Tata Group में 'पावर प्ले': टाटा संस के बोर्ड से हो सकती है वेणु श्रीनिवासन की छुट्टी, 8 मई को बड़ा फैसला!
टाटा ग्रुप में अंदरूनी कलह बढ़ गई है, जहां टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस के बोर्ड में अपनी भागीदारी की समीक्षा ...और पढ़ें

टाटा ट्रस्ट्स की 8 मई को अहम बैठक

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। टाटा ग्रुप (Tata Group) में चल रही अंदरूनी कलह में एक नया मोर्चा खुल गया है। ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के सबसे बड़े हिस्सेदार टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts Crisis) ने, टाटा संस के बोर्ड में अपने प्रतिनिधित्व (Representation) की समीक्षा करने का फैसला किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि ग्रुप के बढ़ते मतभेदों के बीच, टाटा ट्रस्ट्स के इस फैसले का नतीजा यह हो सकता है कि उद्योगपति और टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन को टाटा संस के बोर्ड से हटाने की कोशिश हो सकती है।
दो ट्रस्टीज के बयानों की चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने 8 मई को होने वाली अपनी बैठक के एजेंडे में एक प्रस्ताव शामिल किया है, जिसमें टाटा संस के बोर्ड में अपने नॉमिनीज को रीएसेस किया जाएगा। एजेंडा में ट्रस्ट के दो वाइस-चेयरमैन, विजय सिंह और श्रीनिवासन के हालिया बयानों का भी जिक्र है, जो असहजता की वजह बन गए हैं।
उनके बयानों को टाटा संस की लिस्टिंग की वकालत के तौर पर देखा जा रहा है। इसीलिए टाटा ट्र्स्ट्स की लिस्टिंग पर ट्रस्ट की पॉजिशन और उसके नॉमिनीज के रुख के बीच तालमेल के लिए एक रिव्यू जरूरी माना जा रहा है।
क्यों शुरू हुई हलचल?
ट्रस्टों के दो वाइस चेयरमैन में से, विजय सिंह को पिछले साल टाटा संस के बोर्ड सदस्य के तौर पर दोबारा नियुक्त नहीं किया गया था, जिससे ऐसी हलचल मच गई जो अब भी जारी है।
बैठक के एजेंडा में टाटा संस बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधित्व की समीक्षा, दोनों उपाध्यक्षों द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर चर्चा के अलावा और SV & Co की अधिवक्ता कात्यायनी अग्रवाल द्वारा चैरिटी कमिश्नर से 'स्थायी ट्रस्टियों' के मामले में की गई शिकायत पर चर्चा भी शामिल है।
टाटा संस की लिस्टिंग है बहस की वजह
विवाद की जड़ में एक लंबे समय से चली आ रही बहस है कि क्या टाटा संस को प्राइवेट कंपनी ही बने रहना चाहिए या पब्लिक लिस्टिंग करानी चाहिए। विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ने हाल के पब्लिक बयानों में लिस्टिंग के फायदों पर बात की है, जबकि चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व में ज्यादातर लोगों की राय ग्रुप के मौजूदा प्राइवेट स्ट्रक्चर को बनाए रखने के पक्ष में है।
टाटा ट्रस्ट्स का रुख है बरकरार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस के एक अनलिस्टेड कंपनी के तौर पर दर्जे का पूरी मजबूती से समर्थन करना जारी रखे हुए है। कुछ असहमति भरी आवाज़ों के बावजूद, अधिकतर ट्रस्टी मौजूदा प्रस्ताव के पक्ष में हैं। विचारों में यह मतभेद सीमित ही है और इसने इस फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए किसी औपचारिक कदम का रूप नहीं लिया है।
