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कॉल सेंटर में काम करने वाला ये लड़का बना भारत का सबसे बड़ा ब्रोकर, महंगे विज्ञापन के बिना ही बदल दी पूरी इडस्ट्री

Published: Mon, 20 Apr 2026 04:42 PM (IST)Updated: Mon, 20 Apr 2026 05:22 PM (IST)

नितिन कामथ ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश की जटिलता और उच्च लागत को पहचानकर ज़ेरोधा की स्थापना की। कॉल ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में, जहां ज्यादातर संस्थापक बड़ी फंडिंग, ऊंचे वैल्यूएशन और आक्रामक विस्तार के पीछे भागते हैं, नितिन कामथ ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना। उनका ध्यान एक बहुत ही साधारण लेकिन अहम समस्या को सुलझाने पर था, भारत में शेयर बाजार में निवेश करना महंगा और जटिल था, जहां पारंपरिक ब्रोकर भारी फीस वसूलते थे। आज उनका यह दांव पूरी इंडस्ट्री को बदल चुका है।

जेरोधा (Zerodha) आज भारत के सबसे बड़े रिटेल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है, और कामथ को देश के सबसे प्रभावशाली वित्तीय उद्यमियों में गिना जाता है। उनकी कहानी सिर्फ संपत्ति बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि कैसे उन्होंने लाखों भारतीयों के लिए शेयर बाजार तक पहुंच को आसान बना दिया।

कॉल सेंटर की नौकरी से ट्रेडर बनने तक का सफर कैसे शुरू हुआ?

नितिन कामथ किसी पारंपरिक कॉर्पोरेट बैकग्राउंड से नहीं आए थे। उन्होंने काफी कम उम्र में ही बाजारों में ट्रेडिंग शुरू कर दी थी और साथ ही वे एक कॉल सेंटर में नाइट शिफ्ट भी करते थे। उस दौर में ट्रेडिंग करना आसान नहीं था। बाजार में भारी उतार-चढ़ाव था, जानकारी तक पहुंच सीमित थी और रिटेल निवेशकों के पास आज के मुकाबले बहुत कम टूल्स थे।

हालांकि, उन शुरुआती संघर्ष के वर्षों ने उन्हें जोखिम, मनोविज्ञान और छोटे निवेशकों पर पड़ने वाले लागत के बोझ का व्यावहारिक अनुभव दिया। बाद में जब उन्होंने एक सब-ब्रोकर के रूप में काम करना शुरू किया, तब उन्हें समझ में आया कि भारत के ब्रोकरेज उद्योग में बदलाव का एक बहुत बड़ा अवसर छिपा है। नितिन कामथ की नेटवर्थ फोर्ब्स के मुताबिक आज 4.8 बिलियन डॉलर (करीब 44,693 करोड़ रुपये) है।

जेरोधा का वह कौन सा आइडिया था जिसने ब्रोकिंग इंडस्ट्री को बदल दिया?

साल 2010 में, नितिन और उनके भाई ने एक बेहद साहसिक प्रस्ताव के साथ 'जेरोधा' की शुरुआत की। जहां बहुत कम लागत और पूरी तरह से पारदर्शी ट्रेडिंग होती है। ऐसे समय में जब ज्यादातर ब्रोकर प्रतिशत के आधार पर भारी कमीशन वसूलते थे, जेरोधा ने 'फ्लैट-फीस' मॉडल पेश किया। इस कदम ने विशेष रूप से एक्टिव ट्रेडर्स और लागत के प्रति जागरूक निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया।

इसकी टाइमिंग भी बिल्कुल सटीक थी। भारत डिजिटल युग में प्रवेश कर रहा था, स्मार्टफोन का विस्तार हो रहा था और युवा पीढ़ी इक्विटी के जरिए अपनी संपत्ति बनाने को लेकर उत्सुक हो रही थी। कामथ ने यह भांप लिया था कि यदि निवेश को सस्ता और सरल बना दिया जाए, तो लाखों लोग इसमें हिस्सा लेंगे।

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बिना वेंचर कैपिटल फंडिंग के यह विशाल साम्राज्य कैसे खड़ा हुआ?

