RBI की चेतावनी: वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
RBI ने वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता को अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। ...और पढ़ें

RBI ने वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल को चुनौती बताया।
HighLights
RBI ने वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल को चुनौती बताया।
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, पर महंगाई बढ़ने का जोखिम।
ब्याज दरें बढ़ाने से पहले महंगाई पर स्पष्टता का इंतजार।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। RBI ने भी कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती है। RBI ने बुधवार को पिछली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में सभी सदस्यों के विचारों का आकलन जारी किया है, जिसमें उक्त चेतावनी दी गई है। एमपीसी की बैठक 3-5 अगस्त 2026 तक चली थी, जिसमें रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करने का फैसला किया गया था। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई सदस्यों ने कच्चे तेल बाजार की अस्थिरता को प्रमुख चुनौती के रूप में रेखांकित किया है।
समिति ने कहा कि 2026 में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य मुख्य तौर पर शेयर बाजार में बार-बार होने वाले उतार-चढाव और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बने रहने वाला रहेगा। पश्चिम एशिया में अस्थायी युद्धविराम से जो राहत मिली थी वह दोबारा संघर्ष शुरु होने के साथ समाप्त हो गई है।
दुनिया के लिए नकारात्मक स्थिति
इस क्षेत्र में जारी संघर्ष, अस्थिर तेल कीमतें, मुद्रास्फीति के बढ़ने की आशंका, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर सार्वजनिक वित्त (अमेरिका, यूरोपीय संघ आदि पर बढ़ते कर्ज की स्थिति) पूरी दुनिया के लिए एक नकारात्मक स्थिति बना रहे हैं। इसके साथ ही ऊर्जा कीमतें और सप्लाई चेन की स्थिति भी ठीक नहीं है।
एमपीसी सदस्यों ने कहा है कि वैश्विक तेल कीमतों में जारी अनिश्चितता से निकट भविष्य का अंदाजा लगाना मुश्किल है। कच्चे तेल की स्थिति के लिए कई सदस्यों ने प्रमुख तौर पर पश्चिम एशिया संघर्ष को ही कारक बताया है। कच्चा तेल किसी भी अचानक संघर्ष बढ़ोतरी से फिर बढ़ सकता है।
ब्याज दर बदलने से पहले महंगाई पर अधिक स्पष्टता इंतजार करना ठीक
बैठक में RBI गवर्नर कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊंची अनिश्चितता और अनियमित मानसून के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है और 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करना इसकी मजबूती बताती है। महंगाई बढ़ी है लेकिन यह आपूर्ति पक्ष (खाद्य व ईंधन) तक सीमित है। इसलिए ब्याज दर को बदलने से पहले मुद्रास्फीति के मार्ग पर अधिक स्पष्टता का इंतजार करना बेहतर रहेगा।
महंगाई व्यापक स्तर पर बढ़ी तो बढ़ानी पड़ेगी ब्याज दर
RBI गवर्नर ने खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के जोखिमों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इन जोखिमों के कारण महंगाई व्यापक स्तर पर बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा, "अगर इन जोखिमों के वास्तविक रूप लेने के संकेत मिलते हैं तो नीतिगत रुख को सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है।"
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