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NSEL Scam: 13 साल बाद ED को मिली ₹3464 करोड़ की संपत्ति बेचने की अनुमति; लौटाया जाएगा निवेशकों को पैसा

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:43 PM (IST)

NSEL Scam Latest News: मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट ने NSEL घोटाले में ED को 3,464 करोड़ रुपये की संपत्ति ...और पढ़ें

NSEL Scam में 13 साल का इंतजार खत्म! ₹5600 करोड़ के घोटाले में निवेशकों को मिलेंगे ₹1950 करोड़

NSEL Scam में 13 साल का इंतजार खत्म! ₹5600 करोड़ के घोटाले में निवेशकों को मिलेंगे ₹1950 करोड़

HighLights

  1. ED को NSEL घोटाले में संपत्ति बेचने की अनुमति मिली।

  2. 3,464 करोड़ की संपत्ति से निवेशकों को भुगतान होगा।

  3. 1,950 करोड़ रुपये 5,682 निवेशकों को मिलेंगे।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL Scam) घोटाले के शिकार निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुंबई की माननीय स्पेशल PMLA कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई करीब 3,464 करोड़ रुपए की संपत्ति को बेचने की इजाजत दे दी है। इस बिक्री से 5,682 तय निवेशकों को 1,950 करोड़ रुपए का एकमुश्त भुगतान (one time settlement) किया जाएगा। यह फैसला साल 2013 (करीब 13 साल बाद) से अपने पैसों का इंतजार कर रहे निवेशकों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

NCLT ने दी मंजूरी

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई ने इस सेटलमेंट स्कीम को पहले ही अपनी मंजूरी दे दी थी। कोर्ट के इस अहम आदेश के बाद, ED अब MPID (महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स) एक्ट की सक्षम अथॉरिटी के साथ सलाह-मशविरा करके इन संपत्तियों को बेचेगी।

इस बिक्री से मिलने वाले 1,950 करोड़ रुपए '63 मून्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड' (जो निवेशकों की प्रतिनिधि है) को दिए जाएंगे, ताकि वह 5,682 तय निवेशकों को पैसे लौटा सके। इस स्कीम के तहत निवेशकों को उनके वेरिफाइड क्लेम का कम से कम 42% हिस्सा वापस मिलने की पक्की उम्मीद है।

क्या है पूरा मामला?

साल 2013 में मुंबई के एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी, जिसे बाद में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दिया गया था। यह केस प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर, उसके डायरेक्टर्स और 25 डिफॉल्टिंग सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के लिए था।

आरोप था कि बिना असल स्टॉक के ही कमोडिटीज में ट्रेडिंग की अनुमति दे दी गई थी। इस फर्जीवाड़े के कारण बड़ा पेमेंट डिफॉल्ट हुआ, जिससे करीब 13,000 निवेशक बुरी तरह प्रभावित हुए और उन पर लगभग 5,600 करोड़ रुपये का बकाया हो गया।

इसके बाद ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। ED ने अब तक 35 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर करीब 3,464 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है।

28 नवंबर 2025 को NCLT ने 1,950 करोड़ रुपए के सेटलमेंट की स्कीम को मंजूरी दी थी, जिसे 92% से ज्यादा क्रेडिटर्स का समर्थन मिला था। इस फैसले के खिलाफ NCLAT और सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की गई, लेकिन दोनों जगह से याचिकाएं खारिज हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों को जल्द से जल्द पैसा लौटाने के लिए तुरंत आदेश लागू करने के निर्देश भी दिए थे।

पैसा दिलाने ED ने दिया NOC

ED ने निवेशकों को जल्द पैसा दिलाने के लिए इस पूरी व्यवस्था पर अपनी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) दे दी है। आदेश के मुताबिक, अगर संपत्ति बेचने पर 1,950 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मिलती है, तो वह बची हुई रकम अंतिम फैसला आने तक स्पेशल कोर्ट की कस्टडी में ही रहेगी।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी (जस्टिस रिटायर्ड प्रदीप नंदराजोग की अध्यक्षता में) के निर्देशों पर ED ने करीब 17.47 करोड़ रुपए निवेशकों को बांटे थे।

ED का स्पष्ट कहना है कि वह वित्तीय अपराधों से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने, मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम कसने और कानूनी रूप से सही निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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