नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अर्थव्यवस्था की कमजोर पड़ती रफ्तार, नरम महंगाई दर और वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती जैसे कारणों को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चुनाव से पहले होने वाली समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है, 'हम अप्रैल की बैठक में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद करते हैं। आर्थिक गतिविधियों में लगातार आ रही कमजोरी, नरम महंगाई दर और ग्लोबल इकॉनमी की सुस्त पड़ती रफ्तार के साथ फेडरल रिजर्व का नरम रवैया इस का आधार बन सकता है।'

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 2-4 अप्रैल को होनी है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के अंत तक महंगाई के आरबीआई के मीडियम टर्म टारगेट से नीचे रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज एजेंसी ने इस साल आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद जताई है। एजेंसी के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में भारत की जीडीपी 7.1 फीसद रहने की उम्मीद है जबकि 2020 में इसके 7.5 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया है।

गौरतलब है कि खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ब्याज दरों पर फैसला करता है।

फरवरी में खुदरा महंगाई दर मामूली रूप से बढ़कर 2.6 फीसद रही है। जुलाई 2018 से लेकर जनवरी 2019 के बीच लगातार महंगाई में गिरावट आई है।

पिछली बैठक में अप्रत्याशित रूप से आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा करते हुए इसे 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसद कर दिया था।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक रुख को ''सख्त'' से बदलकर ''सामान्य/न्यूट्रल'' कर दिया है।

नीतिगत रुख में बदलाव किए जाने के बाद ही माना जा रहा था कि आरबीआई आगे भी ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।  

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Posted By: Abhishek Parashar

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