नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। जनवरी के आईआईपी और फरवरी के महंगाई के आंकड़े यह तय करेंगे कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती करेगा या नहीं।

11 अप्रैल को शुरू होने जा रहे चुनावों से पहले 5 अप्रैल को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक तय है, जिसमें ब्याज दरों को लेकर फैसला किया जाना है।

इससे पहले बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की थी, जिसके बाद रॉयटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने अगली बैठक में भी ब्याज दरों में कटौती किए जाने का अनुमान लगाया था।

पोल में अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना था कि आम चुनाव से पहले होने वाली आरबीआई की बैठक में ब्याज दरों में फिर से कटौती की जा सकती है।

पिछली बैठक में अप्रत्याशित रूप से आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा करते हुए इसे 6.50 फीसदी से घटाकर 6.25 फीसद कर दिया था।

इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने मौद्रिक रुख को ''सख्त'' से बदलकर ''सामान्य/न्यूट्रल'' कर दिया है। नीतिगत रुख में बदलाव किए जाने के बाद ही माना जा रहा था कि आरबीआई आगे भी ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक जनवरी में खुदरा महंगाई दर कम होकर 2.05 फीसद रही है, जो दिसंबर में 2.11 फीसद थी। वहीं दिसंबर में आईआईपी ग्रोथ रेट 2.4 फीसद रही, जो नवंबर में 0.3 फीसद थी।

दिसंबर महीने में आईआईपी में शानदार सुधार देखने को मिला था।

आरबीआई ने महंगाई के लिए 4 फीसद (+- दो फीसद) का लक्ष्य रखा है। ईंधन की कीमतों में गिरावट से देश की खुदरा महंगाई दर दिसंबर में घटकर 2.19 फीसद हो गई। नवंबर में यह 2.33 फीसद थी। पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर आरबीई के तय लक्ष्य से काफी नीचे रही है।

ब्याज दरों को तय करने वक्त आरबीआई खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है।

अगर आज आने वाले दोनों ही आंकड़े उम्मीद के मुताबिक रहते हैं, तो चुनाव के पहले आरबीआई एक बार फिर से ब्याज दरों में कटौती की राहत दे सकता है, जिसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा।

हाल ही में एसबीआई ने कर्ज की दरों को आरबीआई के रेपो रेट से जोड़ दिया है। एसबीआई की यह पहल एक लाख रुपये से अधिक की कर्ज के लिए है और इसका फायदा यह होगा कि जैसे ही आरबीआई दरों में कटौती करेगा, बैंक की तरफ से दी जाने ब्याज दर तत्काल प्रभाव से कम हो जाएंगी।

गौरतलब  है कि दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बड़ा झटका लगा है। दिसंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े आने के बाद सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी अनुमान को घटाकर 7 फीसद कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 7.2 फीसद का था।

भारत ने यह अनुमान वैसे समय में घटाया है, जब लगातार दूसरी तिमाही में जीडीपी में गिरावट आई है। हालांकि, इस कटौती के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

जीडीपी में आई गिरावट के बाद माना जा रहा है कि अगली समीक्षा बैठक में आरबीआई का पूरा फोकस महंगाई की बजाए ग्रोथ पर होगा।

यह भी पढ़ें: फिर मिलेगी राहत, अगली बैठक में ब्याज दरों को घटा सकता है RBI : रॉयटर्स पोल

Posted By: Abhishek Parashar

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप