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Thums Up और Limca की कहानी: कैसे भारतीय ब्रांड्स बने कोका-कोला का हिस्सा? इस चालाकी से Parle को किया गया था मजबूर

Published: Sun, 02 Aug 2026 12:22 PM (IST)

कोका-कोला ने कैसे थम्स अप और लिम्का जैसे भारतीय ब्रांडों को खरीदा, इसकी कहानी दिलचस्प है। पार्ले ने 1977 में ...और पढ़ें

थम्स अप और लिम्का कभी भारतीय ब्रांड्स थे

थम्स अप और लिम्का कभी भारतीय ब्रांड्स थे

HighLights

  1. थम्स अप 1977 में पार्ले द्वारा लॉन्च किया गया था

  2. कोका-कोला ने 1993 में थम्स अप, लिम्का खरीदे

  3. बॉटलिंग प्लांट खरीदकर पार्ले को बेचने पर मजबूर किया

नई दिल्ली। 4 साल पहले सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड 'थम्स अप' (Thums Up) ने भारत में एक बिलियन डॉलर के ब्रांड का दर्जा हासिल कर लिया था। वहीं 2 साल पहले साल 2024 में लिम्का ब्रांड ने 2800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा पार कर लिया था। इन दोनों ब्रांड्स की मालिक आज 'द कोका-कोला कंपनी' है। मगर क्या आप जानते हैं कि कभी ये दोनों ब्रांड्स एक भारतीय कंपनी के थे। फिर कैसे इन दोनों ब्रांड्स को कोका कोला ने खरीदा? आइए जानते हैं।

कब शुरू हुआ थम्स अप?

थम्स-अप ब्रांड को सबसे पहले 1977 में पार्ले ने भारत के फिज ड्रिंक्स मार्केट में खाली जगह को भरने के लिए बनाया था। समय के साथ इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। जब 1974 में फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट (FERA) पास हुआ, जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारत में अपने कामकाज में अपनी हिस्सेदारी कम करनी थी, तो कोका-कोला (जो 1950 के दशक से भारत में थी) ने भारतीय बाजार छोड़ दिया।
ऐसा तब हुआ जब उससे उसका फॉर्मूला बताने के लिए कहा गया।

टॉप फिजी ड्रिंक बना थम्स अप

कोका कोला के जाने के बाद इसी खाली जगह का फायदा उठाकर रमेश चौहान ने 'थम्स अप' लॉन्च किया और कैम्पा कोला व डबल सेवन जैसे ब्रांड्स को टक्कर दी। मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन के दम पर, 'थम्स अप' भारत का टॉप फिजी ड्रिंक ब्रांड बन गया।

नियमों में बदलाव के बाद भारतीय बाजार में कोका कोला ने 1993 में फिर से भारत में एंट्री की। उस समय थम्स अप का मार्केट शेयर लगभग 85 प्रतिशत था। कोक के सामने अब दो बड़े कॉम्पिटिटर थे - थम्स अप और पेप्सी। पेप्सी का मुकाबला करने के लिए, उसने 1993 में पार्ले बिस्लेरी से थम्स अप और दूसरे कई ब्रांड खरीद लिए, जिनमें लिम्का भी शामिल था। उस समय भारत के सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में पार्ले की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत थी।
तब कोका-कोला ने चौहान भाइयों से एरेटेड ड्रिंक्स का पूरा पोर्टफोलियो खरीद लिया था, जिसमें गोल्ड स्पॉट भी शामिल था।

चालाकी ने कोका-कोला ने खरीदे ब्रांड्स

कोका-कोला ने खास रणनीति के तहत कोका-कोला ने थम्स अप के अधिकतर बॉटलिंग प्लांट अपने कब्जे में लेकर उसकी सप्लाई रोक दी, जिससे मजबूर होकर पार्ले को तब 6 करोड़ डॉलर में अपने ब्रांड बेचने पड़े।
कोका-कोला सीधे तौर पर थम्स अप को नहीं हरा पा रही थी, इसलिए उसने थम्स अप की बोतलें तैयार करने वाले अधिकतर फ्रेंचाइजी बॉटलिंग प्लांट खरीद लिए। बॉटलिंग यूनिट्स बिक जाने के कारण पार्ले के पास अपनी ड्रिंक्स की पैकेजिंग और सप्लाई के लिए साधन नहीं बचे।

बाजार में मांग होने के बावजूद माल की भारी कमी हो गई। चारों तरफ से घिरने के बाद पार्ले ग्रुप को मजबूरन 1993 में थम्स अप, लिम्का, गोल्ड स्पॉट, सिट्रा और माजा का पूरा पोर्टफोलियो कोका-कोला को लगभग 6 करोड़ डॉलर में बेचना पड़ा।

थम्स अप को बेचा नहीं, अपना बनाया

शुरुआत में माना जा रहा था कि कोका-कोला अपने मुख्य वैश्विक ब्रांड 'कोक' को आगे बढ़ाने के लिए थम्स अप को बंद कर देगी। लेकिन जब उसे अहसास हुआ कि भारतीय उपभोक्ताओं का थम्स अप के स्वाद के साथ एक सांस्कृतिक जुड़ाव है, तो उन्होंने इसे बंद करने के बजाय एक मजबूत ब्रांड के रूप में जीवित रखा, जो आज भी बरकरार है।

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