सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

15 हजार की सैलरी और 25 हजार का दिखावा? नोएडा में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट पर कंपनियों की सफाई; एक्सपर्ट ने जताई चिंता

Published: Mon, 13 Apr 2026 10:30 PM (IST)

Noida Workers Protest: नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में कर्मचारियों का वेतन और सुविधाओं को लेकर गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। ...और पढ़ें

15 हजार की सैलरी और 25 हजार का दिखावा? नोएडा में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट पर कंपनियों की सफाई; एक्सपर्ट ने जताई चिंता

15 हजार की सैलरी और 25 हजार का दिखावा? नोएडा में कर्मचारियों के प्रोटेस्ट पर कंपनियों की सफाई; एक्सपर्ट ने जताई चिंता

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली| नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में पिछले तीन दिनों से सुलग रहा कर्मचारियों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर (Noida workers protest) फूट पड़ा। जो विरोध अब तक सिर्फ नारेबाजी तक सीमित था, उसने उग्र रूप ले लिया। सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर (Noida factory workers strike) उतर आए, जिसके चलते कई जगह जाम लग गया और कुछ इलाकों में तोड़फोड़ व आगजनी की खबरें भी आईं।

'कागजों पर 25 हजार, जेब में सिर्फ 15 हजार'

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कंपनियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनियों की हकीकत और उनके रिकॉर्ड में जमीन-आसमान का अंतर है।

  • सैलरी का फर्जीवाड़ा: महिला कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें असल में 9 से 11 हजार रुपए ही मिलते हैं, जबकि जांच के समय कंपनी रिकॉर्ड में इसे 25 हजार रुपए (Noida salary hike protest) दिखाया जाता है।
  • नाममात्र की बढ़ोतरी: कर्मचारियों का आरोप है कि सालों की मेहनत के बाद जब वेतन बढ़ाने की बात आती है, तो महज 200-300 रुपए बढ़ाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
  • काम के घंटे: कर्मचारियों का आरोप है कि कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन वेतन के नाम पर उनके हाथ खाली रहते हैं।

सुविधाएं नदारद, शोषण के आरोप भी लगे

कर्मचारियों का कहना है कि वे सुबह से रात तक खटते हैं, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। ओवरटाइम का पैसा या तो काट लिया जाता है या फिर दिया ही नहीं जाता। छुट्टी मिलना दूभर है और मेडिकल जैसी जरूरी सुरक्षाओं का कोई नामोनिशान नहीं है। महिला कर्मचारियों ने भी कार्यस्थल पर सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई है।

नोएडा की कंपनियों ने रखा अपना पक्ष

दूसरी ओर, कंपनियों ने इसे एक व्यापक औद्योगिक मुद्दा बताया है। नोएडा बेस्ड मदरसन ग्रुप का कहना है कि,

नोएडा समेत कई शहरों में इन दिनों सैलरी बढ़ने की गलत खबरों की वजह से उद्योगों में दिक्कतें आ रही हैं। जहां तक हमारी बात है, हम सभी सरकारी नियमों का पालन कर रहे हैं और हमारे कामकाज पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है। हमारे लिए अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है। प्रशासन भी इंडस्ट्री के साथ मिलकर हालात को जल्द से जल्द सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है।"

कर्मचारियों के प्रोटेस्ट पर एक्सपर्ट की राय

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति संवाद की कमी को दर्शाती है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल सिंह के अनुसार,

"कर्मचारियों का प्रोटेस्ट यह संकेत देता है कि इंडस्ट्री में कुछ अहम मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा प्रतीत होता है कि वेतन, काम की शर्तों और जॉब सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताएं इसके प्रमुख कारण हैं। यह स्थिति बताती है कि ग्रोथ के साथ एम्प्लॉयी एक्सपेक्टेशन को समझना जरूरी है। समाधान टकराव नहीं, बल्कि रेगुलर डायलॉग, ट्रस्ट बिल्डिंग और मजबूत ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम में है। जब वर्कर्स को संवाद और निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तब बेहतर और स्थायी समाधान निकलते हैं।"

प्रशासन का दखल: 10 तारीख तक देनी होगी सैलरी

बढ़ते विवाद को देखते हुए नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने औद्योगिक इकाइयों के साथ बैठक की और सख्त निर्देश जारी किए हैं:

  • सैलरी डेडलाइन: हर महीने की 10 तारीख से पहले वेतन देना अनिवार्य होगा।
  • सैलरी स्लिप: अब हर कर्मचारी को वेतन पर्ची (Salary Slip) देनी होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
  • ओवरटाइम का डबल पैसा: अगर तय समय से ज्यादा काम लिया गया या साप्ताहिक छुट्टी (Weekly Off) पर बुलाया गया, तो दोगुनी मजदूरी देनी होगी।
  • बोनस: दिवाली का बोनस 30 नवंबर से पहले मिल जाना चाहिए।
  • शिकायत और सुरक्षा: हर कंपनी में शिकायत पेटी (Complaint Box) लगेगी और महिलाओं के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन होगा।
  • कर्मचारियों की मुख्य मांग: न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया जाए, जो वर्तमान में सिर्फ 9 से 13 हजार के बीच अटका हुआ है।

फिलहाल, प्रशासन की सख्ती के बाद अब देखना यह होगा कि कंपनियां इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं और क्या कर्मचारियों का असंतोष शांत हो पाता है।

यह भी पढ़ें- एक बैरल क्रूड निकालने में कितना आता है खर्च? सऊदी के पूर्व मंत्री का बड़ा खुलासा; पेट्रोल-डीजल की कीमत का पूरा गणित

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।