Noida Protest: कब तक चलेगा श्रमिकों का आंदोलन? उद्यमियों को सता रहा निवेश का डर
नोएडा और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के वेतन वृद्धि प्रदर्शन से उद्योग जगत चिंतित है। उद्यमी इसे निवेश ...और पढ़ें

कब तक चलेगा श्रमिकों का आंदोलन। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
श्रमिकों के प्रदर्शन से उद्योग जगत में निवेश का डर।
हरियाणा में न्यूनतम वेतन वृद्धि तात्कालिक कारण बनी।
ईएसआई, आवास, नियुक्ति पत्र जैसे मुद्दे भी शामिल।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सोमवार को नोएडा से लेकर फरीदाबाद जैसे औद्योगिक इलाके में वेतन बढ़ोतरी को लेकर श्रमिकों के प्रदर्शन के लंबा चलने पर उद्योग जगत इसे निवेश के लिए प्रतिकूल मान रहा है। उद्योग जगत का यह भी मानना है कि श्रमिकों का प्रदर्शन एक दिन की समस्या नहीं है।
लेबर कोड को लागू करने के तहत हरियाणा में न्यूनतम वेतन में की गई 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी श्रमिकों के इस प्रदर्शन का तत्कालीन कारण तो हो सकता है, लेकिन कई कारण ऐसे भी हैं जिसे लेकर श्रमिकों में पहले से रोष है या वे उन सुविधा को लेकर खुद को ठगा महसूस करते हैं।
उद्यमियों ने बताया कि अगर इस प्रकार का संघर्ष जारी रहा तो उन्हें अपनी उत्पादन नीति को बदलना पड़ सकता है और अधिक से अधिक मशीनीकरण की ओर जाना पड़ेगा।
श्रमिकों को समस्या तो बात करें- विनोद शर्मा
इलेक्ट्रानिक्स मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी सीआईआई की राष्ट्रीय कमेटी के चेयरमैन और देकी इलेक्ट्रॉनिक्स के निदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि श्रमिकों को अगर समस्या है तो वे सरकार के माध्यम से बात कर सकते हैं, अपनी बातों को शांति पूर्वक रख सकते हैं, लेकिन इस तरीके से प्रदर्शन करने और उत्पादन को प्रभावित करने से तो मैन्यूफैक्चरिंग में निवेश का माहौल प्रभावित होगा।
वैसे ही नई पीढ़ी मैन्यूफैक्चरिंग में आने से कतरा रही है और अधिकतर निवेश सर्विस सेक्टर में हो रहे हैं।
नोएडा, गुरुग्राम व फरीदाबाद में श्रमिकों का प्रदर्शन
नोएडा, गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसी जगहों पर मुख्य रूप से बड़ी इकाइयों में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया। नोएडा में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़े एमएसएमई उद्यमी सुरेन्द्र नाहटा ने बताया कि श्रमिकों को इलाज के नाम उनके वेतन से ईएसआई सुविधा के लिए राशि ली जाती है, लेकिन अस्पताल की कमी के कारण वे उसका लाभ नहीं ले पाते हैं।
श्रमिकों के आवास की समस्या से जुड़े मुद्दे को प्रशासन के सामने कई बार उठाया गया, लेकिन इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया। अभी सिलिंडर नहीं मिलने से श्रमिकों को खाना-रहना मुश्किल लग रहा है, लेकिन उन्हें रहने की सुविधा मुफ्त में मिल गई होती तो उन्हें राहत होती।
उद्यमियों ने बताया कि श्रमिक छुट्टी में जाते हैं तो कई बार वे वापस नहीं आते हैं या फिर किसी और राज्य में काम करने चले जाते हैं। ऐसे में उद्यमी अपनी जरूरत के मुताबिक नए श्रमिकों को नियुक्त करेगा। उनके स्थायित्व की गारंटी नहीं ली जा सकती है।
राज्यों के बीच न्यूनतम मजदूरी में अंतर
राज्यों के बीच न्यूनतम मजदूरी में अंतर से श्रमिक हमेशा अपना कार्यस्थल ही नहीं राज्य तक बदलते रहते हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे सभी राज्यों में न्यूनतम वेतन अलग-अलग है।
इस साल एक अप्रैल से कई राज्यों ने अपने यहां न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की है जिसे देखकर उन बाकी के राज्यों में भी न्यूनतम वेतन में संशोधन की मांग उठने लगी है।
नियुक्ति पत्र को लेकर भी श्रमिक सवाल उठा रहे हैं। नियुक्ति पत्र मिलने से वे कंपनी से अपने जुड़ाव की दावेदारी कर सकते हैं। हालांकि उद्यमियों का कहना है कि श्रमिकों की नियुक्ति उत्पादन की मांग के मुताबिक होनी चाहिए और इस लचीलेपन से ही निवेश आकर्षित होगा।
