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अगस्त में UPI से हुई ₹2982000000000 की पेमेंट, अब खत्म हो जाएंगे क्रेडिट और डेबिट कार्ड?

Published: Sat, 12 Sep 2026 12:09 AM (IST)

अगस्त में UPI ने रिकॉर्ड ₹29.82 लाख करोड़ के लेनदेन के साथ डिजिटल भुगतान बाजार पर कब्जा कर लिया है, ...और पढ़ें

अगस्त में हुई रिकॉर्ड UPI पेमेंट (AI Image)

अगस्त में हुई रिकॉर्ड UPI पेमेंट (AI Image)

HighLights

  1. अगस्त में UPI लेनदेन ₹29.82 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर।

  2. UPI की वजह से डेबिट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग घटा।

  3. RuPay क्रेडिट कार्ड अब UPI से सीधे लिंक हो रहे हैं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| एक वक्त था जब बिना फिजिकल करेंसी के किसी दुकानदार से कोई सामान खरीदना एक कल्पना थी, लेकिन आज जमाना बदल गया है। अब किराना की दुकान से लेकर रेहड़ी-पटरी वाले तक अपनी दुकान में काउंटर के पास चिपका हुआ एक छोटा-सा QR कोड मिल जाएगा। आज के समय में छोटा-बड़ा कोई भी दुकानदार भी आपसे कैश या कार्ड पेमेंट के बारे में नहीं पूछता है। ऑनलाइन शॉपिंग में भी UPI पेमेंट का ऑप्शन मिलता है।

हर किसी को UPI से भुगतान करना आसान लगता है, और अब आंकड़े भी यही बयां कर रहे हैं। UPI सिर्फ लोकप्रिय नहीं हुआ है, बल्कि उसने चुपचाप भुगतान काउंटर पर अपना कब्जा जमा लिया है और इसका सीधा असर कार्ड भुगतानों पर पड़ा है।

कितना बड़ा हो चुका है UPI?

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में UPI के जरिए रिकॉर्ड 24.51 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। Times Of India के मुताबिक यह जुलाई के 23.66 अरब लेनदेन से अधिक है और पिछले साल के अगस्त महीने की तुलना में 22% ज्यादा है।

NPCI के मुताबिक रक्षाबंधन समेत त्योहारों के मौसम ने रोजमर्रा के ट्रांसफर और छोटे उपहारों के जरिए लेनदेन की मात्रा को अतिरिक्त बढ़ावा दिया। बड़े पैमाने की बात करें तो वित्त वर्ष 2017 में UPI का सालाना लेनदेन मूल्य केवल ₹0.07 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यानी एक दशक में 4,000 गुना से अधिक की छलांग।

PIB के अनुसार इसी अवधि में UPI का सालाना लेनदेन वॉल्यूम लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। UPI अब 11 देशों में उपलब्ध है और उज्बेकिस्तान हाल ही में इससे जुड़ने वाला नया देश बना है।

तेजी से घट रहा कार्ड का इस्तेमाल

एक जमाना था जब रिच और elite class के लोगों के बीच कार्ड भुगतान का सबसे बड़ा जरिया माना जाता था लेकिन अब वहां भी UPI का बोलबाला है। जुलाई में भारत का डिजिटल मर्चेंट पेमेंट बाजार सालाना आधार पर 19.6% बढ़कर ₹11.73 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इसमें UPI की पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) हिस्सेदारी रिकॉर्ड 77.3% रही, जो एक साल पहले 74.9% थी।

इसके अलावा क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी घटकर 17.7% रह गई, जो पिछले साल 19.8% थी। डेबिट कार्ड की हिस्सेदारी भी 3.9% से घटकर 3.2% रह गई।

यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है, बल्कि कई सालों से धीरे-धीरे बन रहा था। वर्ष 2021 में कार्ड (क्रेडिट और डेबिट मिलाकर) मर्चेंट पेमेंट वॉल्यूम का 26% और मूल्य का 53% हिस्सा रखते थे, जबकि UPI की P2M हिस्सेदारी 56% थी। पांच साल बाद स्थिति बदल चुकी है। कुल भुगतान बाजार कई गुना बढ़ने के बावजूद कार्ड भुगतान काउंटर पर अपनी अधिकांश पकड़ खो चुके हैं।

डेबिट कार्ड को सबसे बड़ा झटका

वर्ल्डलाइन की 2025 रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान डेबिट कार्ड को हुआ है। देश में एक अरब से अधिक डेबिट कार्ड प्रचलन में होने के बावजूद फिजिकल स्टोर्स पर इनका उपयोग सालाना आधार पर लगभग 8% घट गया। रिपोर्ट साफ तौर पर कहती है कि अब डेबिट कार्ड का उपयोग मुख्य रूप से नकदी निकालने के लिए किया जा रहा है, न कि दुकानों पर भुगतान करने के लिए।

SBI रिसर्च के एक अलग अध्ययन में पाया गया कि UPI लेनदेन मूल्य में हर ₹1 की वृद्धि से डेबिट कार्ड लेनदेन मूल्य 14 पैसे कम हो जाता है। जब QR कोड स्कैन करने में केवल पांच सेकंड लगते हों, व्यापारी को कोई अतिरिक्त शुल्क न देना पड़ता हो, तो फिर कार्ड साथ रखने, PIN याद रखने और मशीन का इंतजार करने की जरूरत क्यों पड़े?

