भारत से इंग्लैंड भागा और फिर US जाकर इस शख्स ने बनाया दुनिया का पहला लैपटॉप, 2 साल में हो गया था दिवालिया
एडम ओसबोर्न ने 1981 में दुनिया का पहला पोर्टेबल कंप्यूटर 'ओसबोर्न 1' बनाया, जिसकी कीमत $1,795 थी। नए मॉडल की ...और पढ़ें

एडम ओसबोर्न ने 1981 में 'ओसबोर्न 1' लॉन्च किया।
HighLights
एडम ओसबोर्न ने 1981 में 'ओसबोर्न 1' लॉन्च किया।
यह दुनिया का पहला व्यावसायिक रूप से सफल पोर्टेबल कंप्यूटर था।
नए मॉडल की घोषणा से कंपनी 1983 में दिवालिया हो गई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आज दुनिया तकनीकी के मामले में बहुत आगे निकल चुकी है। ऐसी-ऐसी चीज आ गई है कि आपको कुछ करने की ही जरूरत नहीं। आपके अधिकतर काम AI या रोबोट ही कर दे रहे हैं। टेक्नोलॉजी को आसान बनाने की शुरुआत 19वीं सदी में ही हो चुकी थी, जब 1837 में चार्ल्स बैबेज पहला मैकेनिकल कंप्यूटर डिजाइन किया था। इसके बाद धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी और विकसित होती गई।
कम्प्यूटर का स्वरूप बदला और कहानी लैपटॉप तक पहुंच गई। लेकिन दुनिया का पहला लैपटॉप कब आया और किसने बनाया? आज यह बताएंगे और जानेंगे कि कैसे एक शख्स जो थाईलैंड में पैदा हुआ। फिर विश्व युद्ध शुरू हुआ तो भारत आया फिर भारत से इंग्लैंड पहुंचा और वहां से अमेरिका पहुंचा और बना दिया दुनिया का पहला लैपटॉप।
दुनिया का पहला लैपटॉप बनाने वाले शख्स की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन शख्स है जिसने बड़ी-बड़ी कम्प्यूटर मशीनों को एक छोटी सी डिवाइस में समेट दिया।
कौन है वो शख्स जिसने बनाया दुनिया का पहला लैपटॉप
दुनिया का पहला लैपटॉप बनाने वाले शख्स का नाम एडम ओसबोर्न (Adam Osborne) है। इनकी कंपनी ने ही दुनिया को पहला लैपटॉप दिया। इनका जन्म
थाईलैंड के बैंकॉक में ब्रिटिश माता-पिता के घर में हुआ था। उन्होंने अपनी जवानी का ज्यादातर समय भारत के तमिलनाडु में बिताया और 11 साल की उम्र में UK चले गए।
एडम ओसबोर्न 1960 के दशक की शुरुआत में अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद, केमिकल इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए इंग्लैंड से अमेरिका चले गए। वे स्थायी रूप से अमेरिका में बस गए और आखिरकार अमेरिकी नागरिक बन गए।
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1980 के दशक की शुरुआत में, कंप्यूटर बहुत बड़े होते थे और ऑफिस की डेस्क पर ही रखे रहते थे। ओसबोर्न एक ऐसी प्रैक्टिकल और किफायती मशीन बनाना चाहते थे जिसे लोग आसानी से साथ ले जा सकें। और इस पर काम करते हुए इन्होंने 1981 में ओसबोर्न 1 नाम का दुनिया का पहला लैपटॉप लॉन्च किया, जिसे बड़े पैमाने पर पहला कमर्शियली सफल पोर्टेबल कंप्यूटर यानी लैपटॉप माना जाता है। हालांकि इसका वजन 24.5 पाउंड था और इसे चलाने के लिए बिजली के आउटलेट की जरूरत होती थी। इसमें दो फ्लॉपी ड्राइव और एक छोटी 5-इंच की स्क्रीन थी, जो टेक्स्ट में 52×24 कैरेक्टर दिखा सकती थी (लेकिन इसमें बिट-मैप्ड ग्राफिक्स नहीं थे)।
आज के समय कितनी होती दुनिया के पहले लैपटॉप की कीमत
ऑस्बोर्न ने कंप्यूटर को $1,795 की किफायती कीमत पर बेचा और इसके साथ महंगे सॉफ्टवेयर (जैसे WordStar और SuperCalc) भी दिए, जिससे यह यात्रा करने वाले बिजनेस प्रोफेशनल्स के बीच तुरंत हिट हो गया।
1981 में Osborne 1 की शुरुआती कीमत $1,795 थी, जो आज के समय में लगभग $6,615 USD के बराबर है। अगर इसे भारतीय रुपये में बदलें तो आज इसकी कीमत 6 लाख 34 हजार रुपये होती।
और दिवालिया हो गई कंपनी
कॉर्पोरेट जगत की एक आम गलती की वजह से ऑस्बॉर्न की सफलता खत्म हो गई। 1983 की शुरुआत में, उन्होंने मीडिया के सामने दो ऐसे आने वाले मॉडलों (एक्जीक्यूटिव और विक्सन) के बारे में बढ़-चढ़कर बातें करना शुरू कर दिया, जो अभी तक रिलीज नहीं हुए थे और जो मौजूदा मॉडलों से कहीं ज्यादा बेहतर थे।
और आलम यह हुआ कि नए वर्जन के इंतजार में ग्राहकों ने तुरंत Osborne 1 खरीदना बंद कर दिया। और उनके कैश रिजर्व खत्म हो गए, वेयरहाउस में स्टॉक बिना बिके पड़ा रहा और सितंबर 1983 तक कंपनी दिवालिया हो गई।
