कौन है चंदूकाका सराफ ज्वेल्स, जो मुगल दौर से बेच रहे गहने; एक दुकान से कमाते हैं करोड़ों! दिलचस्प है कहानी
भारत की सबसे पुरानी ज्वेलरी कंपनी (Oldest Jeweller in India) चंदूकाका सराफ ज्वेल्स है, जिसकी शुरुआत 1827 में हुई थी। आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं...

कौन है चंदूकाका सराफ ज्वेल्स?
HighLights
चंदूकाका सराफ ज्वेल्स की शुरुआत 1827 में बारामती से हुई।
यह 199 साल पुराना ब्रांड अब 19 स्टोर्स तक फैला है।
कंपनी का वार्षिक रेवेन्यू ₹4,190 करोड़ तक पहुंच गया है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत में ज्वेलरी खरीदना सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक परंपरा है। लेकिन सोचिए, कोई ज्वेलरी कारोबार करीब 199 साल से लगातार चल रहा हो और आज भी नई पीढ़ी के ग्राहकों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हो। महाराष्ट्र से निकला चंदूकाका सराफ (chandukaka saraf) ऐसा ही नाम है, जिसकी शुरुआत 1827 में हुई थी।
1827 में बारामती से शुरू हुआ सफर
चंदूकाका सराफ ज्वेल्स की नींव महाराष्ट्र के बारामती में रखी गई थी। शुरुआत छोटे स्तर के सोने-चांदी के कारोबार से हुई। समय के साथ परिवार की कई पीढ़ियां इस कारोबार से जुड़ती गईं और ग्राहकों के साथ भरोसे का रिश्ता मजबूत होता गया। बाद में बारामती में पहला ज्वेलरी स्टोर स्थापित हुआ और यही कारोबार आगे चलकर बड़े ज्वेलरी रिटेल ब्रांड में बदल गया। चंदूकाका सराफ ज्वेल्स की शुरुआत सन 198 साल पहले सन 1827 में हुई थी। यानी ये कंपनी मुगल काल से भी पुरानी है।
एक दुकान से 19 स्टोर्स तक
करीब दो सदियों में कारोबार ने लंबा सफर तय किया है। आज चंदूकाका सराफ के महाराष्ट्र और कर्नाटक में 19 स्टोर्स हैं। बता दें कि इनमें बारामती, बारामती एमआईडीसी, पुणे - चंदननगर, पुणे - हड़पसर, अकलुज, संगमनेर, नासिक, अहिल्यानगर, पंढरपुर, सोलापुर, फलट, इंदापुर, पनवेल, बीड, धुले और नाटेपुते शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इसके कारोबार से 1,000 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं।
हजारों करोड़ का कारोबार
चंदूकाका सराफ की पैरेंट कंपनी चंदूकाका सराफ एंड संस प्राइवेट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2024-25 में करीब ₹4,190 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। यानी जिस कारोबार की शुरुआत करीब दो शताब्दी पहले एक छोटे स्तर से हुई थी, वह आज हजारों करोड़ के कारोबार में बदल चुका है।
आज किसके हाथ में है कमान
आज चंदूकाक सराफ ज्वेल्स के चेयरमैन किशोरकुमार जिनदत्त शाह और नेहा किशोरकुमार शाह इसकी डायरेक्टर हैं। वहीं सम्यक किशोरकुमार शाह कंपनी के एमडी हैं।
अब नई पीढ़ी के हिसाब से बदल रहा कारोबार
कंपनी अब सिर्फ पारंपरिक सोने की ज्वेलरी तक सीमित नहीं रहना चाहती। बदलते ग्राहकों की पसंद को देखते हुए डायमंड, स्टर्लिंग सिल्वर, हल्की और रोजाना पहनी जा सकने वाली ज्वेलरी पर भी फोकस बढ़ाया जा रहा है। करीब 199 साल के इस सफर में कंपनी का फोकस सिर्फ ज्वेलरी बेचने पर नहीं रहा। शुद्धता, भरोसा और ग्राहकों के साथ लंबे रिश्ते को कारोबार की बड़ी ताकत बताया गया है।
