भारतीय बैंकों के लिए बड़ी राहत की बात: तिजोरियों में 127 अरब डॉलर की विदेशी करेंसी, कैश की उपलब्धता हुई बेहतर
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा है कि विशेष जमा योजना के तहत भारतीय बैंकों द्वारा जुटाए गए 127 अरब डॉलर ...और पढ़ें

बैंकों को मिली बड़ी राहत
HighLights
एसएंडपी ने 127 अरब डॉलर FCNR-B जमा को बड़ी राहत बताया
इससे बैंकों की फाइनेंसिंग स्थिति सुधरी, नकदी की उपलब्धता बढ़ी
आरबीआई ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
एजेंसी, नई दिल्ली। वित्तीय शोध और साख निर्धारित करने वाली एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी डॉलर आकर्षित करने के लिए विशेष जमा योजना के तहत जुटाई गई 127 अरब डॉलर की राशि भारतीय बैंकों के लिए ‘बड़ी राहत’ है।
इससे फाइनेंसिंग की तंग स्थिति आसान हुई है और नकदी की उपलब्धता बढ़ी है। बैंकों ने आठ जून से 31 अगस्त, 2026 के बीच विदेशी मुद्रा प्रवासी-बैंक (एफसीएनआर-बी) खातों के जरिये रिकॉर्ड 127 अरब डॉलर की जमा राशि जुटाई।
बैंकों को मिली बड़ी राहत
एसएंडपी ने कहा कि यह राशि 31 मार्च, 2026 तक बैंकों में जमा राशि का करीब 4.5 प्रतिशत है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, ‘‘भारतीय बैंकों को इससे बड़ी राहत मिली है। अनुकूल दरों ने देश के प्रवासी समुदाय को बड़ी मात्रा में जमा राशि वापस भारत भेजने के लिए प्रेरित किया। हम इसे व्यापक रूप से सकारात्मक मानते हैं।’’
एसएंडपी ने कहा, ‘‘इससे वित्तपोषण की तंग स्थिति सुगम हुई है। पिछले चार साल से कर्ज वृद्धि, जमा वृद्धि से अधिक रही है।’’
एफसीएनआर (बी) जमाओं की अवधि 3-5 साल
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए जून की शुरुआत से अगस्त के बीच इन तीन से पांच साल की अवधि वाली जमाओं की मूल राशि से जुड़ी जोखिम लागत को स्वयं उठाया है। इससे बैंकों को ऐसे अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की सुविधा मिली।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की ऋण विश्लेषक गीता चुघ ने कहा, ‘‘एफसीएनआर (बी) जमाओं की अवधि तीन से पांच साल है। इससे बैंकों की वित्तपोषण की स्थिति में सुधार होगा और परिसंपत्ति-देनदारी की अवधि के अंतर को पाटने में मदद मिलेगी।’’
फाइनेंसिंग और लायबिलिटी अवधि में सुधार
चुघ ने कहा कि बैंकों की कुल परिसंपत्तियां इन खातों के जरिये जुटाई गई 127 अरब डॉलर की राशि से भी अधिक बढ़ सकती हैं। इसका कारण बैंक ग्राहकों को अपनी जमा राशि के एवज में अधिक नकदी उधार लेने और उसे एफसीएनआर (बी) खातों में रखने की अनुमति दे रहे हैं। एसएंडपी ने कहा कि एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने का सबसे स्पष्ट लाभ नकदी की उपलब्धता के स्तर पर हुआ है।
भारत में बैंक ऊंचे कर्ज-जमा अनुपात और जमा जुटाने के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच काम कर रहे हैं। उसने कहा, ‘‘एफसीएनआर (बी) के जरिये आई राशि इस बाधा को कम करती है और मध्यम अवधि के लिए पर्याप्त वित्तपोषण उपलब्ध कराती है। इन जमाओं की अवधि तीन से पांच साल है, जिससे वित्तपोषण और देनदारी की अवधि में सुधार हुआ है।’’