क्रेडिट कार्ड का क्या है मामला?

रिपोर्ट से पता चलता है कि क्रेडिट कार्ड पर खर्च अभी भी बढ़ रहा है। मई में यह महीने-दर-महीने 2.6 प्रतिशत बढ़कर 2.02 ट्रिलियन रुपये हो गया। वहीं UPI P2M खर्च सालाना आधार पर 25.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि क्रेडिट कार्ड खर्च में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। क्रेडिट कार्डों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। केवल एक महीने में 10 लाख से अधिक नए कार्ड जुड़े और कुल संख्या 12.05 करोड़ तक पहुंच गई। इसका मतलब ये है कि क्रेडिट कार्ड खत्म नहीं हो रहे हैं, बल्कि उनकी भूमिका बदल रही है।

ई-कॉमर्स में प्रति क्रेडिट कार्ड औसत मासिक खर्च लगभग ₹10,500 है, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल खरीदारी में यह करीब ₹6,300 है। कुल क्रेडिट कार्ड खर्च में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी 62% से अधिक है। बड़े और सोच-समझकर किए जाने वाले खर्च- जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्रा और महंगी खरीदारी के लिए लोग अब भी क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। दूसरी ओर छोटे, बार-बार और रोजमर्रा के लेनदेन में UPI लगभग कब्जा जमा चुका है।

UPI के भीतर मर्ज हो रहे हैं कार्ड

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कार्ड और UPI के बीच कॉम्पटीशन नहीं, बल्कि कार्ड का UPI के भीतर शामिल होना है। साल 2022 से RuPay क्रेडिट कार्ड को सीधे Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे UPI ऐप्स से जोड़ा जा सकता है। उपयोगकर्ता वही QR कोड स्कैन करता है, लेकिन भुगतान बैंक खाते के बजाय उसकी क्रेडिट लिमिट से होता है। तकनीकी रूप से यह छोटा बदलाव है, लेकिन इसका असर बड़ा है। इससे प्लास्टिक कार्ड की जरूरत कम हो जाती है, जबकि उसके पीछे मौजूद क्रेडिट प्रोडक्शन बना रहता है।

फिलहाल केवल RuPay कार्ड ही UPI से लिंक किए जा सकते हैं। Visa और Mastercard के क्रेडिट कार्ड अभी इस सुविधा का हिस्सा नहीं हैं। यही वजह है कि NPCI का नेटवर्क धीरे-धीरे वैश्विक कार्ड नेटवर्कों की हिस्सेदारी हासिल कर रहा है।

अधिकांश बैंकों ने इसका विरोध करने के बजाय इसे अपनाया है और अब वे UPI खर्च के लिए विशेष RuPay क्रेडिट कार्ड पेश कर रहे हैं। कुछ कार्ड QR भुगतान पर अतिरिक्त रिवॉर्ड भी देते हैं। अगला कदम "Credit Line on UPI" है, जिसके तहत बैंक बिना किसी फिजिकल या वर्चुअल कार्ड के सीधे UPI ऐप के जरिए प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट सुविधा दे सकेंगे।

UPI कार्डों को कम उपयोगी बना रहा है?

यदि कार्ड का मतलब वह प्लास्टिक कार्ड है जिसे आप वॉलेट में रखते हैं और मशीन पर स्वाइप करते हैं, तो UPI ने उसे रोजमर्रा के खर्च के लिए लगभग अनावश्यक बना दिया है। खासतौर पर डेबिट कार्ड अब ऐसे दिखाई देते हैं जिनका उपयोग खरीदारी से ज्यादा ATM से नकदी निकालने के लिए होता है। लेकिन क्रेडिट एक फाइनेंशियल प्रोडक्ट के रूप में अलग रास्ते पर है यह घट नहीं रहा, बल्कि अपनी भूमिका बदल रहा है। यह बड़े खर्च, यात्रा, ई-कॉमर्स और EMI की ओर बढ़ रहा है, साथ ही UPI के ऊपर सवार होकर अपनी नई भूमिका भी तलाश रहा है।

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TOI के मुताबिक SP Jain Institute of Management & Research (SPJIMR) में सूचना प्रबंधन एवं एनालिटिक्स के एसोसिएट प्रोफेसर आशीष देसाई का मानना है कि UPI का सबसे बड़ा योगदान सिर्फ भुगतान व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को बढ़ाना है। उनके अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे व्यापारियों को, जो पहले डिजिटल रूप से अदृश्य थे, एक वित्तीय पहचान प्रदान करते हैं, जिसका उपयोग क्रेडिट स्कोरिंग के लिए किया जा सकता है। वहीं हर UPI लेनदेन लोगों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव भी देता है।

देसाई के अनुसार जनधन और आधार जैसी योजनाओं के जरिए बैंक खाते खोलना वित्तीय समावेशन का केवल आधा हिस्सा था। इन खातों का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित करना दूसरा हिस्सा था और UPI ने यही कमी पूरी की है।