राजस्थान का ये गांव बना रहा किसानों को करोड़पति! बंजर जमीन में उगा रहे ‘सोना’, ले रहे फार्महाउस-लग्जरी गाड़ियों का मजा
राजस्थान का गुढ़ा खुमावतन गांव 'मिनी इजरायल' बन गया है, जहां किसान आधुनिक इजरायली तकनीकों जैसे पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई से बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर करोड़पति बन रहे हैं।

राजस्थान का ये गांव बना रहा किसानों को करोड़पति!
HighLights
गुढ़ा खुमावतन गांव आधुनिक खेती से बना 'मिनी इजरायल'।
इजरायली तकनीक, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई से बंजर जमीन उपजाऊ।
वर्षा जल संरक्षण से 500 किसान बने करोड़पति, लग्जरी जीवन।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: जयपुर के पास एक ऐसा गांव है, जहां खेती सिर्फ गुजर-बसर का जरिया नहीं, बल्कि करोड़ों की कमाई का रास्ता बन गई है। कभी बंजर जमीन और पानी की कमी से जूझने वाले इस गांव के किसान आज आधुनिक तकनीक की मदद से लाखों रुपये कमा रहे हैं। राजस्थान के गुढ़ा खुमावतन गांव को इसी वजह से ‘करोड़पति किसानों का गांव’ और ‘मिनी इजरायल’ कहा जाता है। यहां खेती का तरीका ऐसा है कि कम पानी में भी किसान अपनी जमीन से शानदार पैदावार ले रहे हैं।
इजरायल की तकनीक ने बदली किसानों की किस्मत
गुढ़ा खुमावतन गांव की खासियत यहां अपनाई गई आधुनिक खेती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के किसानों ने इजरायल से जुड़ी कृषि तकनीकों से प्रेरणा लेकर पॉलीहाउस और संरक्षित खेती को अपनाया। पॉलीहाउस में फसलों को मौसम के असर से बचाकर उगाया जाता है, जिससे बेहतर उत्पादन और फसल की गुणवत्ता हासिल करने में मदद मिलती है।
करीब 10-12 साल पहले तक इस गांव के किसान सिर्फ पारंपरिक खेती पर निर्भर थे और इलाके में पानी की भारी किल्लत थी। जमीन के 500 फीट नीचे पानी तो है, लेकिन वह भी पूरी तरह खारा। इस बंजर तस्वीर को किसान खेमाराम ने बदला। इजरायल की कृषि तकनीक देखकर लौटने के बाद, उन्होंने गांव में अपना पहला पॉलीहाउस लगाया और महज तीन महीने में 13 लाख रुपये की शिमला मिर्च उगाकर कमाल कर दिया। पानी की समस्या से निपटने के लिए अब पूरे गांव में 'फार्म पॉन्ड' (जलकुंड) बनाए गए हैं। बारिश के दिनों में इन कुंडों में पानी जमा किया जाता है और इसी संरक्षित वर्षा जल को यहां के किसान 'अमृत' की तरह इस्तेमाल करते हैं।
बारिश का पानी बचाकर करते हैं सिंचाई
राजस्थान में पानी की कमी खेती के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन गुढ़ा खुमावतन के किसानों ने पानी का बेहतर इस्तेमाल करके इस समस्या से निपटने का रास्ता निकाला है। यहां बारिश के पानी को संरक्षित करने और ड्रिप इरिगेशन यानी बूंद-बूंद सिंचाई जैसी तकनीकों पर जोर दिया जाता है।
ड्रिप सिंचाई में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे पानी की बर्बादी कम करने और फसलों को जरूरत के मुताबिक सिंचाई देने में मदद मिलती है। आधुनिक खेती और पानी के बेहतर प्रबंधन ने ऐसी जमीन पर भी उत्पादन की संभावनाएं बढ़ाई हैं, जहां खेती करना कभी मुश्किल माना जाता था।
वहां के एक किसान का कहना है कि अब सरकार ने पॉली हाउस के लिए सब्सिडी दी है। पूरे गांव में करीब 1200 नए पॉली हाउस लगाए जाने का टार्गेट दिया है। वे बताते हैं, कि उनके पास 4 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन थी। यानी 18 बीघा उनके हिस्से में आई थी। उनके पास 10-20 लाख का कर्जा था। अब वे 6 एकड़ में अरबों रुपये कमाना चाहता हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई दूसरे देशों की यात्रा की है, वहां की तकनीक देखी है। थाईलैंड में हाइड्रोपोनिक, एक्वापोनिक तकनीक देखकर आए।
करीब 500 किसानों के करोड़पति होने का दावा
गुढ़ा खुमावतन की चर्चा इसकी खेती के साथ-साथ किसानों की बदली आर्थिक स्थिति के लिए भी होती है। वहां के एक किसान के साथ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गांव के करीब 500 किसान करोड़पति हैं। उनके पास फॉर्च्यूनर, हैरयर और कीया जैसी गाड़ियों के साथ आलीशान फार्महाउस हैं, जिनकी सुविधाएं किसी बड़े शहर की शानदार कोठी से कम नहीं बताई जातीं। इसके साथ ही इस गांव के एक किसान बाबूलाल बताते हैं कि खेती से उनकी कमाई पेट्रोल पंप से ज्यादा है।
