युत उत्पादन पर बहुत अधिक निर्भर है और 2024 में दक्षिणी अफ्रीका में पड़े सूखे ने उत्पादन में भारी कमी ला दी, जिससे प्रमुख खनन कंपनियों को ऑपरेशन जारी रखने के लिए बिजली आयात करने पर मजबूर होना पड़ा।
उस साल राष्ट्रीय तांबा उत्पादन में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह लगभग 820,670 टन तक पहुंच गया, जो 2023 में 732,580 टन था, लेकिन इस घटना ने यह उजागर कर दिया कि यह उद्योग वर्षा पर कितना निर्भर है।

वेदांता की बिजली से क्या होगा?

हिचिलेमा सरकार एक दशक में राष्ट्रीय उत्पादन को तीन गुना बढ़ाकर 30 लाख टन करना चाहती है। जाम्बिया की एक्सपोर्ट इनकम का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तांबे से आता है और हर नए टन के उत्पादन के लिए बिजली की आवश्यकता होती है जो ग्रिड में अभी उपलब्ध नहीं है।
वेदांता को अपना खुद का उत्पादन करने के लिए कहना एक ऐसा तरीका है जिससे यह लागत खनन कंपनी पर डाली जा सकेगी और साथ ही देश के लिए भविष्य में उपयोग करने योग्य बिजली उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।

कंपनी पर लगे आरोप

वेदांता ने 2004 में कोंकोला में हिस्सेदारी खरीदी था और कहा है कि उसने तब से इस संपत्ति में 3 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें शाफ्ट डेवलपमेंट, स्मेल्टर अपग्रेड और कंसंट्रेटर वर्क शामिल हैं।
मगर 2019 में यह संबंध टूट गया, जब राष्ट्रपति एडगर लुंगू की सरकार ने वेदांता पर विस्तार योजनाओं के बारे में गलत जानकारी देने और बहुत कम टैक्स चुकाने का आरोप लगाते हुए खदान को अस्थायी परिसमापन में डाल दिया। कंपनी ने इसे वापस पाने के लिए लगभग पांच साल तक संघर्ष किया।

कोनकोला ने FY26 में लगभग 140,000 टन उत्पादन किया। 2031 तक 300,000 टन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए समय पर फंड और बिजली की उपलब्धता जरूरी है।

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