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पाक सरकार के फैसले को उनके ही लोगों ने किया मानने से इंकार! PSMA ने सरकार को दी चीनी बेचकर 70 करोड़ डॉलर कमाने की सलाह

Published: Tue, 15 Sep 2026 06:45 PM (IST)

पाकिस्तान में चीनी निर्यात नीति को लेकर सरकार और उद्योग के बीच मतभेद गहरा गया है। सरकार ने 2 लाख ...और पढ़ें

PSMA ने खारीज किया पाक सरकार का फैसला

PSMA ने खारीज किया पाक सरकार का फैसला


HighLights

  1. सरकार ने 2 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी।

  2. PSMA ने 10 लाख टन निर्यात की मांग की, बताया अपर्याप्त।

  3. अतिरिक्त चीनी से 70 करोड़ डॉलर विदेशी मुद्रा कमाई संभव।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीनी की कमी और बढ़ती कीमतों की चर्चा है, लेकिन पाकिस्तान अपनी शुगर पॉलिसी को लेकर अलग ही परेशान है। वो लगातार चीनी का आयात-निर्यात को लेकर कंफ्यूज है। अब आलम ये है कि चीनी निर्यात को लेकर सरकार और उद्योग के बीच मतभेद सामने आ गया है। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन ने अपनी ही सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ 2 लाख टन अतिरिक्त चीनी के एक्सपोर्ट को मंजूरी दी है, लेकिन पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने इस फैसले को अपर्याप्त बताते हुए कम से कम 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग की है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं अनुसंधान प्रभाग ((NFSM) ने अतिरिक्त चीनी के 2 लाख मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति से जुड़ा प्रस्ताव ECC के सामने रखा था। समिति ने स्टीयरिंग कमेटी ऑन शुगर की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए निर्यात को मंजूरी दी। साथ ही घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय लागू रखने का फैसला किया गया।

सोमवार को हुई शुगर एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में शामिल चीनी उद्योग के सभी प्रतिनिधियों ने सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया। PSMA का कहना है कि 31 अगस्त 2026 तक पाकिस्तान में चीनी का भंडार लगभग 26 लाख टन से अधिक था, जो घरेलू जरूरतों की तुलना में काफी ज्यादा है।

PSMA ने दी सरकार को विदेशी मुद्रा कमाने की सलाह

PSMA का कहना है कि देश में हर महीने औसतन 5.60 लाख टन चीनी की खपत होती है। 15 नवंबर 2026 तक बची लगभग ढाई महीने की अवधि के लिए करीब 14 लाख टन चीनी की आवश्यकता होगी। इस आधार पर उद्योग का अनुमान है कि 2026-27 के नए क्रशिंग सीजन की शुरुआत के समय भी देश के पास करीब 12.5 लाख टन चीनी अतिरिक्त रहेगी।

PSMA का दावा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इस अतिरिक्त चीनी के निर्यात से पाकिस्तान को 60 से 70 करोड़ डॉलर तक की विदेशी मुद्रा आय हो सकती है। उद्योग का यह भी कहना है कि 2026-27 के क्रशिंग सीजन में गन्ने की रिकॉर्ड फसल होने की संभावना है और चीनी उत्पादन 80 लाख टन से अधिक रह सकता है।

PSMA ने सरकार पर लगाए आरोप

पाकिस्तानी शुगर एसोशिएशन का कहना है कि केवल 2 लाख टन निर्यात की अनुमति उद्योग की वास्तविक स्थिति को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से तत्काल कम से कम 10 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग की है। उनका तर्क है कि निर्यात पर प्रतिबंध या सीमित अनुमति से गन्ना किसानों और चीनी उद्योग दोनों को नुकसान होगा, जबकि देश विदेशी मुद्रा अर्जित करने के एक बड़े अवसर से भी वंचित रह जाएगा।

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उद्योग ने यह आरोप भी लगाया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय ने चीनी मिलों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों को स्वीकार नहीं किया और उनकी बात को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इसके अलावा, उद्योग प्रतिनिधियों ने दावा किया कि सरकार द्वारा आयातित चीनी की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के पोर्टल बंद कर दिए गए थे, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ीं। उनका कहना है कि चीनी की कीमतों में गिरावट आने के बाद ही इन पोर्टलों को दोबारा खोला गया।