शुगर पॉलिसी पर दिखी पाकिस्तान की कंगाली! जिस चीनी को खरीदा उसे ही बेचकर चुकाएगा पैसे, फिर 1.08 लाख टन खरीदने की तैयारी
पाकिस्तान अपनी अस्थिर चीनी नीति के कारण लगातार आयात और निर्यात के बीच बदलाव कर रहा है। खराब योजना और ...और पढ़ें

पाकिस्तान बार-बार कर रहा चीनी का आयात-निर्यात
HighLights
पाकिस्तान ने 1.08 लाख टन आयातित चीनी का टेंडर जारी किया।
देश की अस्थिर चीनी नीति पर फिर से सवाल उठे।
बचे हुए स्टॉक से आयात और भंडारण लागत वसूलने का प्रयास।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पाकिस्तान ने करीब 1.08 लाख टन आयातित चीनी का ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इस फैसले के बाद उसकी चीनी नीति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। पाकिस्तान की शुगर पॉलिसी में बार-बार होने वाले बदलावों के लिए कमजोर मांग और सप्लाई की गलत योजना को जिम्मेदार बताया गया है। पाकिस्तान में घरेलू सप्लाई पर्याप्त होने का संकेत मिलते ही वे चीनी का एक्सपोर्ट करने की मंजूरी देता है उसके बाद कीमतें बढ़ने या कमी पैदा होने पर चीनी इंपोर्ट करने की नीति बार-बार अपनाई गई है।
आयात-निर्यात की कमजोर पाक पॉलिसी
नया टेंडर पिछले साल की डोमेस्टिक स्टॉक में कमी को दूर करने के लिए इंपोर्ट की गई 3 लाख टन चीनी के बचे हुए स्टॉक से संबंधित है। न्यूज एजेंसी IANS ने एक नई रिपोर्ट के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के इस अंतरराष्ट्रीय टेंडर को आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने मंजूरी दे दी है। अधिकारियों का कहना है कि, इस कदम से चीनी के खराब होने से पहले सरकार को आयात और स्टोरेज से जुड़ी लागत वसूलने में मदद मिलेगी।
‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया है कि, पाकिस्तान ने 2025 में 7.9 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद पाक ने 5 लाख टन तक चीनी आयात करने की मंजूरी दी। हालांकि, इनमें से करीब 3 लाख टन चीनी ही वास्तव में आयात की गई।
खर्च की भरपाई के लिए फिर करेगा निर्यात
पाकिस्तान में आयातित चीनी में से सिर्फ 1.92 लाख टन के करीब ही घरेलू बाजार में बेची जा सकी, जबकि लगभग 1.08 लाख टन चीनी सरकारी संस्था ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान (TCP) के गोदामों में अब भी मौजूद है। पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि बचे हुए स्टॉक को ग्लोबर टेंडर के माध्यम से बेचने से चीनी के इंपोर्ट और स्टोरेज पर हुए खर्च की भरपाई करने में मदद मिलेगी।
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शुगर पॉलिसी के तहत बार-बार एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के बीच बदलाव देखने को मिला है। इस फैसले ने पाकिस्तान की चीनी नीति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी हैं। लगातार हो रहे बदलावों के चलते वहां कि फाइनेंस मिनिस्ट्री भी आगे चीनी निर्यात को मंजूरी देने को लेकर सतर्क हो गई है। पाक सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और पिछले फैसलों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
