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PF के ₹2.5 करोड़ वापस मांग बैठा EPFO, कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला; कहा- कर्मचारी नहीं, कंपनी पर करो कार्रवाई!

Published: Mon, 15 Jun 2026 07:47 PM (IST)

EPFO High Court verdict: ईपीएफओ ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹2.5 करोड़ PF राशि वापस मांगी थी, जिस पर तेलंगाना ...और पढ़ें

EPFO की रिकवरी कार्रवाई पर हाई कोर्ट सख्त, रिटायर्ड कर्मचारी से पैसा मांगना बताया गलत

EPFO की रिकवरी कार्रवाई पर हाई कोर्ट सख्त, रिटायर्ड कर्मचारी से पैसा मांगना बताया गलत

HighLights

  1. EPFO ने सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹2.5 करोड़ PF मांगे

  2. तेलंगाना हाई कोर्ट ने रिकवरी नोटिस रद्द किया

  3. नियम उल्लंघन पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

नई दिल्ली| कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ (EPFO High Court verdict) को तेलंगाना हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने साफ कहा है कि रिटायर हो चुके कर्मचारी से उसके प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ (PF) का पैसा वापस नहीं मांगा जा सकता, भले ही उस रकम के भुगतान में कंपनी की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ हो। कोर्ट ने EPFO द्वारा जारी ₹2.5 करोड़ की रिकवरी नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि,

अगर किसी तरह का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई कंपनी और उसके PF ट्रस्ट के खिलाफ की जानी चाहिए, कर्मचारी के खिलाफ नहीं।"

क्या है पूरा मामला?

यह मामला रिटायर्ड कर्मचारी जेवी नृपेंद्र राव से जुड़ा है, जो 2023 में रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के समय उन्हें अपने PF खाते से ₹2.5 करोड़ मिले थे। इसके अलावा करीब ₹70 लाख की राशि भी उन्हें मिलनी थी, लेकिन वह रकम यस बैंक (YES Bank) के बॉन्ड्स में फंसी हुई थी। बैंकिंग और नियामकीय कार्रवाई के कारण इन बॉन्ड्स पर रोक लग गई थी, जिसके चलते भुगतान नहीं हो सका।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने 1 मार्च 2023 से अपने PF ट्रस्ट की 'एक्जेम्प्टेड' यानी छूट प्राप्त स्थिति छोड़ दी। नियमों के मुताबिक, किसी PF ट्रस्ट के छूट का दर्जा खत्म होने के बाद उसे अपने पास मौजूद पूरी PF राशि EPFO को ट्रांसफर करनी होती है। EPFO का आरोप था कि कंपनी ने ऐसा करने के बजाय 21 जुलाई 2023 को राव को ₹2.5 करोड़ का भुगतान कर दिया, जो EPF कानून के प्रावधानों के खिलाफ था।

इसके बाद 17 फरवरी 2025 को EPFO ने राव को नोटिस भेजकर सात दिनों के भीतर ₹2.5 करोड़ की रकम 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने को कहा। EPFO का कहना था कि यह भुगतान नियमों के अनुरूप नहीं था, क्योंकि कंपनी अपना एक्जेम्प्शन पहले ही सरेंडर कर चुकी थी।

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राव ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा

इस नोटिस से परेशान होकर राव ने तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत में कहा कि उन्हें मिली राशि उनके अपने PF योगदान की है और कर्मचारी होने के नाते उस पर उनका वैध अधिकार है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि EPFO के पास ऐसा कोई कानूनी अधिकार नहीं है जिसके तहत वह उनसे यह पैसा वापस मांग सके। राव ने यह भी बताया कि,

नोटिस जारी करने से पहले उन्हें न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला। इसलिए यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।"

EPFO ने कोर्ट को क्या बताया?

सुनवाई के दौरान EPFO ने अदालत को बताया कि कंपनी का PF ट्रस्ट 1981 से एक्जेम्प्टेड श्रेणी में था और उसने मार्च 2023 में यह दर्जा छोड़ दिया था। EPFO ने दलील दी कि कानून के अनुसार कंपनी को PF की पूरी राशि EPFO को ट्रांसफर करनी चाहिए थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।हालांकि, न्यायमूर्ति नागेश भीमपाका ने EPFO की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि,

EPF कानून एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देना है। इस कानून के तहत PF फंड के रखरखाव, नियमों के पालन और एक्जेम्प्शन खत्म होने पर राशि ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी नियोक्ता यानी कंपनी और उसके ट्रस्ट की होती है, कर्मचारी की नहीं।"

हाई कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि EPFO कोई ऐसा स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं दिखा पाया, जो केवल कंपनी की कथित गलती के आधार पर कर्मचारी से PF की राशि वापस लेने की अनुमति देता हो। अदालत ने यह भी कहा कि राव के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने या मिलीभगत का कोई आरोप नहीं है।

कोर्ट ने EPFO के रिकवरी नोटिस को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि,

अगर उसे लगता है कि EPF कानून का उल्लंघन हुआ है तो वह कंपनी और उसके PF ट्रस्ट के खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकता है।"

हालांकि अदालत ने इस बात पर कोई राय नहीं दी कि कंपनी ने वास्तव में कानून का उल्लंघन किया या नहीं।

इस फैसले को PF खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि नियोक्ता की कथित गलती का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता और किसी भी रिकवरी कार्रवाई से पहले कानूनन उचित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

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