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भारत पर ट्रंप के 100% टैरिफ से बचाएगी नई चर्चा में आई ये ट्रेड डील, प्रतिबंध टलने की जगी उम्मीद

Published: Sun, 27 Sep 2026 09:26 PM (IST)

अमेरिका-भारत ट्रेड डील भारत को 'ग्राहम एक्ट' के तहत लगने वाले 100% टैरिफ और 'सेक्शन 301' जांच से संभावित कार्रवाई ...और पढ़ें

अमेरिका-भारत ट्रेड डील से टलेंगे 100% टैरिफ और प्रतिबंध, भारत को मिलेगी बड़ी राहत

अमेरिका-भारत ट्रेड डील से टलेंगे 100% टैरिफ और प्रतिबंध, भारत को मिलेगी बड़ी राहत

HighLights

  1. ट्रेड डील से भारत 100% टैरिफ से बच सकता है।

  2. 'सेक्शन 301' जांच में संभावित कार्रवाई से भी बचाव।

  3. रूसी तेल खरीद पर प्रतिबंधों का खतरा भी टलेगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिका-भारत ट्रेड डील भारत को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' के तहत तय किए 100% टैरिफ से बचा सकती है। साथ ही, यह डील भारत को 'सेक्शन 301' के तहत चल रही उस जांच में संभावित कार्रवाई से भी बचा सकती है जो ज्यादा कैपेसिटी को लेकर हो रही है।

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार तो देता है, लेकिन इसे लागू करना जरूरी नहीं बनाता। इससे उन्हें ट्रेड पर बातचीत करने की काफी गुंजाइश मिलती है। बातचीत से होने वाली कोई भी ट्रेड डील बिल में बताई गई टैरिफ की रकम को सीमित कर सकती है।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 'ग्राहम एक्ट' पर साइन करने के बाद से अमेरिका की ओर से और ट्रेड एक्शन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस एक्ट के तहत रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है और इस लिस्ट में भारत भी शामिल है।

रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि ग्राहम कानून का मकसद रूस की कमाई और यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता पर रोक लगाना था और यह किसी ट्रेड डील से ऊपर नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, "द्विपक्षीय टैरिफ और ट्रेड डील के मामले में, यह कानून ट्रेड डील से ऊपर नहीं है।"

ट्रेड डील में देरी से भारत पर अमेरिका की दूसरी लंबित ट्रेड कार्रवाई का खतरा भी बढ़ सकता है। इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं। हर हफ्ते जब कोई ट्रेड डील नहीं होती, तो भारत दूसरी लंबित कार्रवाई के प्रति थोड़ा और कमजोर हो सकता है। अगर ट्रेड एग्रीमेंट पहले ही हो गया होता, तो प्रतिबंधों से जुड़े कानून के पास होने के बाद भारत की स्थिति अधिक साफ होती।

हालांकि भारत सरकार का कहना है कि ट्रेड डील पर ज्यादातर बातचीत हो चुकी है, लेकिन उसका कहना है कि वह इसे तभी फाइनल करेगा जब उसे वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बढ़त की गारंटी मिले।

अमेरिका के पास जरूरत के हिसाब से मौजूदा व्यवस्थाओं में बदलाव करने की क्षमता है और उसने मिसाल के तौर पर सेक्शन 301 के तहत जबरदस्ती मजदूरी वाले मामले का जिक्र किया।

भारत पर शुरू में 12.5 प्रतिशत का ज्यादा टैरिफ लगना था, लेकिन आखिरकार उसे 10 प्रतिशत की कम दर मिली। इससे चीन, वियतनाम, थाईलैंड और फिलीपींस के मुकाबले बढ़त मिली, जिन पर 12.5 प्रतिशत की दर लागू रही।

रूसी तेल के मामले में, भारत ने संकेत दिया है कि उसकी खरीद रोकने का कोई इरादा नहीं है क्योंकि यह उसकी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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