जेरोधा के उदय का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि इसे बिना किसी बाहरी फंडिंग के खड़ा किया गया है। अंधाधुंध पैसा खर्च करने वाले अन्य स्टार्टअप्स के विपरीत, जेरोधा ने लाभप्रदता, अनुशासित खर्च और 'प्रोडक्ट-लेड' विस्तार पर अपना ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने महंगे विज्ञापन अभियानों पर पैसा बहाने के बजाय अपनी प्रतिष्ठा और 'वर्ड-ऑफ-माउथ' (लोगों की अनुशंसा) पर भरोसा किया।

इस 'बूटस्ट्रैप्ड' दृष्टिकोण ने कामथ को कंपनी के फैसलों पर पूरा नियंत्रण दिया और उन्हें उस अनावश्यक दबाव से बचाया जो अक्सर अवास्तविक ग्रोथ के पीछे भागने पर पैदा होता है। भारत के कई संस्थापकों के लिए आज भी यह बिजनेस मॉडल एक दुर्लभ उदाहरण है।

टेक्नोलॉजी जेरोधा की सबसे बड़ी ताकत कैसे बनी?

कामथ को यह बात बहुत जल्दी समझ आ गई थी कि ब्रोकिंग का भविष्य पूरी तरह से 'टेक्नोलॉजी' पर निर्भर करेगा। जेरोधा ने ट्रेडिंग के लिए काइट और डायरेक्ट म्यूचुअल फंड निवेश के लिए कॉइन जैसे इन-हाउस प्लेटफॉर्म विकसित किए। कंपनी ने पुराने और जटिल सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय गति, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और सरलता को प्राथमिकता दी। इससे पहली बार निवेश करने वाले उन लोगों को बहुत मदद मिली जो पुराने ब्रोकरेज सिस्टम के बजाय एक साफ और आसान डिजिटल इंटरफेस चाहते थे। जैसे-जैसे बाजार मोबाइल-आधारित होता गया, जेरोधा की टेक्नोलॉजी उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

क्या जेरोधा सिर्फ एक ब्रोकरेज फर्म है?

कामथ ने यह भी महसूस किया कि नए निवेशकों को सिर्फ ऐप्स की नहीं, बल्कि सही शिक्षा की भी जरूरत है। यहीं पर जेरोधा का 'वार्सिटी' (Varsity) प्लेटफॉर्म सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हुआ। इसने शेयर बाजार, ट्रेडिंग, निवेश और रिस्क मैनेजमेंट पर बिल्कुल मुफ्त शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई। यह इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कई भारतीय बिना किसी औपचारिक वित्तीय प्रशिक्षण के इक्विटी बाजार में प्रवेश कर रहे थे। अपने उपयोगकर्ताओं को शिक्षित करके, कंपनी ने उनका भरोसा जीता और एक दीर्घकालिक जुड़ाव स्थापित किया। वास्तव में, जेरोधा सिर्फ ब्रोकरेज सेवाएं नहीं बेच रहा था; वह निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ा रहा था।

दौलत बनाने को लेकर क्या है नितिन कामथ की फिलॉसफी?

नितिन कामथ अक्सर अनुशासन, लंबी अवधि की सोच और जोखिम नियंत्रण के बारे में सार्वजनिक रूप से बात करते हैं। वह अंधाधुंध सट्टेबाजी को बढ़ावा देने के बजाय लगातार निवेश करने, नुकसान को कम करने, डायवर्सिफिकेशन (विविधीकरण), भावनात्मक फैसलों से बचने और समय के साथ 'कंपाउंडिंग' (चक्रवृद्धि) की ताकत का सम्मान करने पर जोर देते हैं। उनका यह व्यावहारिक और स्पष्ट संदेश मध्यम वर्ग के उन वेतनभोगी निवेशकों को काफी पसंद आता है जो स्थिरता और समझदारी से अपनी संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं।