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भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला बिल अमेरिकी संसद में पास, ट्रंप के साइन करते ही हो जाएगा लागू; किस बात का बदला के रहे ट्रंप?

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:25 AM (IST)

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक विधेयक पारित किया है जो राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने ...और पढ़ें

अमेरिकी संसद में नया बिल पास (AI फोटो)

अमेरिकी संसद में नया बिल पास (AI फोटो)

HighLights

  1. अमेरिकी हाउस ने रूसी ऊर्जा खरीदारों पर शुल्क विधेयक पारित किया

  2. राष्ट्रपति ट्रंप को 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला

  3. भारत को रूसी तेल खरीद पर अमेरिका के नए शुल्क का सामना

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक का शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देने वाला कानून 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' में पास हो गया है। इसके बाद, भारत को रूसी तेल की खरीद पर अमेरिका के नए शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
यह बिल, जो रूस, चीन और ईरान को भी निशाना बनाता है, अब ट्रंप के साइन के लिए उनके पास जाएगा। पिछले महीने सीनेट द्वारा पास किया गया 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' बुधवार शाम को 262-159 वोटों से हाउस में पास हो गया।
यह कानून ट्रंप को उन देशों पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार देगा जो रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखे हुए हैं या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

भारत के पास क्या हैं ऑप्शन?

यह बिल 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य के सपोर्ट से पास हुआ। सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसके खिलाफ वोट किया। डेमोक्रेट्स का विरोध मुख्य रूप से राष्ट्रपति को दिए जा रहे शुल्क लगाने के व्यापक अधिकारों पर केंद्रित रहा।
भारत रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के टॉप पांच खरीदारों में शामिल है और अगर ट्रंप इस अधिकार का इस्तेमाल करने का फैसला करते हैं, तो उस पर अमेरिका के व्यापक नए शुल्क लग सकते हैं। इस कानून में टॉप पांच ऊर्जा आयातकों और उन देशों पर अतिरिक्त 100% शुल्क लगाने का प्रावधान है जो रूसी कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस आयात करते हैं, या प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।

रूसी सामानों पर 500% का एकमुश्त शुल्क

यह बिल राष्ट्रपति को अमेरिका में आयात किए जाने वाले रूसी सामानों पर 500% का एकमुश्त शुल्क लगाने की भी अनुमति देता है। ऊर्जा खरीदारों को निशाना बनाने वाला अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार पांच साल बाद खत्म हो जाएगा।
अमेरिका द्वारा ये प्रस्तावित उपाय ऐसे समय पर किए जा रहे हैं, जब वाशिंगटन भारत और चीन जैसे देशों की रूसी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना चाहता है। यह बिल ऐसे समय में पास हुआ है जब यूक्रेन-समर्थक समूह कीव के लिए लगातार समर्थन बनाए रखने के लिए अमेरिकी सांसदों पर दबाव बनाने की नई कोशिशें कर रहे हैं।

'कहीं और से खरीदें तेल-गैस'

बिल पास होने के बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि "चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।" सीनेटर जीन शाहीन ने कहा कि रूस बाजार भाव से कम कीमत पर तेल बेचने के लिए "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) का इस्तेमाल कर रहा है, और इसका बड़ा हिस्सा चीन और भारत जैसे देशों को जा रहा है।
शाहीन ने कहा, "चीन रूसी तेल और गैस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, और हमें न केवल पुतिन को, बल्कि चीन को और रूसी तेल और गैस खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को बहुत कड़ा संदेश देने की जरूरत है कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।"

इस बिल के तहत रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे, साथ ही उन जहाजों पर भी प्रतिबंध लगेंगे जिन पर मॉस्को को तेल की सप्लाई पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है। इसमें ईरान पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध शामिल हैं।

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